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Rajasthan: 'जगन गुर्जर जन्मजात अपराधी नहीं था', पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने बताए डकैत बनने के पीछे के कारण
Tue, 30 Jun 2026 11:30 AM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2026 11:30 AM IST
सार
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में जगन गुर्जर की मौत के बाद पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष दुर्गा सिंह ने कहा कि वह जन्मजात अपराधी नहीं था। उनके अनुसार आर्थिक तंगी, गलत संगत और हालात ने उसे डकैत बनाया। उन्होंने युवाओं से अपराध से दूर रहने और सरकार से बेहतर शिक्षा व रोजगार की व्यवस्था की मांग की।
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दुर्गा सिंह, पूर्व जिला प्रमुख धौलपुर
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की मौत के बाद उसके जीवन और अपराध की दुनिया में पहुंचने को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसी बीच धौलपुर के पूर्व जिला प्रमुख, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष और देवनारायण समिति के सदस्य दुर्गा सिंह ने जगन गुर्जर के जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जगन जन्म से अपराधी नहीं था, बल्कि परिस्थितियों, गलत संगत और लगातार बढ़ते आपराधिक मामलों ने उसे इस रास्ते पर धकेल दिया।
'सामान्य परिवार से था जगन'
दुर्गा सिंह ने बताया कि जगन गुर्जर धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र के भगवतीपुरा गांव का निवासी था। उसके पिता शिवचरण धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और स्थानीय मंदिर में पूजा-पाठ करते थे। परिवार की आजीविका पशुपालन और दूध बेचने पर निर्भर थी। उन्होंने कहा कि जगन का परिवार आर्थिक रूप से साधारण था और शुरुआती जीवन में उसका अपराध से कोई बड़ा संबंध नहीं था।
छोटे अपराधों से शुरू हुआ सफर
दुर्गा सिंह के अनुसार, शुरुआत में जगन और उसका साथी मोहन गुर्जर छोटे-मोटे अपराधों में शामिल थे। समय के साथ आपसी रंजिश, बदले की भावना और गलत संगत ने उसे अपराध की दुनिया में गहराई तक पहुंचा दिया। उन्होंने कहा कि डांग क्षेत्र के कई युवा कानून की जानकारी के अभाव, आर्थिक तंगी और भटकाव के कारण अपराध की राह पकड़ लेते हैं।
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'आत्मसमर्पण के बाद भी नहीं बदल सका जीवन'
दुर्गा सिंह ने बताया कि जगन ने कई बार आत्मसमर्पण किया और जेल से बाहर आने के बाद अपराध छोड़ने का वादा भी किया था। लेकिन शराब की लत, पुरानी संगत और अपराध से जुड़े माहौल के कारण वह दोबारा उसी रास्ते पर लौट गया। उनका का कहना है कि अपराध की दुनिया में एक बार प्रवेश करने के बाद उससे बाहर निकलना बेहद कठिन हो जाता है।
'कई मामलों में जरूरत से ज्यादा प्रचार मिला'
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि जगन गुर्जर का नाम राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक चर्चित हो गया था। हालांकि उनका दावा है कि कई घटनाओं में वास्तविकता से अधिक उसका नाम उछाला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में ऐसे लोगों का इस्तेमाल भी किया जाता है, जिससे उनकी छवि और अधिक भयावह बन जाती है।
ये भी पढ़ें- पैरामेडिकल परीक्षा में सामूहिक नकल: जिस कमरे में छपे प्रश्नपत्र, वहां नहीं मिले CCTV, केंद्र की मान्यता रद्द
युवाओं को दी अपराध से दूर रहने की सलाह
दुर्गा सिंह ने कहा कि डांग क्षेत्र के युवाओं में साहस और संघर्ष की क्षमता की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही अवसर और मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे युवाओं को सेना, पुलिस या अन्य सुरक्षा सेवाओं में पर्याप्त अवसर मिलें तो वे देश की बेहतर सेवा कर सकते हैं। उन्होंने कहा अगर जगन गुर्जर की ऊर्जा और साहस का सही दिशा में उपयोग होता तो वह डकैत नहीं, बल्कि सेना का एक बहादुर जवान बनकर देश का नाम रोशन करता। उन्होंने युवाओं से अपराध से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि हिंसा और अपराध का अंत हमेशा दुखद होता है। साथ ही सरकार से शिक्षा, रोजगार और बेहतर मार्गदर्शन की व्यवस्था मजबूत करने की भी मांग की।
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'सामान्य परिवार से था जगन'
दुर्गा सिंह ने बताया कि जगन गुर्जर धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र के भगवतीपुरा गांव का निवासी था। उसके पिता शिवचरण धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और स्थानीय मंदिर में पूजा-पाठ करते थे। परिवार की आजीविका पशुपालन और दूध बेचने पर निर्भर थी। उन्होंने कहा कि जगन का परिवार आर्थिक रूप से साधारण था और शुरुआती जीवन में उसका अपराध से कोई बड़ा संबंध नहीं था।
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छोटे अपराधों से शुरू हुआ सफर
दुर्गा सिंह के अनुसार, शुरुआत में जगन और उसका साथी मोहन गुर्जर छोटे-मोटे अपराधों में शामिल थे। समय के साथ आपसी रंजिश, बदले की भावना और गलत संगत ने उसे अपराध की दुनिया में गहराई तक पहुंचा दिया। उन्होंने कहा कि डांग क्षेत्र के कई युवा कानून की जानकारी के अभाव, आर्थिक तंगी और भटकाव के कारण अपराध की राह पकड़ लेते हैं।
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'आत्मसमर्पण के बाद भी नहीं बदल सका जीवन'
दुर्गा सिंह ने बताया कि जगन ने कई बार आत्मसमर्पण किया और जेल से बाहर आने के बाद अपराध छोड़ने का वादा भी किया था। लेकिन शराब की लत, पुरानी संगत और अपराध से जुड़े माहौल के कारण वह दोबारा उसी रास्ते पर लौट गया। उनका का कहना है कि अपराध की दुनिया में एक बार प्रवेश करने के बाद उससे बाहर निकलना बेहद कठिन हो जाता है।
'कई मामलों में जरूरत से ज्यादा प्रचार मिला'
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि जगन गुर्जर का नाम राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक चर्चित हो गया था। हालांकि उनका दावा है कि कई घटनाओं में वास्तविकता से अधिक उसका नाम उछाला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में ऐसे लोगों का इस्तेमाल भी किया जाता है, जिससे उनकी छवि और अधिक भयावह बन जाती है।
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युवाओं को दी अपराध से दूर रहने की सलाह
दुर्गा सिंह ने कहा कि डांग क्षेत्र के युवाओं में साहस और संघर्ष की क्षमता की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही अवसर और मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे युवाओं को सेना, पुलिस या अन्य सुरक्षा सेवाओं में पर्याप्त अवसर मिलें तो वे देश की बेहतर सेवा कर सकते हैं। उन्होंने कहा अगर जगन गुर्जर की ऊर्जा और साहस का सही दिशा में उपयोग होता तो वह डकैत नहीं, बल्कि सेना का एक बहादुर जवान बनकर देश का नाम रोशन करता। उन्होंने युवाओं से अपराध से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि हिंसा और अपराध का अंत हमेशा दुखद होता है। साथ ही सरकार से शिक्षा, रोजगार और बेहतर मार्गदर्शन की व्यवस्था मजबूत करने की भी मांग की।