{"_id":"6860a74b504d0e138c0c10b0","slug":"bharatpur-news-how-old-is-bahaj-village-archaeological-department-uncovers-traces-of-ancient-civilization-2025-06-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bharatpur News: कितना पुराना है बहज गांव का इतिहास? पुरातत्व विभाग को 2500 ईस्वी प्राचीन सभ्यता के सुराग मिले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bharatpur News: कितना पुराना है बहज गांव का इतिहास? पुरातत्व विभाग को 2500 ईस्वी प्राचीन सभ्यता के सुराग मिले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sun, 29 Jun 2025 08:09 AM IST
विज्ञापन
सार
डीग के बहज गांव में बीते छह महीनों से पुरातत्व विभाग द्वारा की जा रही खुदाई के दौरान प्राचीन सभ्यता से जुड़े कुछ साक्ष्य मिले हैं। खुदाई में एक नर कंकाल भी मिला है, जिसे जांच के लिए इजराइल भेजा गया है।
राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
पुरातत्व विभाग को जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर डीग के बहज गांव में खुदाई के दौरान मौर्य, शुंग और महाभारत काल की सभ्यता की मूर्तियां, बर्तन, धातु के हथियार मिले | राजस्थान के भारतीय पुरातत्व विभाग ने शोध के दौरान बहज गांव में एक जगह की पहचान की है, जहां प्राचीन सभ्यता से जुड़े कुछ साक्ष्य मिले हैं| भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद राज्य पुरातत्व विभाग की टीम ने यहां खुदाई का काम शुरू किया। उन्हें वहां से मूर्तियां, बर्तन और धातु के हथियार जैसे कुछ अनोखे साक्ष्य मिले हैं। खुदाई में एक नर कंकाल भी मिला है, जिसे जांच के लिए इजराइल भेजा गया है, जिससे यह पता चल सके कि यह नर कंकाल कितने वर्ष पुराना है |
Trending Videos
खुदाई में मिली इन मूर्तियों को पुरातत्व विभाग जयपुर भेज दिया गया है, जबकि कुछ को दर्शकों के लिए डीग जल महल के संग्रहालय में रखा गया है । गांव बहज, बृज क्षेत्र का हिस्सा है, जो उत्तरप्रदेश की मथुरा सीमा से सटा एक प्राचीन गांव है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: Hanumangarh: महिला यात्री के बैग से जेवरात चोरी करने के मामला, तीन संदिग्धों के सार्वजनिक हुए सीसीटीवी फुटेज
इसके अलावा भरतपुर तहसील के नौह गांव में 1961 से 1963 तक सभ्यता के साक्ष्य जुटाने के लिए खुदाई की गई थी। पुरातत्व विभाग जयपुर के निदेशक डॉ. विनय गुप्ता ने बताया कि विभाग ने सरकार से अनुमति मिलने के बाद 10 जनवरी से शुरू की गई खुदाई के लिए सर्वे कराया था। गुप्ता ने बताया कि खुदाई के दौरान हमें अनूठी सफलता मिली है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। सभ्यता के और भी साक्ष्य मिलने की संभावनाएं हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार खुदाई से जो साक्ष्य मिले हैं, वे करीब 2500 ईस्वी के हैं। भरतपुर रेंज उत्तरप्रदेश की आगरा और मथुरा सीमा को छूती है, जबकि ऐतिहासिक स्थल भगवान कृष्ण की लीलाओं के लिए जाने जाते हैं। यह जिला बृज की 84 कोस परिक्रमा के अंतर्गत आता है। कुछ दिन पहले स्थानीय प्रशासन ने डीग के जल महल स्थित संग्रहालय में बहज गांव में की गई खुदाई में मिले इन अवशेषों को आम आदमी को देखने के लिए रखा था। विभाग को उम्मीद है कि लगातार छह महीनों से जारी इस खुदाई में इससे भी ज्यादा पुराने युग की चीज मिल सकती है |