Rajasthan: गुर्जर समाज ने ओबीसी आयोग की जातिगत रिपोर्ट पर जताया आक्रोश, दोबारा समीक्षा की मांग
जयपुर में गुर्जर समाज ने ओबीसी आयोग की जातिगत रिपोर्ट में आबादी कम दर्शाने पर नाराजगी जताई। समाज ने रिपोर्ट की दोबारा समीक्षा, मां पन्नाधाय की जाति संबंधी तथ्य स्पष्ट करने और निकाय-पंचायत चुनावों में एमबीसी आरक्षण व राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग की।
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ओबीसी आयोग की जातिगत रिपोर्ट में गुर्जर समाज की आबादी को वास्तविक आंकड़ों की तुलना में कम दर्शाए जाने को लेकर समाज में आक्रोश है। गुर्जर समाज से जुड़े संगठनों ने राज्य सरकार से रिपोर्ट की दोबारा समीक्षा कराने और वास्तविक एवं तथ्यात्मक आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने की मांग की है।
राष्ट्रीय संगठन महासचिव बच्चू सिंह बैंसला ने कहा कि ओबीसी आयोग की जातिगत रिपोर्ट में गुर्जर समाज की आबादी वास्तविक स्थिति की तुलना में काफी कम दर्शाई गई है। इससे समाज के लोगों में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में उपलब्ध तथ्यों और आंकड़ों की दोबारा जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने रखनी चाहिए।
बैंसला ने कहा कि जातिगत आंकड़ों का समाज की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति से सीधा संबंध होता है। ऐसे में किसी समाज की आबादी कम या गलत दर्शाए जाने से उसके अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से आयोग की रिपोर्ट की निष्पक्ष समीक्षा कराने और वास्तविक आंकड़े स्पष्ट करने की मांग की।
गुर्जर समाज से जुड़े संगठनों ने मां पन्नाधाय जी की जाति को लेकर किए गए बदलाव पर भी असंतोष जताया। पदाधिकारियों का कहना है कि ऐतिहासिक और सामाजिक विषयों से जुड़े मामलों में तथ्यों एवं प्रमाणों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
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इसके साथ ही संगठन ने आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों में एमबीसी वर्ग को आरक्षण देने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
गुर्जर समाज की ओर से आगामी निकाय और पंचायत चुनावों में समाज की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व को भी सुनिश्चित करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि जनसंख्या और सामाजिक स्थिति के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है।
पदाधिकारियों ने कहा कि यदि गुर्जर समाज की जातिगत संख्या, आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले समय में समाज की ओर से व्यापक स्तर पर आवाज उठाई जाएगी। संगठन ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर राज्य सरकार के समक्ष मांग रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन की रणनीति भी तय की जा सकती है।