जयपुर ऑक्सीजन प्लांट विस्फोट: एनजीटी ने दिए सख्त सुरक्षा निर्देश, जांच पूरी होने तक प्लांट बंद रहेगा
जयपुर ऑक्सीजन प्लांट विस्फोट मामले में एनजीटी ने सख्त सुरक्षा मानकों के पालन के निर्देश दिए। जांच पूरी होने तक प्लांट बंद रहेगा, सभी नियामकीय मंजूरियों के बाद ही संचालन शुरू होगा।
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जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (वीकेआई) स्थित विल्सन क्रायो गैसेज़ में 31 जनवरी 2026 को ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिलिंग के दौरान हुए विस्फोट मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त सुरक्षा मानकों के पालन के निर्देश दिए हैं। एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर दर्ज याचिका का निस्तारण करते हुए कहा है कि तकनीकी जांच पूरी होने और सभी नियामकीय मंजूरियां मिलने तक संयंत्र का संचालन शुरू नहीं किया जाएगा।
एनजीटी की पीठ ने संयुक्त समिति की रिपोर्ट और संबंधित विभागों के जवाबों पर विचार करते हुए माना कि इस हादसे में तीन लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार यह मुख्य रूप से औद्योगिक एवं प्रक्रिया सुरक्षा (प्रोसेस सेफ्टी) से जुड़ी दुर्घटना थी, जिसका नियामकीय अधिकार क्षेत्र पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) तथा फैक्ट्री एवं बॉयलर्स विभाग के पास है। पर्यावरणीय प्रभाव केवल मलबे और क्षतिग्रस्त सिलेंडरों के सुरक्षित निस्तारण तक सीमित पाया गया।
एनजीटी ने बताया कि हादसे के बाद पीईएसओ ने इकाई का लाइसेंस निलंबित कर दिया है और जांच पूरी होने तक प्लांट बंद रहेगा। अधिकरण ने पीईएसओ और फैक्ट्री एवं बॉयलर्स विभाग को दुर्घटना के मूल कारण, संभावित वैधानिक उल्लंघनों, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के उपायों पर जल्द अंतिम रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
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सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश
एनजीटी ने परियोजना संचालक को गैस सिलेंडर नियम-2016, फैक्ट्री अधिनियम-1948/व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता-2020 सहित सभी लागू सुरक्षा प्रावधानों का सख्ती से पालन करने को कहा है। इसके साथ ही गैसों के भंडारण, रिफिलिंग और परिवहन के लिए विस्तृत एसओपी लागू करने, प्रेशर वेसल, पाइपलाइन और वाल्व का नियमित निरीक्षण, केवल प्रशिक्षित कर्मचारियों से सिलेंडर भराई, नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल, रिसाव पहचान प्रणाली, अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन शटडाउन सिस्टम तथा पीपीई की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी मंजूरियों के बाद ही शुरू होगा संचालन
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि प्लांट तब तक दोबारा शुरू नहीं होगा, जब तक उसे पीईएसओ, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और फैक्ट्री एवं बॉयलर्स विभाग से सभी आवश्यक मंजूरियां और लाइसेंस नहीं मिल जाते तथा उनकी शर्तों का पूर्ण पालन नहीं हो जाता।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को भी निर्देश दिया गया है कि वह भविष्य के निरीक्षणों में पर्यावरणीय शर्तों के अनुपालन की निगरानी करे और आवश्यकता पड़ने पर संचालन की स्वीकृति (Consent to Operate) में संशोधन कर स्वीकृत भंडारण एवं रिफिलिंग क्षमता को पीईएसओ की मंजूर क्षमता के अनुरूप बनाए।
एनजीटी ने यह भी उल्लेख किया कि मृतकों के परिजनों को समझौते के आधार पर मुआवजा दिया जा चुका है। यदि कोई पीड़ित या उसका परिवार अधिक मुआवजे की मांग करना चाहता है तो वह सक्षम न्यायिक मंच का रुख कर सकता है। इन निर्देशों के साथ एनजीटी ने मामले का निस्तारण कर दिया।