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चित्तौड़गढ़ को केंद्र की बड़ी सौगात; कोटा-चित्तौड़गढ़ रेलखंड दोहरीकरण का रास्ता साफ, फाइनल लोकेशन सर्वे मंजूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,चित्तौड़गढ़
Published by: चित्तौड़गढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Apr 2026 07:58 AM IST
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सार
Rajasthan: कोटा (गुड़ला)-चित्तौड़गढ़ रेलखंड के दोहरीकरण के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी मिल गई है, जिससे इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना को गति मिलेगी। इस खंड के विकसित होने से क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्री व माल परिवहन आसान होगा।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र की मोदी सरकार ने कोटा (गुड़ला)-चित्तौड़गढ़ रेल खंड के दोहरीकरण के लिए रेलवे द्वारा फाइनल लोकेशन सर्वे को स्वीकृति दे दी है। बता दें कि इसके लिए सांसद सी.पी. जोशी द्वारा समय-समय पर रेल मंत्री से उदयपुर-चंदेरिया-कोटा रेलमार्ग के दोहरीकरण के संबंध में आग्रह किया गया था, जिस पर महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस परियोजना के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
दोहरीकरण की आवश्यकता पर दिया जोर
मांग पूरी होने पर सांसद सी.पी. जोशी ने बताया कि उन्होंने रेल मंत्री को पत्र लिखकर उदयपुर-चंदेरिया-कोटा रेलमार्ग के दोहरीकरण की आवश्यकता से अवगत कराया था। इस मार्ग पर बढ़ते यात्री एवं माल परिवहन के दबाव को देखते हुए इसे प्राथमिकता से स्वीकृत करने का अनुरोध किया गया था। रेल मंत्रालय द्वारा इस प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल करते हुए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी देना क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कोटा (गुड़ला)-चित्तौड़गढ़ खंड का दोहरीकरण होने से क्षेत्र के उद्योग, खनन, कृषि और व्यापार को बड़ा लाभ मिलेगा। मालगाड़ियों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय उत्पादों को देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। साथ ही भविष्य में नई यात्री ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही वर्तमान में चित्तौड़गढ़ जंक्शन दक्षिण में रतलाम तक दोहरीकरण से जुड़ रहा है, उत्तर में अजमेर तक कार्य प्रगति पर है। अब पूर्व में कोटा तक जुड़ने से यहां विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
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भविष्य में बढ़ेंगी संभावनाएं
सांसद सी.पी. जोशी ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से चित्तौड़गढ़ क्षेत्र देश के प्रमुख रेल कॉरिडोर से और अधिक मजबूत तरीके से जुड़ जाएगा। इससे दिल्ली-मुंबई समेत देश के सभी प्रमुख मार्गों के लिए वैकल्पिक रेल कनेक्टिविटी विकसित होगी और यात्री तथा मालगाड़ियों का संचालन सुगम होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में क्षेत्र में रेलवे से जुड़े और भी महत्वपूर्ण विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ेंगे।
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चित्तौड़गढ़-नीमच रेलमार्ग का काम पूरा
केंद्र सरकार द्वारा रेलवे के आधुनिकीकरण और विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ राजस्थान सहित चित्तौड़गढ़ संसदीय क्षेत्र को मिल रहा है। चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में रेल अधोसंरचना के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। 560 करोड़ रुपये की लागत से 56 किमी चित्तौड़गढ़-नीमच रेलमार्ग का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है। 905 करोड़ रुपये की लागत से 133 किमी नीमच-रतलाम रेलमार्ग के दोहरीकरण का कार्य प्रगति पर है। 1634 करोड़ रुपये की लागत से 178.20 किमी अजमेर-चंदेरिया (चित्तौड़गढ़) रेलमार्ग के दोहरीकरण का कार्य प्रगति पर है। उमरड़ा से देबारी तक लगभग 25 किमी रेलखंड पर 492 करोड़ रुपये से दोहरीकरण कार्य जारी है। चित्तौड़गढ़-मावली-उदयपुर (लगभग 99 किमी) रेलमार्ग के दोहरीकरण के लिए अंतिम स्थान सर्वे का कार्य किया गया है।