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Dausa: रघुनाथजी व नृसिंह भगवान के बारादरी मैदान पहुंचते ही बंसत पंचमी मेले का आगाज, भक्ति में सराबोर दिखे लोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
Published by: दौसा ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jan 2026 03:44 PM IST
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सार
Dausa News: दौसा में बसंत पंचमी मेले का शुभारंभ चांदी के रथ में निकली रघुनाथ जी और नृसिंह भगवान की शोभायात्रा के साथ हुआ। ढूंढाड़ अंचल का यह सबसे बड़ा मेला एक माह तक चलेगा, जहां परंपरागत व आधुनिक वस्तुओं की खरीदारी होगी।
बसंत पंचमी मेले के लिए रवाना भगवान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दौसा जिला मुख्यालय पर गांधी चौक स्थित मंदिर से रघुनाथ जी एवं नृसिंह भगवान चांदी के रथ में विराजमान होकर शोभायात्रा के रूप में बारादरी मैदान पहुंचे। इसके साथ ही ढूंढाड़ अंचल के सबसे बड़े बसंत पंचमी मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बने चांदी के रथ में सवार ठाकुरजी की शोभायात्रा ने शहर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। शोभायात्रा से पूर्व मंदिर परिसर में मुख्य अतिथि एडीएम अरविंद शर्मा तथा नगर परिषद आयुक्त कमलेश कुमार मीणा ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर ठाकुरजी को चांदी के रथ में विराजमान किया। इसके बाद शोभायात्रा गांधी चौक से माणक चौक, हलवाई बाजार, संस्कृत कॉलेज होते हुए बारादरी मेला मैदान पहुंची।
जगह-जगह हुआ शोभायात्रा का स्वागत
शहर में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। मेला मैदान पहुंचने पर सीताराम जी मंदिर के पुजारी ने विधिवत पूजा-अर्चना कर रघुनाथ जी एवं नृसिंह भगवान को विराजमान कराया। रघुनाथ जी और नृसिंह जी माघ शुक्ल षष्ठी (24 जनवरी) को सायंकाल बारादरी से अपने निज मंदिर में वापस विराजमान होंगे। माघ शुक्ल सप्तमी को किला सागर मंदिर से सूर्य भगवान चांदी के रथ में सवार होकर मेला मैदान पहुंचेंगे और दिनभर वहीं विराजमान रहेंगे। सायंकाल पुनः अपने मंदिर लौटेंगे।
एक माह तक चलेगा मेला
नगर परिषद की ओर से मेले में दुकानों के लिए 23 लाख रुपये का टेंडर छोड़ा गया है। यह मेला एक माह तक चलेगा, जिसमें दूर-दराज से आए दुकानदार अपने-अपने सामान की बिक्री करेंगे। मेले में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं खरीदार पहुंच रहे हैं।
ये भी पढ़ें: रीको में 98 पदों पर भर्ती का शॉर्ट नोटिस जारी, यहां देखें; कल शुरू होगा पंजीकरण
परंपरा और आधुनिकता का संगम
इस मेले की विशेषता यह है कि यहां परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिलता है। ठेठ देहाती परिवेश में रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएं खरीदने के लिए गांवों से महिला-पुरुष बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, वहीं आधुनिक सामान भी उपलब्ध है। मेले में लकड़ी की दही बिलौनी, चाटू, शिशुओं को चलना सिखाने वाला रेडू, लकड़ी का चरखा, बेलन, चकला, पाटा और मूसल जैसे पारंपरिक उत्पादों की विशेष मांग रहती है।
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जगह-जगह हुआ शोभायात्रा का स्वागत
शहर में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। मेला मैदान पहुंचने पर सीताराम जी मंदिर के पुजारी ने विधिवत पूजा-अर्चना कर रघुनाथ जी एवं नृसिंह भगवान को विराजमान कराया। रघुनाथ जी और नृसिंह जी माघ शुक्ल षष्ठी (24 जनवरी) को सायंकाल बारादरी से अपने निज मंदिर में वापस विराजमान होंगे। माघ शुक्ल सप्तमी को किला सागर मंदिर से सूर्य भगवान चांदी के रथ में सवार होकर मेला मैदान पहुंचेंगे और दिनभर वहीं विराजमान रहेंगे। सायंकाल पुनः अपने मंदिर लौटेंगे।
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एक माह तक चलेगा मेला
नगर परिषद की ओर से मेले में दुकानों के लिए 23 लाख रुपये का टेंडर छोड़ा गया है। यह मेला एक माह तक चलेगा, जिसमें दूर-दराज से आए दुकानदार अपने-अपने सामान की बिक्री करेंगे। मेले में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं खरीदार पहुंच रहे हैं।
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परंपरा और आधुनिकता का संगम
इस मेले की विशेषता यह है कि यहां परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिलता है। ठेठ देहाती परिवेश में रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएं खरीदने के लिए गांवों से महिला-पुरुष बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, वहीं आधुनिक सामान भी उपलब्ध है। मेले में लकड़ी की दही बिलौनी, चाटू, शिशुओं को चलना सिखाने वाला रेडू, लकड़ी का चरखा, बेलन, चकला, पाटा और मूसल जैसे पारंपरिक उत्पादों की विशेष मांग रहती है।