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राजस्थान निकाय-पंचायत चुनाव: BJP-कांग्रेस की सीधी लड़ाई में तीसरे मोर्चे की दस्तक; क्या बदलेगा चुनावी गणित?

Thu, 06 Aug 2026 03:37 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Thu, 06 Aug 2026 03:37 PM IST
सार

राजस्थान के निकाय और पंचायत चुनाव इस बार बहुकोणीय होने जा रहे हैं। BJP-कांग्रेस के मुकाबले में AAP, AIMIM, BSP और RPI की सक्रियता से कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है।

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BJP-Congress Face Multi-Cornered Challenge in Rajasthan Civic and Panchayat Elections
पंचायत व निकाय चुनाव - फोटो : AI

विस्तार

राजस्थान में पंचायत राज और नगरीय निकाय चुनाव की औपचारिक तैयारियां शुरू होते ही सियासी बिसात भी बिछने लगी है। ओबीसी आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। सीएम भजनलाल शर्मा आज इस रिपोर्ट को लेकर दिल्ली गए हैं। 

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अब तक बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माने जाने वाले स्थानीय चुनाव इस बार बहुकोणीय होते दिखाई दे रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा), असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM), आम आदमी पार्टी (AAP) और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) [RPI-A] ने चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। ऐसे में मुकाबला केवल सीटों का नहीं, बल्कि दलित, मुस्लिम और शहरी वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति का भी होगा।

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भाजपा के साथ गठबंधन में उतरेगी RPI (अठावले)

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने जयपुर में कहा कि भाजपा के साथ सीटों के बंटवारे पर बातचीत अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी नगरीय निकाय चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन में लड़ेगी और सीटों की संख्या जल्द तय कर ली जाएगी।

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बसपा ने तेज की चुनावी तैयारियां

बसपा ने भी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी 23 अगस्त को जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में कार्यकर्ता सम्मेलन और संगठनात्मक समीक्षा बैठक आयोजित करेगी। बसपा के प्रदेश प्रभारी भगवान सिंह बाबा ने बताया कि राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि होंगे और प्रदेशभर से कार्यकर्ता इसमें शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि यह बैठक केवल कार्यकर्ता सम्मेलन नहीं बल्कि पंचायत और निकाय चुनाव की रणनीति तय करने का मंच भी होगी। पार्टी उन सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है जहां जीत की संभावना दिखाई देती है। साथ ही संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। बसपा का मानना है कि भाजपा और कांग्रेस, दोनों से नाराज मतदाताओं के बीच उसके लिए राजनीतिक अवसर मौजूद है।

पहली बार आधिकारिक तौर पर चुनाव लड़ेगी AIMIM

AIMIM ने भी पहली बार राजस्थान के पंचायत और निकाय चुनाव में आधिकारिक रूप से उतरने का फैसला किया है। पार्टी अपने चुनाव चिन्ह पर उम्मीदवार उतारेगी और अधिकृत प्रत्याशियों को भी मैदान में उतारेगी।

प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट आरिफ मोहम्मद ने बताया कि पार्टी जल्द ही प्रदेशव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करेगी। संगठन को गांव, वार्ड और जिला स्तर तक मजबूत करने की रणनीति तैयार की गई है और ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनकी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ हो।

यह फैसला पिछले महीने प्रदेश अध्यक्ष जमील खान और पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया, जिसमें राजस्थान के राजनीतिक हालात की समीक्षा कर चुनाव लड़ने पर सहमति बनी।

आम आदमी पार्टी भी पूरी ताकत से मैदान में

आम आदमी पार्टी ने भी राजस्थान के सभी नगरीय निकाय चुनाव पूरे दमखम के साथ लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी की प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कीर्ति पाठक ने कहा कि AAP पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार मुक्त नगर प्रशासन को मुख्य मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ेगी।

जयपुर जिला अध्यक्ष अमित दाधीच ने बताया कि संगठन को बूथ और वार्ड स्तर तक मजबूत किया जा रहा है। सड़क, सफाई, पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज और स्ट्रीट लाइट जैसे स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाया जाएगा।

छोटे दलों की एंट्री से बदलेगा चुनावी समीकरण

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मनीष गोधा का कहना है कि पंचायत और निकाय चुनाव भले स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हों, लेकिन ये प्रदेश की राजनीतिक दिशा का भी संकेत देते हैं। उनके मुताबिक अधिक दलों के मैदान में उतरने से मतदाताओं के पास विकल्प बढ़ेंगे, लेकिन मुकाबला पहले की तुलना में ज्यादा बिखरा हुआ भी हो सकता है।

उनका कहना है कि AIMIM के चुनाव लड़ने से मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो सकता है, जो अब तक बड़े पैमाने पर कांग्रेस के साथ जाते रहे हैं। वहीं बसपा और भाजपा की सहयोगी RPI (अठावले) के सक्रिय होने से दलित वोटों पर भी नई प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है, खासकर पूर्वी राजस्थान में। यदि दोनों दल आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ते हैं तो कई सीटों पर दलित मतों का विभाजन चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।

कांग्रेस बोली- हमारी तैयारी पहले से

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने नए दलों की एंट्री को ज्यादा महत्व देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पिछले लगभग एक वर्ष से चुनावी तैयारी में जुटी है और प्रदेश के करीब 11 हजार शहरी वार्ड तथा 14 हजार पंचायत इकाइयों में संगठन सक्रिय है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन-सी पार्टी चुनाव लड़ रही है। राजस्थान में पार्टी का संगठनात्मक आधार मजबूत है और मतदाता पूरी तरह जागरूक हैं।



बीएपी पहली बार वागड़ से आगे निकलेगी

वागड़ में मजबूत पकड़ रखने वाली भारत आदिवासी पार्टी भी इस बार चित्तौड़गढ़, झालवाड़, भीलवाड़ा, सिरोही, जालौर, पाली और बाड़मेर में भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। बीएपी के कंवीनर व डूंगरपुर-बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत का कहना है कि पिछले जिला परिषद चुनावों में डूंगरपुर में बीएपी के सदस्यों का बहुमत था लेकिन कांग्रेस के सदस्यों का बीजेपी को समर्थन दिए जाने के चलते चेयरमैन बीजेपी का बना। उन्होंने कहा कि इस बार पार्टी राजस्थान के अन्य हिस्सों में भी चुनाव लड़ने के विकल्प तलाश हरी है।


बीजेपी का दावा- जनता का भरोसा कायम

उधर बीजेपी ने भी विपक्ष और नए दलों के दावों को खारिज किया है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की जनता का डबल इंजन सरकार पर अटूट विश्वास है। उन्होंने कहा, "चाहे कितनी भी पार्टियां चुनाव मैदान में उतर जाएं, राजस्थान की जनता भाजपा के साथ खड़ी है। चुनाव में कौन लड़ रहा है और कितनी पार्टियां लड़ रही हैं, इससे भाजपा की चुनावी संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।"

 

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