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Jaipur News: जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंधों की आरोपी बबीता न्यायिक हिरासत में, एटीएस को मिले अहम सुराग
Sat, 27 Jun 2026 05:54 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jun 2026 05:54 PM IST
सार
आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से संबंधों के आरोपों में गिरफ्तार बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा को जयपुर की अदालत ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। एटीएस का कहना है कि रिमांड के दौरान मिले इनपुट के आधार पर उसके कथित नेटवर्क और डिजिटल गतिविधियों की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
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कोर्ट में मुंह छिपाती नजर आई बबीता धाकड़
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जयपुर में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कथित जासूसी और आतंकी नेटवर्क मामले की आरोपी बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा को शनिवार को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद न्यायालय अपर सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-11, जयपुर महानगर द्वितीय में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए। कोर्ट परिसर में मीडिया के सवालों का सामना करते समय बबीता अपना चेहरा छिपाती नजर आई।
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बबीता धाकड़ को राजस्थान एटीएस ने जयपुर के वाटिका क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने उसे सात दिन की रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की। जांच एजेंसियों के अनुसार रिमांड के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर मामले की आगे जांच की जा रही है।
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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बबीता पिछले करीब दो वर्षों से कथित रूप से आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में थी। जांच एजेंसियां इस आशंका की भी पड़ताल कर रही हैं कि उसे आत्मघाती हमले के लिए तैयार किया जा रहा था हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
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सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान में बैठे कथित आतंकी हैंडलर्स बबीता को ऑनलाइन माध्यम से निर्देश और प्रशिक्षण दे रहे थे। जांच एजेंसियां उसके मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन गतिविधियों की फॉरेंसिक जांच भी कर रही हैं ताकि संपर्कों और नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाई जा सके।
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जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि बबीता ने इंटरनेट पर आत्मघाती हमलों और उनसे जुड़े विषयों के बारे में जानकारी खोजी थी। एजेंसियां इस डिजिटल गतिविधि को मामले का महत्वपूर्ण पहलू मानकर जांच कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे और क्या इसमें किसी स्थानीय नेटवर्क की भूमिका भी रही है। फिलहाल आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। एटीएस और अन्य जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच एजेंसियों के अनुसार बबीता का बिना किसी वैध दस्तावेज के 'डंकी रूट' के जरिए भारत से भागकर पाकिस्तान पहुंचने का कथित गुप्त प्लान भी सामने आया है। एटीएस अधिकारियों का कहना है कि उसके पास भारतीय पासपोर्ट नहीं था, इसलिए वह अवैध रास्ते से पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रही थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि पाकिस्तान में बैठे कथित आतंकी हैंडलर्स उसे ऑनलाइन ट्रेनिंग दे रहे थे। उसे सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय सेना के जवानों को हनीट्रैप में फंसाने और उनसे संपर्क स्थापित करने के तौर-तरीके सिखाए गए थे।
मामले में आरोपी की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट भगवान सहाय ने बताया कि बबीता के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 38 और 39 के तहत मामला दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामले को देखते हुए जांच को गोपनीय रखा गया है। एटीएस ने बबीता के सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की है। जांच एजेंसियां उसके संपर्कों और संभावित नेटवर्क के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।