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Jaipur: ‘जनता की आवाज उठाना अपराध है तो मैं अपराधी हूं’, गिरल आंदोलन के बाद भाटी का सरकार पर हमला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Thu, 11 Jun 2026 12:23 PM IST
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सार

गिरल आंदोलन की सफलता के बाद शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि जनता की आवाज उठाना अपराध है तो वह स्वयं को अपराधी मानने के लिए तैयार हैं।

If Raising People's Voice Is a Crime, Then I Am a Criminal: Ravindra Singh Bhati
रवींद्र सिंह भाटी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गिरल क्षेत्र में चल रहे आंदोलन के सफल होने के बाद शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने राज्य सरकार और प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ द्वारा उनके पेट्रोल लेकर आत्मदाह की चेतावनी देने वाले कदम को आपराधिक करार दिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए भाटी ने कहा कि यदि देवतुल्य जनता की आवाज उठाना अपराध है तो वह स्वयं को अपराधी मानने के लिए तैयार हैं।

30 दिन तक धरने पर बैठने का किया जिक्र

रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि गिरल में वह लगातार 30 दिनों तक खुले आसमान के नीचे सुबह, दोपहर, शाम और रात धरने पर बैठे रहे, लेकिन सरकार और प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बने रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर मजदूर ऐसी कौन-सी अनुचित मांग कर रहे थे, जिसे सुनने तक का समय सरकार के पास नहीं था। उन्होंने कहा कि जिन मजदूरों की मेहनत से उद्योग और व्यवस्था चलती है, उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ना जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है और वह इस जिम्मेदारी से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

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'जनता ने संघर्ष के लिए चुना है'

विधायक ने कहा कि प्रदेश की जनता ने उन्हें कम उम्र में विधानसभा तक केवल सुविधाओं का लाभ लेने के लिए नहीं भेजा है, बल्कि जनता की उम्मीदों और समस्याओं को उठाने के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े हर मुद्दे पर वह मजबूती से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

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'गायों की मौत से लेकर बिजली समस्या तक उठाएंगे मुद्दे'

भाटी ने कहा कि चाहे जैसलमेर में गायों की मौत का मामला हो, बिजली के गिरे हुए खंभों की समस्या हो या फिर आम लोगों को बिजली आपूर्ति में आने वाली परेशानियां, वह हर मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता और जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि वे लोगों की आवाज सरकार तक पहुंचाएं।

बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

रविंद्र सिंह भाटी ने बिजली विभाग पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि कोई उपभोक्ता बिजली बिल जमा करने में थोड़ी भी देरी करता है तो उस पर तुरंत पेनल्टी लगा दी जाती है, लेकिन कई दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने पर विभाग की कोई जवाबदेही तय नहीं होती। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे वातानुकूलित कार्यालयों से बाहर निकलकर भीषण गर्मी में रहने वाले आम लोगों की परेशानियों को समझें और उनका समाधान करें।

खेजड़ी और अरावली संरक्षण को लेकर भी बोले

खेजड़ी बचाओ और अरावली संरक्षण अभियान का जिक्र करते हुए भाटी ने कहा कि सरकार बड़े स्तर पर पौधारोपण के दावे करती है, लेकिन जमीन पर उसकी वास्तविकता दिखाई नहीं देती। उन्होंने सवाल किया कि यदि एक पेड़ काटने पर 20 पेड़ लगाने का नियम है तो वे पेड़ आखिर कहां लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान जैसे जल संकट वाले प्रदेश में पेड़ों की कटाई पर्यावरण के साथ बड़ा अन्याय है।

विधानसभा में पेश किया था विधेयक

भाटी ने बताया कि उन्होंने खेजड़ी संरक्षण के लिए विधानसभा में एक विधेयक भी प्रस्तुत किया था, लेकिन सरकार ने केवल औपचारिक निर्देश जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी और जनता के अधिकारों के लिए वह हर स्तर पर आवाज उठाते रहेंगे।

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