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राजस्थान: फर्जी FMG सर्टिफिकेट रैकेट में SOG की बड़ी कार्रवाई, विदेश से MBBS करने वाले तीन और डॉक्टर गिरफ्तार
Tue, 30 Jun 2026 10:44 AM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
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Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2026 10:44 AM IST
सार
राजस्थान एसओजी ने फर्जी एफएमजी स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट मामले में विदेश से एमबीबीएस करने वाले तीन और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने 23 से 25 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाए, राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराया और मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी पूरी की।
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आरोपी चिराग साहु, नवदीप तंबोलिया और आफरीदी खान
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान में फर्जी एफएमजी (Foreign Medical Graduate) स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट मामले में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले तीन और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि तीनों ने एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा में असफल होने के बाद लाखों रुपये खर्च कर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाए और उन्हीं के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में पंजीयन कराकर मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी पूरी कर ली। एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि मामले की जांच एसओजी थाना जयपुर में दर्ज प्रकरण संख्या 08/26 के तहत की जा रही है।
23 से 25 लाख रुपये में बनवाए गए फर्जी प्रमाणपत्र
एसओजी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में बांसवाड़ा निवासी नवदीप तंबोलिया, प्रतापगढ़ निवासी चिराग साहु और दौसा निवासी आफरीदी खान शामिल हैं। नवदीप ने किर्गिस्तान से, जबकि चिराग और आफरीदी ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी। जांच में पता चला कि तीनों एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा में कई बार असफल रहे। इसके बाद उन्होंने दलालों के माध्यम से 23.50 लाख से 25 लाख रुपये देकर फर्जी स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट तैयार कराए।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर की इंटर्नशिप
जांच के अनुसार, नवदीप तंबोलिया ने शुभम गुर्जर के जरिए 25 लाख रुपये में फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और राजकीय मेडिकल कॉलेज, दौसा में इंटर्नशिप की। वहीं, चिराग साहु ने विकास यादव के माध्यम से 23.50 लाख रुपये देकर नकली दस्तावेज तैयार कराए और पैसिफिक मेडिकल कॉलेज, उदयपुर में इंटर्नशिप पूरी की। आफरीदी खान ने भी शुभम गुर्जर के जरिए 25 लाख रुपये में फर्जी प्रमाणपत्र हासिल कर राजकीय मेडिकल कॉलेज, अलवर से इंटर्नशिप की।
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100 से अधिक संदिग्ध डॉक्टर जांच के दायरे में
एसओजी की जांच में अब तक 100 से अधिक संदिग्ध विदेशी मेडिकल स्नातकों की पहचान की जा चुकी है। एजेंसी पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। इस मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार, यूडीसी, एलडीसी समेत कुल 25 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुख्य आरोपियों पर करोड़ों के फर्जीवाड़े का आरोप
एसओजी के अनुसार, मुख्य आरोपी भानाराम माली, शुभम गुर्जर और इन्द्रराज गुर्जर पर प्रत्येक अभ्यर्थी से 20 से 30 लाख रुपये लेकर फर्जी एफएमजी स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट तैयार कराने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने का आरोप है। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 4 जुलाई 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। एसओजी अब इस पूरे रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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23 से 25 लाख रुपये में बनवाए गए फर्जी प्रमाणपत्र
एसओजी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में बांसवाड़ा निवासी नवदीप तंबोलिया, प्रतापगढ़ निवासी चिराग साहु और दौसा निवासी आफरीदी खान शामिल हैं। नवदीप ने किर्गिस्तान से, जबकि चिराग और आफरीदी ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी। जांच में पता चला कि तीनों एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा में कई बार असफल रहे। इसके बाद उन्होंने दलालों के माध्यम से 23.50 लाख से 25 लाख रुपये देकर फर्जी स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट तैयार कराए।
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फर्जी दस्तावेजों के आधार पर की इंटर्नशिप
जांच के अनुसार, नवदीप तंबोलिया ने शुभम गुर्जर के जरिए 25 लाख रुपये में फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और राजकीय मेडिकल कॉलेज, दौसा में इंटर्नशिप की। वहीं, चिराग साहु ने विकास यादव के माध्यम से 23.50 लाख रुपये देकर नकली दस्तावेज तैयार कराए और पैसिफिक मेडिकल कॉलेज, उदयपुर में इंटर्नशिप पूरी की। आफरीदी खान ने भी शुभम गुर्जर के जरिए 25 लाख रुपये में फर्जी प्रमाणपत्र हासिल कर राजकीय मेडिकल कॉलेज, अलवर से इंटर्नशिप की।
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100 से अधिक संदिग्ध डॉक्टर जांच के दायरे में
एसओजी की जांच में अब तक 100 से अधिक संदिग्ध विदेशी मेडिकल स्नातकों की पहचान की जा चुकी है। एजेंसी पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। इस मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार, यूडीसी, एलडीसी समेत कुल 25 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुख्य आरोपियों पर करोड़ों के फर्जीवाड़े का आरोप
एसओजी के अनुसार, मुख्य आरोपी भानाराम माली, शुभम गुर्जर और इन्द्रराज गुर्जर पर प्रत्येक अभ्यर्थी से 20 से 30 लाख रुपये लेकर फर्जी एफएमजी स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट तैयार कराने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने का आरोप है। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 4 जुलाई 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। एसओजी अब इस पूरे रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।