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राजस्थान: बयाना विधायक रितु बनावत को हाईकोर्ट से राहत, चुनाव याचिका खारिज; समन से बचने पर एक लाख का जुर्माना
Tue, 30 Jun 2026 12:40 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Tue, 30 Jun 2026 12:40 PM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने बयाना विधायक रितु बनावत के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि लगाए गए आरोप चुनाव रद्द करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि, समन से बचने की कोशिश पर अदालत ने विधायक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
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राजस्थान हाईकोर्ट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
राजस्थान हाईकोर्ट ने बयाना की निर्दलीय विधायक रितु बनावत के चुनाव को रद्द करने की मांग वाली चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि लगाए गए आरोप चुनावी जनादेश को अमान्य करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
कोर्ट ने लगाया एक लाख का जुर्माना
कोर्ट ने विधायक रितु बनावत पर कोर्ट के समन से जानबूझकर बचने की कोशिश करने के लिए एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह आदेश जस्टिस सुदेश बंसल ने 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनावों में बयाना विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार पुरुषोत्तम लाल की याचिका पर दिया। हाईकोर्ट ने कार्यवाही के दौरान विधायक रितु बनावत के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि उन्होंने कोर्ट के समन से बचने के लिए 'जानबूझकर और सोच-समझकर' कई तरीके अपनाए। कोर्ट ने गौर किया कि नोटिस तामील कराने की बार-बार की गई कोशिशें नाकाम रहीं, जिससे हाईकोर्ट को राजस्थान विधानसभा के सचिव के जरिए नोटिस तामील कराने का दूसरा तरीका अपनाना पड़ा।
नामांकन पत्र में गलत जानकारी देने के थे आरोप
इस व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने विधायक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया था कि रितु बनावत 2023 के विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते समय अपनी संपत्ति और देनदारियों के बारे में पूरी और सही जानकारी देने में नाकाम रही थीं।
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एक लाख वोटों से जीती थीं रितु
याचिकाकर्ता का तर्क था कि जिन जानकारियों को नहीं बताया गया, वे चुनाव कानून के तहत भ्रष्ट आचरण के दायरे में आती हैं और इसके आधार पर उनका चुनाव रद्द किया जाना चाहिए। याचिका के अनुसार, पुरुषोत्तम लाल को 689 वोट मिले जबकि रितु बनावत ने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल करके बयाना सीट जीती थीं।
ये भी पढ़ें- डकैत जगन गुर्जर की हत्या पर बवाल: 'जब तक CBI जांच नहीं, तब तक पोस्टमार्टम नहीं', धरने पर बैठा परिवार
विधायक की ओर से वकील ने दिए ये तर्क
बनावत की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट आरएन माथुर ने तर्क दिया कि कानून के तहत जरूरी सभी अहम जानकारियां सही ढंग से बताई गई थीं। उन्होंने कहा कि चुनाव खर्च के लिए खास तौर पर खोले गए बैंक खाते की जानकारी देना कानूनी रूप से जरूरी नहीं था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एक गृहिणी भी वैध तरीके से खेती से आय अर्जित कर सकती है; इसलिए, ये आरोप बेबुनियाद हैं। इन दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका खारिज कर दी और कहा कि जिन जानकारियों का खुलासा नहीं किया गया, वे न तो इतनी अहम थीं और न ही इतनी पर्याप्त थीं कि उनके आधार पर चुनाव को अमान्य ठहराया जा सके। अदालत ने कहा कि चुने गए उम्मीदवार की संपत्ति से जुड़ी छोटी-मोटी, तकनीकी और गैर-जरूरी कमियों के आधार पर मतदाताओं के जनादेश को पलटने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ेगा।
इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने बनावत के चुनाव को बरकरार रखा, साथ ही अदालत के समन से बचने की कोशिश करने के लिए उन्हें एक लाख रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया।
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कोर्ट ने लगाया एक लाख का जुर्माना
कोर्ट ने विधायक रितु बनावत पर कोर्ट के समन से जानबूझकर बचने की कोशिश करने के लिए एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह आदेश जस्टिस सुदेश बंसल ने 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनावों में बयाना विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार पुरुषोत्तम लाल की याचिका पर दिया। हाईकोर्ट ने कार्यवाही के दौरान विधायक रितु बनावत के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि उन्होंने कोर्ट के समन से बचने के लिए 'जानबूझकर और सोच-समझकर' कई तरीके अपनाए। कोर्ट ने गौर किया कि नोटिस तामील कराने की बार-बार की गई कोशिशें नाकाम रहीं, जिससे हाईकोर्ट को राजस्थान विधानसभा के सचिव के जरिए नोटिस तामील कराने का दूसरा तरीका अपनाना पड़ा।
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नामांकन पत्र में गलत जानकारी देने के थे आरोप
इस व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने विधायक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया था कि रितु बनावत 2023 के विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते समय अपनी संपत्ति और देनदारियों के बारे में पूरी और सही जानकारी देने में नाकाम रही थीं।
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एक लाख वोटों से जीती थीं रितु
याचिकाकर्ता का तर्क था कि जिन जानकारियों को नहीं बताया गया, वे चुनाव कानून के तहत भ्रष्ट आचरण के दायरे में आती हैं और इसके आधार पर उनका चुनाव रद्द किया जाना चाहिए। याचिका के अनुसार, पुरुषोत्तम लाल को 689 वोट मिले जबकि रितु बनावत ने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल करके बयाना सीट जीती थीं।
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विधायक की ओर से वकील ने दिए ये तर्क
बनावत की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट आरएन माथुर ने तर्क दिया कि कानून के तहत जरूरी सभी अहम जानकारियां सही ढंग से बताई गई थीं। उन्होंने कहा कि चुनाव खर्च के लिए खास तौर पर खोले गए बैंक खाते की जानकारी देना कानूनी रूप से जरूरी नहीं था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एक गृहिणी भी वैध तरीके से खेती से आय अर्जित कर सकती है; इसलिए, ये आरोप बेबुनियाद हैं। इन दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका खारिज कर दी और कहा कि जिन जानकारियों का खुलासा नहीं किया गया, वे न तो इतनी अहम थीं और न ही इतनी पर्याप्त थीं कि उनके आधार पर चुनाव को अमान्य ठहराया जा सके। अदालत ने कहा कि चुने गए उम्मीदवार की संपत्ति से जुड़ी छोटी-मोटी, तकनीकी और गैर-जरूरी कमियों के आधार पर मतदाताओं के जनादेश को पलटने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ेगा।
इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने बनावत के चुनाव को बरकरार रखा, साथ ही अदालत के समन से बचने की कोशिश करने के लिए उन्हें एक लाख रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया।