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Rajasthan: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब इस मंत्री पर निशाना! हड़ताल पर बैठे छात्रों ने की बड़ी मांग
Sat, 25 Jul 2026 04:43 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 04:43 PM IST
सार
Rajasthan News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय में भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं ने इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की शुरुआत बताया है। उन्होंने कहा कि जब तक छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं किए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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विश्वविद्यालय के सामने प्रदर्शन करते छात्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय में भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने इसे सिर्फ शुरुआत बताया। उन्होंने छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं होने पर आंदोलन तेज करने और उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के इस्तीफे की मांग उठाने की चेतावनी दी।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत, सिस्टम में होगा बड़ा सुधार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय में भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं से अमर उजाला ने बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को केवल एक शुरुआत बताया। उनका कहना था कि यह शिक्षा व्यवस्था और सिस्टम में सुधार की दिशा में पहला कदम है तथा आने वाले समय में व्यवस्था को और बेहतर बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं हुए तो आंदोलन होगा तेज
छात्र नेता ने कहा कि जब तक राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं किए जाते, तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द इस मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो युवा आंदोलन को और तेज करते हुए उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के इस्तीफे की मांग भी करेगा।
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छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ विश्वविद्यालयों में छात्रों की आवाज उठाने का सबसे प्रभावी माध्यम है, इसलिए इसकी बहाली जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इस मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।
सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा और तेज
छात्रों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही छात्रसंघ चुनाव बहाल करने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के युवाओं को इस अभियान से जोड़ने की तैयारी की जा रही है, ताकि सरकार पर लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाया जा सके। उनका कहना था कि छात्रों की मांगें केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार से जुड़ी हुई हैं।
यह भी पढ़ें: 'चांदीपुरा वायरस' की दस्तक: दो मासूमों की मौत के बाद अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान-गुजरात सीमा पर खौफ
उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के इस्तीफे की भी दी चेतावनी
छात्र नेताओं का कहना है कि यदि सरकार लगातार छात्रों की मांगों की अनदेखी करती रही, तो युवा आने वाले समय में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के इस्तीफे की मांग भी उठाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलन को हल्के में लेने की बजाय छात्रों से संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों का समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा तथा जब तक छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं होते, तब तक भूख हड़ताल खत्म नहीं की जाएगी।
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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत, सिस्टम में होगा बड़ा सुधार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय में भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं से अमर उजाला ने बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को केवल एक शुरुआत बताया। उनका कहना था कि यह शिक्षा व्यवस्था और सिस्टम में सुधार की दिशा में पहला कदम है तथा आने वाले समय में व्यवस्था को और बेहतर बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं हुए तो आंदोलन होगा तेज
छात्र नेता ने कहा कि जब तक राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं किए जाते, तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द इस मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो युवा आंदोलन को और तेज करते हुए उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के इस्तीफे की मांग भी करेगा।
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छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ विश्वविद्यालयों में छात्रों की आवाज उठाने का सबसे प्रभावी माध्यम है, इसलिए इसकी बहाली जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इस मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।
सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा और तेज
छात्रों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही छात्रसंघ चुनाव बहाल करने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के युवाओं को इस अभियान से जोड़ने की तैयारी की जा रही है, ताकि सरकार पर लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाया जा सके। उनका कहना था कि छात्रों की मांगें केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार से जुड़ी हुई हैं।
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उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के इस्तीफे की भी दी चेतावनी
छात्र नेताओं का कहना है कि यदि सरकार लगातार छात्रों की मांगों की अनदेखी करती रही, तो युवा आने वाले समय में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के इस्तीफे की मांग भी उठाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलन को हल्के में लेने की बजाय छात्रों से संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों का समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा तथा जब तक छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं होते, तब तक भूख हड़ताल खत्म नहीं की जाएगी।