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Rajasthan: 'अंतरराष्ट्रीय हालात बेहद नाजुक, सरकार तैयारी में रही पीछे', गहलोत ने विश्व शांति पर जताई चिंता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Thu, 26 Mar 2026 08:18 PM IST
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सार
Jaipur News: जयपुर एयरपोर्ट पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अंतरराष्ट्रीय हालात को नाजुक बताते हुए सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए। तेल-गैस संकट, युद्ध की स्थिति, कूटनीतिक भाषा और वैश्विक शांति को लेकर उन्होंने चिंता व्यक्त की और संतुलित संवाद की जरूरत बताई।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को बेहद नाजुक बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया जिस दिशा में बढ़ रही है, उसमें युद्ध और ऊर्जा संकट की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।
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गहलोत ने कहा कि तेल और गैस को लेकर जो हालात बन रहे हैं, उसके बारे में पहले ही राहुल गांधी ने चेतावनी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हमेशा देर से निर्णय लेती है, जबकि ऐसी परिस्थितियों में समय पर तैयारी जरूरी होती है। उनका कहना था कि यदि युद्ध के कारण हालात बिगड़े हैं, तो सरकार को जनता को विश्वास में लेना चाहिए और पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए गए बयान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि तैयारी उस स्तर की नहीं दिखी, जिसकी अपेक्षा थी, जिसके चलते सरकार आलोचना का सामना कर रही है।
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि उनका व्यवहार अस्थिर नजर आता है। उन्होंने कहा कि ट्रंप कभी प्रधानमंत्री मोदी को दोस्त बताते हैं तो कभी उनके राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी करते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से उचित नहीं है। गहलोत ने यह भी कहा कि किसी भी देश के राष्ट्रपति द्वारा दूसरे देश के शीर्ष नेतृत्व पर इस तरह की टिप्पणियां अभूतपूर्व हैं। उन्होंने वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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पाकिस्तान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि 1965, 1971 और कारगिल युद्धों में उसे हार का सामना करना पड़ा है, फिर भी वह मध्यस्थता की बात कर रहा है। उन्होंने विदेश मंत्री के ‘दलाली’ शब्द के इस्तेमाल को अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसी भाषा से बचना चाहिए और यदि यह जुबान फिसलने का मामला है तो खेद प्रकट करना चाहिए।
अंत में गहलोत ने इंदिरा गांधी के समय का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति अधिक मजबूत थी। उन्होंने वर्तमान हालात को चिंताजनक बताते हुए वैश्विक शांति के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।