Rajasthan News:कागजों में भरपूर खाद, खेतों में इंतजार; बारिश के बीच किसान परेशान
बारिश के साथ खरीफ बुआई शुरू हो गई, लेकिन राजस्थान के कई किसान खाद नहीं मिलने से परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि उन्हें तय कीमत से अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।
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राजस्थान में अच्छी मानसूनी बारिश के बाद खरीफ की बुआई ने रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन इसी के साथ खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों की परेशानी भी बढ़ गई है। सरकार का दावा है कि प्रदेश में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जबकि किसान आरोप लगा रहे हैं कि गोदामों में खाद होने के बावजूद उन्हें समय पर नहीं मिल रही। कई जगह किसानों को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है और नैनो यूरिया खरीदने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है।
अलवर के बहरोड़ से जयपुर पहुंचे किसान राजेश दायमा ने बताया कि वे खाद की किल्लत की शिकायत लेकर कृषि विभाग पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने उनकी बात तक नहीं सुनी। उनका कहना है कि बुआई का समय निकल रहा है और किसान खाद के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट का आरोप है कि केंद्र सरकार भले ही खाद की कमी नहीं होने की बात कह रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। उनके मुताबिक 266 रुपये में मिलने वाला यूरिया थोक स्तर पर 400 रुपये तक और किसान तक पहुंचते-पहुंचते 500 रुपये तक बिक रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर किसानों को जरूरत न होने के बावजूद नैनो यूरिया खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
हालांकि कृषि विभाग इन दावों से इत्तेफाक नहीं रखता। कृषि आयुक्त नरेश गोयल का कहना है कि प्रदेश में खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और कहीं भी वास्तविक कमी नहीं है। यदि किसी जिले में वितरण या कालाबाजारी की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?
कृषि विभाग की 20 जुलाई 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से जुलाई के बीच राजस्थान को 4.18 लाख मीट्रिक टन यूरिया आवंटित हुआ, जबकि 4.88 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई। यानी करीब 70 हजार मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया मिला।
इसके विपरीत डीएपी की स्थिति कमजोर रही। 1.92 लाख मीट्रिक टन आवंटन के मुकाबले केवल 99 हजार मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई, जिससे करीब 93 हजार मीट्रिक टन की कमी दर्ज की गई। एनपीके उर्वरक की आपूर्ति भी आवंटन से कम रही।
स्टॉक पिछले साल से ज्यादा
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 20 जुलाई तक प्रदेश में 3.94 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध था, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2.42 लाख मीट्रिक टन था। यानी इस बार लगभग 1.53 लाख मीट्रिक टन अधिक यूरिया स्टॉक में है। डीएपी और एसएसपी का स्टॉक भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा है।
कृषि विभाग के आंकड़ों में प्रदेश में खाद का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन कई जिलों से किसानों के खाद नहीं मिलने और तय कीमत से ज्यादा रकम वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसान संगठनों का कहना है कि समस्या स्टॉक की नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था की है। उनका आरोप है कि कई जगह खाद समय पर बिक्री केंद्रों तक नहीं पहुंच रही, जबकि कुछ स्थानों पर जमाखोरी और कालाबाजारी की भी शिकायतें हैं।
उधर, कृषि विभाग का कहना है कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है। यदि कहीं वितरण में गड़बड़ी या अधिक कीमत वसूलने की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।