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Barmer: ओरण-देवबन को डिम्ड फोरेस्ट घोषित करने पर उठी आवाज, कलेक्टर टीना डाबी ने सुनी ग्रामीणों की आपत्तियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर Published by: बाड़मेर ब्यूरो Updated Wed, 28 Jan 2026 10:48 AM IST
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सार

बाड़मेर में ओरण व देवबन भूमि को डिम्ड फोरेस्ट घोषित करने को लेकर कलेक्टर टीना डाबी ने ग्रामीणों की आपत्तियां सुनीं। प्रशासन ने जनहित प्राथमिकता और चारागाह व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिलाया।

Barmer Collector Tina Dabi heard the objections of the general public regarding the declaration deemed forests
डिम्ड फोरेस्ट घोषित करने को लेकर हुई जनसुनवाई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बाड़मेर जिले में ओरण और देवबन भूमि को डिम्ड फोरेस्ट घोषित किए जाने को लेकर जिला मुख्यालय पर जिला कलेक्टर टीना डाबी की अध्यक्षता में आमजन की आपत्तियों पर विचार-विमर्श हेतु बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के विभिन्न इलाकों से आए ग्रामीणों ने ओरण भूमि को डिम्ड फोरेस्ट घोषित करने को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

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जिला कलेक्टर टीना डाबी ने बताया कि रिट याचिका टी.एन. गोदवर्मन थिरूमुलपाद बनाम भारत संघ एवं अन्य के आदेशों की पालना तथा केंद्रीय सशक्त समिति (सीईसी) की सिफारिशों के अनुसार बाड़मेर जिले में ओरण और देवबन भूमि को डिम्ड फोरेस्ट घोषित किए जाने की प्रक्रिया के तहत प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार एवं जनहित को प्राथमिकता देते हुए ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। कलेक्टर ने ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत की गई आपत्तियों की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई करते हुए भरोसा दिलाया कि उनके सुझावों और चिंताओं को गंभीरता से लिया जाएगा।
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इस दौरान उपवन संरक्षक सविता दहिया ने ग्रामीणों की ओर से मवेशियों के चारागाह को लेकर जताई गई आशंकाओं पर स्पष्ट किया कि डिम्ड फोरेस्ट घोषित होने के बाद भी आमजन को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पारंपरिक चारागाहों एवं सामुदायिक उपयोगिता का पूरा ध्यान रखा जाएगा तथा मवेशियों के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में वीरातरा ट्रस्ट, शिवकर, चूली, ग्राम पंचायत बालेरा एवं रड़वा सहित कई गांवों से आए ग्रामीणों ने चिंता जताई कि ओरण और देवबन भूमि डिम्ड फोरेस्ट के रूप में दर्ज होने से स्थानीय आबादी और पशुधन के लिए चारागाह की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ग्रामीणों ने बताया कि सदियों से ओरण भूमि पर उनकी आजीविका और पशुधन निर्भर रहा है तथा कई स्थानों पर धार्मिक स्थल एवं अन्य निर्माण भी मौजूद हैं। बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह चांदावत सहित विभिन्न उपखंड अधिकारी, तहसीलदार तथा राजस्व और वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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