सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Chittorgarh News ›   Departure of Mewar Mahamandleshwar to heaven

Chittorgarh News: महामंडलेश्वर चेतन दास का देवलोकगमन, मेवाड़ में शोक की लहर, कल निकाली जाएगी डोल यात्रा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़ Published by: चित्तौड़गढ़ ब्यूरो Updated Fri, 04 Jul 2025 06:48 PM IST
विज्ञापन
सार

मेवाड़ के सांवलिया धाम आश्रम, मुंगाना के महंत चेतनदास महाराज का हृदयाघात से निधन हो गया। उन्होंने 700 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया था। उनकी डोल यात्रा शनिवार को निकाली जाएगी।

Departure of Mewar Mahamandleshwar to heaven
महंत चेतनदास महाराज नहीं रहे। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

मेवाड़ के महामंडलेश्वर और सांवलिया धाम आश्रम मुंगाना के महंत चेतनदास महाराज का शुक्रवार को हृदयाघात के चलते देवलोकगमन हो गया। शुक्रवार सुबह उन्होंने आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं से भेंट भी की थी, लेकिन करीब 10:15 बजे उन्हें अचानक हृदयाघात हुआ, जिससे उनका निधन हो गया।

Trending Videos


महंत चेतनदास महाराज की डोल यात्रा शनिवार सुबह 8 बजे निकलेगी, आश्रम परिसर में ही सुबह 11 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए आश्रम में रखा गया है। उनके निधन की खबर से मेवाड़ और मालवा अंचल में शोक की लहर दौड़ गई है। मुंगाना धाम के महामंडलेश्वर चेतनदास महाराज के हजारों अनुयायी और भक्त हैं। निधन की सूचना मिलते ही सांवलिया धाम आश्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे। धर्मप्रेमियों ने उनके निधन को एक अपूरणीय क्षति बताया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


700 से अधिक मंदिरों का कराया जीर्णोद्धार
मेवाड़ की शक्ति, भक्ति और त्याग की भूमि पर स्थित कपासन क्षेत्र के मुंगाना स्थित सांवलिया धाम आश्रम के महंत चेतनदास महाराज का पूरा जीवन धर्म और संस्कृति की सेवा को समर्पित रहा। वे उपेक्षित और जर्जर हो चुके धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार में सदैव अग्रणी रहे। अपने जीवनकाल में उन्होंने 700 से अधिक मंदिरों का कायाकल्प कराया। 90 वर्ष की आयु तक वे सतत रूप से सक्रिय रहे। उनकी प्रवचन, कथाएं और भजन सुनने दूर-दराज से श्रद्धालु उनके आश्रम आया करते थे। यही कारण है कि चेतनदास महाराज पूरे संभाग में पूजनीय और श्रद्धेय व्यक्तित्व बन गए थे।

ये भी पढ़ें: फर्जी SI बनकर रौब जमाने वाली मोना बुगालिया गिरफ्तार, पुलिस कार्रवाई में वर्दी-बैच और आईडी जब्त

कुंभ में खालसे का आयोजन 
महामंडलेश्वर चेतनदास महाराज कुंभ में मीरा मेवाड़ खालसे का आयोजन करते रहे थे। उन्होंने 33 साल पहले शुरू की गई इस परंपरा को जीवन्त रखा और हाल ही में प्रयागराज मेंं भी मेवाड़ खालसा लगा कर हजारों श्रद्धालुओं को सुविधाएं दी थी। महाराज के सरस, सरल और भक्तिमय व्यवहार के कारण मेवाड़ क्षेत्र के हर गांव-गांव में उनके शिष्य हैं। गुरु पूर्णिमा पर एक लाख से अधिक शिष्य मुंगाना धाम पहुंचते थे।

ये भी पढ़ें: भाजपा सरकार पर जमकर बरसे डोटासरा और टीकाराम जूली, कहा- माल लूटने में लगे हैं मंत्री

गुरु से ली प्रेरणा, बाल्यकाल में चुना वैराग्य
चेतनदास का जन्म गंगरार क्षेत्र के करेड़िया में हुआ। उनके बचपन का नाम गणेश था। बाल्यकाल में ही इसी क्षेत्र के संत बिहारी दास से वे प्रभावित हुए थे और वे उन्हीं की शरण में चले गए। उनके गुरु बिहारी दास मुंगाना के नृर्सिंहद्वारा में रहने लगे। 1961 में संत बिहारीदास का देहावसान होगा और तभी से वे गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाने लगे। बताते हैं कि वे मात्र 3 साल की आयु में ही धर्म के पथ पर बढ़े और उनकी माता ने गुरु बिहारी दास के चरणों में उन्हें समर्पित कर दिया। उनके गुरु ने मालवा स्थित खोर गांव में मोक्ष की प्राप्ति की थी। उनकी चरण पादुका मुक्तिधाम की स्थापित हैं। करीब 70 साल पहले से ही मुंगाना रह कर महन्त चेतनदास ने विद्यार्थियों को पढ़ाना, कथा वाचन, भजन के साथ-साथ भक्तिमति मां मीरा बाई के नाम को आगे बढ़ाया और देश ही नहीं विदेशों तक में मां मीरा की अलग पहचान करवाई।
 

चित्तौड़गढ़ जिले के मुंगाना महंत के देवलोकगमन पर पहुंचे श्रद्धालु।

 

चित्तौड़गढ़ जिले के मुंगाना महंत के देवलोकगमन पर पहुंचे श्रद्धालु।

 

चित्तौड़गढ़ जिले के मुंगाना महंत के देवलोकगमन पर पहुंचे श्रद्धालु।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed