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पाकिस्तान सीमा पर तस्करी: ड्रोन में आती थी हथियारों की खेप, भारत की इस जेल से जुड़ें हैं तार
Wed, 22 Jul 2026 10:23 AM IST
बीकानेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
Published by: बीकानेर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2026 10:23 AM IST
सार
बीकानेर पुलिस ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के जरिए हथियारों की तस्करी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से गिराए गए हथियारों को जीपीएस लोकेशन के आधार पर उठाकर आगे सप्लाई करते थे।
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पाकिस्तान से हथियारों की ड्रोन सप्लाई का नेटवर्क बेनकाब
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के जरिए हथियारों की तस्करी कर देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाले नेटवर्क के खिलाफ बीकानेर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों के साथ ही पुलिस ने उस संगठित मॉड्यूल की महत्वपूर्ण कड़ियों को उजागर किया है, जो पाकिस्तान से भेजी गई हथियारों की खेप को भारतीय सीमा में रिसीव कर आगे पहुंचाने का काम कर रहा था।
ड्रोन के जरिए सप्लाई होते थे हथियार
खाजूवाला थाना क्षेत्र में दर्ज इस बहुचर्चित मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरफ्तार आरोपी सीधे तौर पर मुख्य हैंडलर सोनू उर्फ सुखविंदर के संपर्क में थे। यही हैंडलर पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के माध्यम से गिराए गए हथियारों की लोकेशन अपने नेटवर्क के सदस्यों तक पहुंचाता था। इसके बाद आरोपी तय स्थान पर पहुंचकर हथियारों का पेलोड उठाते और उसे आगे सप्लाई चेन में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचाते थे।
दरअसल, 27 फरवरी 2026 को खाजूवाला क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए हथियार गिराए जाने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस मामले में पहले मुखविंद्र सिंह उर्फ मोनू को गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। इसके बाद पुलिस लगातार नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी हुई थी।
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दो आरोपी पंजाब व एक श्रीगंगानगर से गिरफ्तार
गहन जांच और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने पंजाब के फाजिल्का जिले से करण सिंह और गुरकीरत सिंह को गिरफ्तार किया, जबकि तीसरे आरोपी अवतार सिंह को श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र से पकड़ा गया। पूछताछ में सामने आया कि करण सिंह और गुरकीरत सिंह नेटवर्क में फुट सोल्जर के रूप में काम करते थे। उनका मुख्य काम सीमा क्षेत्र में ड्रोन से गिराए गए हथियारों को सुरक्षित तरीके से उठाकर निर्धारित ठिकानों तक पहुंचाना था।
फरीदकोट जेल से जुड़ें हैं तार
जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, करण सिंह की मुलाकात मुख्य हैंडलर सोनू उर्फ सुखविंदर से फरीदकोट जेल में हुई थी, जहां से दोनों के बीच संपर्क स्थापित हुआ। वहीं, गुरकीरत सिंह अपने ससुराल पक्ष के माध्यम से इस नेटवर्क से जुड़ा। इसके बाद दोनों को ड्रोन ड्रॉपिंग की गतिविधियों में शामिल किया गया और जीपीएस लोकेशन के जरिए हथियारों की खेप उठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। पुलिस ने आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला है। प्रारंभिक जांच में करण सिंह के खिलाफ पंजाब में एनडीपीएस एक्ट के तहत दो मामले दर्ज पाए गए हैं। अवतार सिंह के खिलाफ श्रीगंगानगर जिले में एनडीपीएस एक्ट, चोरी और विद्युत अधिनियम के प्रकरण दर्ज हैं। वहीं, गुरकीरत सिंह के पुराने रिकॉर्ड की जांच जारी है और उसके पूर्व में भी ड्रोन ड्रॉपिंग गतिविधियों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
नेटवर्क की पड़ताल जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सीमा पार संचालित उस नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है, जो ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर भारत में हथियार पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की पूरी संरचना, वित्तीय लेन-देन, स्थानीय सहयोगियों और सीमा पार बैठे संचालकों की भूमिका को लेकर गहन पड़ताल कर रही हैं।
ये भी पढ़ें- शराब की लत, कहासुनी और फिर कत्ल... संदूक में लाश छिपाकर बेखबर बैठा रहा पति; ऐसे खुला राज
क्या बोले पुलिस महानिरीक्षक?
पुलिस महानिरीक्षक ओमप्रकाश और जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के निर्देशन में चल रही इस जांच का नेतृत्व सहायक पुलिस अधीक्षक अनुष्ठा कालिया कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रकरण के रूप में देखते हुए हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं।
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ड्रोन के जरिए सप्लाई होते थे हथियार
खाजूवाला थाना क्षेत्र में दर्ज इस बहुचर्चित मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरफ्तार आरोपी सीधे तौर पर मुख्य हैंडलर सोनू उर्फ सुखविंदर के संपर्क में थे। यही हैंडलर पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के माध्यम से गिराए गए हथियारों की लोकेशन अपने नेटवर्क के सदस्यों तक पहुंचाता था। इसके बाद आरोपी तय स्थान पर पहुंचकर हथियारों का पेलोड उठाते और उसे आगे सप्लाई चेन में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचाते थे।
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दरअसल, 27 फरवरी 2026 को खाजूवाला क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए हथियार गिराए जाने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस मामले में पहले मुखविंद्र सिंह उर्फ मोनू को गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। इसके बाद पुलिस लगातार नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी हुई थी।
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दो आरोपी पंजाब व एक श्रीगंगानगर से गिरफ्तार
गहन जांच और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने पंजाब के फाजिल्का जिले से करण सिंह और गुरकीरत सिंह को गिरफ्तार किया, जबकि तीसरे आरोपी अवतार सिंह को श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र से पकड़ा गया। पूछताछ में सामने आया कि करण सिंह और गुरकीरत सिंह नेटवर्क में फुट सोल्जर के रूप में काम करते थे। उनका मुख्य काम सीमा क्षेत्र में ड्रोन से गिराए गए हथियारों को सुरक्षित तरीके से उठाकर निर्धारित ठिकानों तक पहुंचाना था।
फरीदकोट जेल से जुड़ें हैं तार
जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, करण सिंह की मुलाकात मुख्य हैंडलर सोनू उर्फ सुखविंदर से फरीदकोट जेल में हुई थी, जहां से दोनों के बीच संपर्क स्थापित हुआ। वहीं, गुरकीरत सिंह अपने ससुराल पक्ष के माध्यम से इस नेटवर्क से जुड़ा। इसके बाद दोनों को ड्रोन ड्रॉपिंग की गतिविधियों में शामिल किया गया और जीपीएस लोकेशन के जरिए हथियारों की खेप उठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। पुलिस ने आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला है। प्रारंभिक जांच में करण सिंह के खिलाफ पंजाब में एनडीपीएस एक्ट के तहत दो मामले दर्ज पाए गए हैं। अवतार सिंह के खिलाफ श्रीगंगानगर जिले में एनडीपीएस एक्ट, चोरी और विद्युत अधिनियम के प्रकरण दर्ज हैं। वहीं, गुरकीरत सिंह के पुराने रिकॉर्ड की जांच जारी है और उसके पूर्व में भी ड्रोन ड्रॉपिंग गतिविधियों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
नेटवर्क की पड़ताल जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सीमा पार संचालित उस नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है, जो ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर भारत में हथियार पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की पूरी संरचना, वित्तीय लेन-देन, स्थानीय सहयोगियों और सीमा पार बैठे संचालकों की भूमिका को लेकर गहन पड़ताल कर रही हैं।
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क्या बोले पुलिस महानिरीक्षक?
पुलिस महानिरीक्षक ओमप्रकाश और जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के निर्देशन में चल रही इस जांच का नेतृत्व सहायक पुलिस अधीक्षक अनुष्ठा कालिया कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रकरण के रूप में देखते हुए हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं।