NEET विवाद पर कांग्रेस का प्रदर्शन: जयपुर में पूर्व सीएम अशोक गहलोत, डोटासरा समेत कई नेता हिरासत में
NEET विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जयपुर में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
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NEET परीक्षा विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को राजस्थान सहित देशभर में विरोध-प्रदर्शन किया। जयपुर के अंबेडकर सर्किल पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन से पहले गहलोत ने केंद्र सरकार पर छात्रों के मुद्दे पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामले में सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया और शिक्षा मंत्री से इस्तीफा नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
अंबेडकर सर्किल पर प्रदर्शन, कई नेता हिरासत में
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन और धरना-प्रदर्शन किया गया। जयपुर के अंबेडकर सर्किल पर आयोजित प्रदर्शन में अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर प्रदर्शन समाप्त कराया।
'NEET पेपर लीक मामले में सरकार पूरी तरह विफल'
प्रदर्शन से पहले मीडिया से बातचीत में अशोक गहलोत ने कहा कि वे लंबे समय से कह रहे हैं कि देश किस दिशा में जा रहा है, यह किसी को नहीं मालूम। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से NEET परीक्षा विवाद को जिस गंभीरता से लिया जाना चाहिए था, सरकार उसमें पूरी तरह विफल रही। लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस मामले में सरकार का जो जवाब होना चाहिए था, वह देखने को नहीं मिला।
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'भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मिलने तक नहीं पहुंचा कोई'
गहलोत ने कहा कि छात्र कई दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे रहे, लेकिन सरकार का कोई प्रतिनिधि, चाहे अधिकारी हो या मंत्री, उनसे मिलने तक नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह जानने की भी कोशिश नहीं की कि छात्र आखिर चाहते क्या हैं और उनकी मांगें क्या हैं।
'राहुल गांधी और खड़गे लगातार मांग रहे हैं इस्तीफा'
गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से न कोई जवाब दिया गया और न ही कोई कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि सरकार की चुप्पी के कारण ऐसी स्थिति बन गई कि लोकसभा और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष को प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनके साथ प्रियंका गांधी और कई सांसद भी धरने में शामिल हुए। गहलोत ने इसे लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताते हुए कहा कि इससे देश और दुनिया में गलत संदेश जा रहा है।
'सरकार के लोकतंत्र वाले दावों की पोल खुल चुकी'
गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशों में भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बताते हैं, लेकिन देश के भीतर सरकार का रवैया अलग तस्वीर पेश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के व्यवहार और मौजूदा हालात ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
'सरकार आक्रोश का सही आकलन नहीं कर रही'
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों, युवाओं और आम जनता में सरकार के खिलाफ गहरा आक्रोश है। उनका कहना था कि सरकार जितना आकलन कर रही है, वास्तविक आक्रोश उससे कई गुना अधिक है। यदि सरकार का लोकतंत्र में थोड़ा भी विश्वास बचा है तो उसे इस जनभावना को समझना होगा।
'दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल'
गहलोत ने आरोप लगाया कि दिल्ली में हजारों छात्र-छात्राएं प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे, जहां पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। उन्होंने कहा कि लड़कियों, लड़कों और कम उम्र के छात्रों तक के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। यदि उस कार्रवाई के दृश्य देखे जाएं तो पुलिस की मंशा और उसे मिले निर्देशों पर सवाल खड़े होते हैं।
'बैरिकेड हटाने और सीसीटीवी हटाने पर भी उठाए सवाल'
गहलोत ने कहा कि आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा बैरिकेड हटाए जाने और सीसीटीवी कैमरे हटाने की बात भी सामने आई। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर आंदोलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाती है, लेकिन यहां बैरिकेड हटाए गए। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ऐसा जानबूझकर किया गया, ताकि बाद में लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को उचित ठहराया जा सके। उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम अब भी रहस्य बना हुआ है और इस पर चर्चा होनी चाहिए।
'देशभर से छात्र आंदोलन में पहुंचे'
गहलोत ने कहा कि पूरे देश में लोकतंत्र, बेरोजगारी, महंगाई और परीक्षा घोटालों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कई छात्र अपने माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध भी देश के अलग-अलग राज्यों से आंदोलन में शामिल होने पहुंचे। छात्रों और युवाओं का कहना है कि उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही और शिकायत करने के लिए भी कोई मंच नहीं बचा है।
'आंदोलन के दबाव में अब सरकार को करनी पड़ रही पहल'
गहलोत ने कहा कि अब जाकर सरकार के मंत्री आंदोलनकारियों से मिलने की कोशिश कर रहे हैं और राहुल गांधी से भी बातचीत के लिए मंत्री भेजे गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार को इस स्थिति तक पहुंचने की नौबत क्यों आने दी गई।