Dausa: 'युवाओं की आवाज नहीं दबेगी', सचिन पायलट का केंद्र पर हमला, बोले- घमंड छोड़िए, शिक्षा व्यवस्था बचाइए
राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी और युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और छात्रों पर दर्ज मुकदमे तुरंत वापस लिए जाने चाहिए।
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राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने बुधवार को दौसा जिले के दौरे के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के भांडारेज मोड़ इंटरचेंज पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और लाखों-करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अहंकार और दमन की राजनीति कर रही है, जबकि युवाओं के मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।
'धरना-प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार'
सचिन पायलट ने कहा कि धरना-प्रदर्शन करना और भूख हड़ताल पर बैठना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले दोनों सदनों के विपक्षी नेताओं ने लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के निकट शांतिपूर्ण धरना दिया था। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करना था। पायलट ने कहा कि धरने में शामिल राहुल गांधी और अन्य सांसद कोई असामाजिक तत्व या आतंकवादी नहीं थे, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे।
'छात्रों पर दर्ज मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं'
पायलट ने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कोई अपराध नहीं किया था, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन पर कार्रवाई की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की आवाज दबाने के लिए दमनकारी नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ मारपीट की गई, कई बच्चों के हाथ-पैर टूट गए और सैकड़ों छात्र अस्पतालों में भर्ती हैं। उनका कहना था कि छात्रों पर दर्ज मुकदमे तत्काल वापस लिए जाने चाहिए।
'पेपर लीक से युवाओं का भरोसा टूटा'
कांग्रेस नेता ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं ने युवाओं का व्यवस्था से विश्वास खत्म कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। पायलट ने यह भी कहा कि विपक्षी नेताओं को पुलिस द्वारा घसीटना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और ऐसी स्थिति पहले कभी देखने को नहीं मिली।
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी उठाए सवाल
सचिन पायलट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इतने बड़े घटनाक्रम के बावजूद उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पूरे देश के हैं, केवल किसी एक राजनीतिक दल के नहीं। ऐसे में उन्हें युवाओं की चिंताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
'युवाओं का लोकतंत्र से भरोसा नहीं टूटना चाहिए'
पायलट ने कहा कि यदि युवाओं का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था से उठ गया तो यह देश के लिए गंभीर संकट होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक और सांप्रदायिक विषयों को आगे बढ़ा रही है, जबकि देश के सामने रोजगार, शिक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
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'हम नौजवानों के साथ हैं'
उन्होंने कहा कि इस पूरे मुद्दे में राजनीति नहीं है। कांग्रेस युवाओं के भविष्य को बर्बाद होते नहीं देख सकती। पायलट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य को लेकर तनाव में कई मासूम छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली, जो बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा दर्द किसी परिवार के लिए नहीं हो सकता।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले का भी किया जिक्र
सचिन पायलट ने राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इससे बड़ा पाप कोई नहीं हो सकता कि भगवान राम के मंदिर में ही चोरी हो जाए। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में किसी को प्रायश्चित करना है तो जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को खोया है, उन्हें वह राशि दी जानी चाहिए।
'विदेशी ताकतों की बात करना मूर्खतापूर्ण'
छात्र आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों के होने के आरोपों को खारिज करते हुए पायलट ने कहा कि इस तरह की बातें करना पूरी तरह मूर्खतापूर्ण है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से युवाओं में निराशा बढ़ी है और उनका व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हुआ है। देश की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा हैं और उनका भविष्य अंधकार में नहीं धकेला जा सकता।
पायलट ने कहा कि लगभग हर परिवार का कोई न कोई बच्चा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है और सभी जानते हैं कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से युवाओं को कितना नुकसान हो रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह अपना अहंकार छोड़कर शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए गंभीरता से काम करे।