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Rajasthan: बिजली विभाग की लापरवाही ने ली दो जिंदगियां, खेत से लौट रहे दादा-पोते की करंट लगने से मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़
Published by: चित्तौड़गढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 08:28 PM IST
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सार
गंगरार थाना क्षेत्र में विद्युत निगम की घोर लापरवाही के कारण एक ही परिवार के दो चिराग बुझ गए। गंगरार क्षेत्र के जोजरो का खेड़ा गांव में 11 हजार केवी लाइन की चपेट में आने से दादा और उनके मासूम पोते की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
मौके पर आक्रोश जताते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार थाना क्षेत्र के जोजरो का खेड़ा गांव में 11 हजार केवी की क्षतिग्रस्त हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आने से दादा और उनके मासूम पोते की दर्दनाक मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि चार दिन पहले आंधी में लाइन क्षतिग्रस्त होने की सूचना देने के बावजूद विद्युत निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। घटना के बाद ग्रामीणों ने शव उठाने से इनकार कर धरना शुरू कर दिया और जिम्मेदार अधिकारियों के निलंबन की मांग की।
जिले के गंगरार थाना क्षेत्र में विद्युत निगम की घोर लापरवाही के कारण एक ही परिवार के दो चिराग बुझ गए। गंगरार क्षेत्र के जोजरो का खेड़ा गांव में 11 हजार केवी की हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आने से दादा और उनके मासूम पोते की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे गांव में कोहराम मच गया है और ग्रामीणों में बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है।
खेत से लौटते समय हुआ दर्दनाक हादसा
जोजरो का खेड़ा निवासी दादा अपने पोते के साथ खेत पर काम करने गए थे। दिनभर खेत में काम निपटाने के बाद जैसे ही दोनों शाम को खेत से बाहर निकल रहे थे, तभी वहां से गुजर रही 11 हजार केवी की हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आ गए। करंट लगने से दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
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चार दिन पहले टूटी थी लाइन, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
यह हादसा किसी प्राकृतिक आपदा का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर विद्युत निगम की कथित लापरवाही का परिणाम बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, चार दिन पूर्व क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान के कारण 11 हजार केवी की विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त होकर नीचे लटक गई थी। इसकी सूचना तत्काल बिजली विभाग को दी गई थी, लेकिन विभाग ने न तो लाइन की मरम्मत करवाई और न ही उसमें प्रवाहित हो रहे करंट को बंद किया।
हादसे के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
घटना की खबर फैलते ही जोजरो का खेड़ा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। परिजनों और ग्रामीणों ने शवों को उठाने से इंकार करते हुए मौके पर ही धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते विभाग कार्रवाई करता तो यह हादसा टाला जा सकता था।
दोषी अधिकारियों के निलंबन की मांग
ग्रामीणों ने संबंधित क्षेत्र के जेईएन सहित उन सभी विद्युत कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिनकी अनदेखी के कारण दो लोगों की जान गई। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए।
पुलिस और प्रशासन मौके पर
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए गंगरार थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। अधिकारी ग्रामीणों को समझाने और स्थिति को सामान्य करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
यह भी पढ़ें: पांचना पर कब्जे की जंग, पानी के लिए आमने-सामने 74 गांव; संघर्ष की आहट तेज
फिर सवालों के घेरे में बिजली विभाग
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और जनसुरक्षा को लेकर किए जाने वाले दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय लापरवाही के कारण दो निर्दोष लोगों की जान चली गई।
जिले के गंगरार थाना क्षेत्र में विद्युत निगम की घोर लापरवाही के कारण एक ही परिवार के दो चिराग बुझ गए। गंगरार क्षेत्र के जोजरो का खेड़ा गांव में 11 हजार केवी की हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आने से दादा और उनके मासूम पोते की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे गांव में कोहराम मच गया है और ग्रामीणों में बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है।
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खेत से लौटते समय हुआ दर्दनाक हादसा
जोजरो का खेड़ा निवासी दादा अपने पोते के साथ खेत पर काम करने गए थे। दिनभर खेत में काम निपटाने के बाद जैसे ही दोनों शाम को खेत से बाहर निकल रहे थे, तभी वहां से गुजर रही 11 हजार केवी की हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आ गए। करंट लगने से दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
चार दिन पहले टूटी थी लाइन, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
यह हादसा किसी प्राकृतिक आपदा का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर विद्युत निगम की कथित लापरवाही का परिणाम बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, चार दिन पूर्व क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान के कारण 11 हजार केवी की विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त होकर नीचे लटक गई थी। इसकी सूचना तत्काल बिजली विभाग को दी गई थी, लेकिन विभाग ने न तो लाइन की मरम्मत करवाई और न ही उसमें प्रवाहित हो रहे करंट को बंद किया।
हादसे के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
घटना की खबर फैलते ही जोजरो का खेड़ा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। परिजनों और ग्रामीणों ने शवों को उठाने से इंकार करते हुए मौके पर ही धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते विभाग कार्रवाई करता तो यह हादसा टाला जा सकता था।
दोषी अधिकारियों के निलंबन की मांग
ग्रामीणों ने संबंधित क्षेत्र के जेईएन सहित उन सभी विद्युत कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिनकी अनदेखी के कारण दो लोगों की जान गई। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए।
पुलिस और प्रशासन मौके पर
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए गंगरार थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। अधिकारी ग्रामीणों को समझाने और स्थिति को सामान्य करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
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फिर सवालों के घेरे में बिजली विभाग
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और जनसुरक्षा को लेकर किए जाने वाले दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय लापरवाही के कारण दो निर्दोष लोगों की जान चली गई।