Rajasthan Cylinder Crisis: कालाबाजारी से कार्यक्रमों का खर्च बढ़ा, कैटरर्स बोले- अब ऑर्डर कैंसिल करने की नौबत
राजस्थान में एलपीजी गैस की किल्लत अब कालाबाजारी में बदल गई है। जयपुर में कैटरर्स का कहना है कि हालात भयावह हो चुके हैं। हालात यह है कि 1900 रुपए का सिलेंडर्स 3 हजार रुपए में भी नहीं मिल रहा। बाजार से इलेक्ट्रिक भट्टी भी गायब हो चुकी है।
विस्तार
राजस्थान में एलपीजी संकट अब विकराल रूप ले चुका है। टेंट डीलर्स से लेकर कैटरर्स तक के सामने अब ऑर्डर कैंसिलेशन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। जयपुर कैटरर्स एसो. के पूर्व अध्यक्ष ओम सोढानी का कहना है कि इस वक्त उनके पास एक ही काम के लिए फोन आ रहे हैं, हर कोई अपनी घर की शादी-सामारोह और फंक्शन का हवाला देकर सिलेंडर के लिए गिड़गिड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि 19 मार्च को एक विश्वविद्यालय में बड़ा कार्यक्रम का ऑर्डर उनके पास था, जिसमें राज्यपाल मुख्य अतिथि होंगे लेकिन सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने की वजह से उन्होंने विश्वविद्यालय मैनेजमेंट को ई-मेल डालकर मौजूदा हालातों के बारे में सूचित किया है। सोढानी का कहना है कि अब तक जैसे-तैसे काम चल गया लेकिन अब ऑर्डर कैंसिल होने शुरू हो गए हैं।
13 से 15 मार्च के बड़े सावे
जयपुर में 13 से 15 मार्च के बड़े सावे हैं। हजारों शादियां इस दौरान जयपुर में होनी हैं। इसके अलावा मैरिज एनिवर्सरी, बर्थ डे पार्टीज जैसे छोटे-बड़े सैकड़ों कार्यक्रम होने हैं। अप्रैल में भी कम से कम 40 हजार शादियों के ऑर्डर वेंडर्स के पास हैं।
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बाजार से गायब इलेक्ट्रिक भट्टियां
कारोबारियों का कहना है कि एलपीजी संकट का बाजार पर इतना बड़ा असर है कि इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि बाजार में इलेक्ट्रिक भट्टियां भी पूरी तरह गायब हो चुकी हैं। कारोबारियों का कहना है कि जो ऑर्डर एडवांस में ले लिए उन्हें कैसा पूरा करें अब यह समझ नहीं आ रहा है।
15 से 30 हजार रुपए की लागत बढ़ी
राजस्थान टेंट डीलर्स एसोसिएशन के रवि जिंदल का कहना है कि एलपीजी संकट का मौजूदा कार्यक्रमों के खाने के खर्च पर बड़ा असर आया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ सिलेंडरों की कालाबाजारी के चलते एक सामान्य से कार्यक्रम की लागत 15 से 30 हजार रुपए बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि पैसा देने के बावजूद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं।
एजेंसी संचालकों ने फोन उठाने बंद किए
कारोबारियों का कहना है कि हम अपने संकट के बारे में किसके सामने जाकर रोएं यह समझ नहीं आ रहा। कस्टमर से सिलेंडर की बात करते हैं तो वह अपना पल्ला झाड़ रहा है कि यह उनका काम नहीं है। सोढानी ने कहा कि जब सिलेंडर ही नहीं है तो क्या करें कैसे करें समझ ही नहीं आ रहा है
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