फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Banswara News ›   MP Rajkumar Roat filed PIL in Supreme Court against Government regarding the implementation of MESA Act

Rajasthan: SC पहुंची आदिवासी अधिकारों की लड़ाई ! सांसद राजकुमार रोत ने केंद्र को घेरा, MESA कानून पर उठाए सवाल

Thu, 23 Jul 2026 11:07 AM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो Updated Thu, 23 Jul 2026 11:07 AM IST
सार

Rajasthan News: बांसवाड़ा-डूंगरपुर के सांसद राजकुमार रोत ने अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी अधिकारों और नगर निकायों के गठन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में MESA कानून लागू होने तक अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निकायों के गठन और विस्तार पर रोक लगाने तथा केंद्र सरकार से जवाब तलब करने की मांग की गई है।
 

विज्ञापन
MP Rajkumar Roat filed PIL in Supreme Court against Government regarding the implementation of MESA Act
सांसद राजकुमार रोत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांसवाड़ा-डूंगरपुर से लोकसभा सांसद राजकुमार रोत ने देश के 10 राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले करोड़ों आदिवासी परिवारों के संवैधानिक अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर की है। यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है और इसमें अनुसूचित क्षेत्रों में शहरी स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू कराने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला डायरी संख्या 42179/2026 के रूप में दर्ज हो चुका है। याचिका में भारत सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है।
विज्ञापन


अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की जमीन पर खतरे का दावा
याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 243ZC और पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्था का प्रावधान है, लेकिन आज तक इन क्षेत्रों में शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित संवैधानिक ढांचा प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया। इसके कारण अनुसूचित क्षेत्रों में संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत राज्य सरकारों द्वारा सामान्य कानूनों के तहत नगर पालिका, नगर परिषद एवं नगर निगमों का गठन किया जा रहा है, जिससे स्थानीय आदिवासी परिवारों की पारंपरिक जमीनें छीनी जा रही हैं। उनके संवैधानिक अधिकारों का पूरा लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई?
याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से मांग की गई है कि देश के 10 राज्यों में, जहां पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र घोषित हैं, वहां सीधे नगर निकायों का गठन या उनका विस्तार करना संविधान के अनुच्छेद 244(1) के प्रावधानों का उल्लंघन है।
विज्ञापन
विज्ञापन


फैसला आया तो आदिवासियों को क्या फायदा होगा?
राजकुमार रोत ने कहा कि यह मामला केवल किसी एक राज्य या क्षेत्र का नहीं, बल्कि देश के सभी अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लाखों-करोड़ों आदिवासी परिवारों के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि यदि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप निर्देश जारी करता है, तो अनुसूचित क्षेत्रों में शहरी शासन व्यवस्था को लेकर वर्षों से चली आ रही अस्पष्टता समाप्त हो सकती है और आदिवासी समुदायों को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का वास्तविक लाभ मिलेगा।


यह भी पढ़ें: बीच सड़क युवक को मारी गोली! मामूली विवाद के बाद फायरिंग; शराब कारोबार का भी जुड़ रहा कनेक्शन

MESA कानून नहीं बनने पर केंद्र सरकार पर सवाल
प्रावधान यह है कि अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निकायों के गठन से पूर्व संसद को MESA कानून बनाना आवश्यक है, लेकिन आज तक केंद्र सरकार ने इस कानून को पारित नहीं किया है। वर्ष 2001 में केंद्र सरकार एक बिल लेकर आई थी, जिसे 30 जुलाई 2001 को संसद में पेश किया गया था। इसके बाद इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया। दो वर्ष बाद नवंबर 2003 में समिति ने अपने सुझावों के साथ इसे संसद को वापस भेज दिया, लेकिन आज तक यह विधेयक पारित नहीं हो सका। सांसद रोत ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि केंद्र सरकार से इस संबंध में जवाब तलब किया जाए और जब तक MESA कानून लागू नहीं होता, तब तक देश के अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निकायों के गठन एवं विस्तार पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed