Rajasthan Weather: चित्तौड़गढ़ में मावठ का कहर, 36 घंटे की तेज बारिश से छलके तालाब; घोसुण्डा बांध के गेट खुले
चित्तौड़गढ़ में रविवार रात से शुरू हुई मावठ की झमाझम बारिश मंगलवार दोपहर तक जारी रही। लगातार 36 घंटे से हो रही वर्षा से तापमान में गिरावट आई, कई तालाब छलक उठे और घोसुण्डा बांध के दो गेट खोलने पड़े।
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चित्तौड़गढ़ जिले में रविवार देर रात से शुरू हुई बरसात का दौर लगातार जारी रहा। लगातार हो रही बारिश ने मावठ का अहसास करा दिया है। चित्तौड़गढ़ मुख्यालय समेत आसपास के इलाकों में हुई जोरदार बारिश से खेतों में पानी भर गया, वहीं तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। पिछले 48 घंटे से सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए हैं। लगातार हो रही बारिश से जलाशयों में पानी की भारी आवक हुई है। घोसुण्डा बांध के दो गेट खोल दिए गए हैं, जिससे बेड़च नदी में तेज बहाव हो गया है। वहीं गंभीरी नदी में भी पानी की आवक बढ़ गई है।
जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह समाप्त हुए पिछले 24 घंटों में गंगरार में सर्वाधिक 114 मिमी वर्षा दर्ज की गई। बड़ीसादड़ी में 105 मिमी, डूंगला में 88 मिमी, वागन बांध पर 100 मिमी, गंभीरी बांध पर 92 मिमी, बस्सी बांध पर 89 मिमी, चित्तौड़गढ़ में 68 मिमी, कपासन में 58 मिमी और भूपालसागर में 61 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इस बरसात से जिले के कई तालाबों में पानी की आवक तेज हो गई है। खास बात यह है कि मानसून में सूखे पड़े तालाब अब छलकने लगे हैं।
ठंडी हवाओं ने बढ़ाई सर्दी
मावठ की बरसात से मौसम में ठंडक घुल गई है और तापमान में करीब 10 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई। लोग छातों और रेनकोट में नजर आए, जबकि कई जगह लोग अलाव जलाकर ठंड से राहत लेते दिखे। मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर तक येलो अलर्ट जारी किया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने तेज हवाएं चलने, बिजली कड़कने और मेघ गर्जना की संभावना भी जताई है।
किसानों को दोहरा नुकसान, अफीम की फसल पर खतरा
लगातार दो दिन से हो रही बेमौसम बरसात ने खेती-किसानी पर प्रतिकूल असर डाला है। मवेशियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं जिले की प्रमुख नगदी फसल अफीम पर भी इसका विपरीत असर देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि कई किसानों ने दिवाली के आसपास बुवाई कर दी थी, जो अब बारिश से खराब हो गई है। अब बुवाई के लिए कम से कम पखवाड़ेभर का इंतजार करना पड़ेगा, जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा। खेतों में पानी भर जाने से अफीम की फसल देरी से तैयार होगी।
कृषि उप निदेशक शंकरलाल जाट ने बताया कि इस बरसात का किसानों पर अच्छा और बुरा दोनों असर पड़ेगा। जिन क्षेत्रों में गेहूं, चना और सरसों की बुवाई हो चुकी है, वहां सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन जहां बुवाई बाकी है, वहां किसानों को कुछ दिन इंतजार करना होगा।
बेगूं क्षेत्र में फसलों को नुकसान, औसत से अधिक बारिश
बेगूं क्षेत्र में बेमौसम बरसात ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खरीफ और रबी दोनों फसलों पर असर पड़ा है। खरीफ की फसलें खलिहान में पड़ी होने से भीगकर खराब हो गईं, जबकि रबी की बुवाई शुरू नहीं हो पाई है। मवेशियों के लिए चारे का संकट भी गहराया है। अब तक बेगूं क्षेत्र में 1091 मिमी वर्षा हो चुकी है, जो औसत से 300 मिमी अधिक है।
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कपासन में छलका गुलाब सागर, खुश हुए ग्रामीण
कपासन क्षेत्र में मानसून के दौरान कम वर्षा से तालाब खाली पड़े थे, जिसके चलते ग्रामीणों ने आंदोलन तक किया था। लेकिन इस मावठ की बारिश से अब गुलाब सागर तालाब छलक गया है, जिससे क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है। राजेश्वर तालाब में भी पानी की भारी आवक हुई है और दोवनी पुलिया पर पानी बहने लगा है। बरसात से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।
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