Rajasthan: नदियों में प्रदूषण पर SC की सख्त टिप्पणी, कहा- अधिकारियों की ढिलाई से सार्वजनिक ढांचा क्षतिग्रस्त
Supreme Court: राजस्थान की जोजरी, बांदी और लूणी नदियों में प्रदूषण मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की ढिलाई पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि इससे सार्वजनिक ढांचे को नुकसान हुआ है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।
विस्तार
राजस्थान की जोजरी, बांदी और लूणी नदियों में प्रदूषण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि अधिकारियों की ढिलाई और समय पर कार्रवाई नहीं करने के कारण बड़े पैमाने पर सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। अदालत ने यह टिप्पणी मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान की। यह सुनवाई जोजरी नदी में प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले के तहत हो रही थी। इससे पहले अदालत ने राज्य की बांदी और लूणी नदियों में भी प्रदूषण की समस्या को लेकर चिंता जताई थी।
उच्चस्तरीय निगरानी समिति का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष नवंबर में इस मामले को गंभीर मानते हुए एक उच्चस्तरीय इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी का गठन किया था। इस समिति को नदी तंत्र में मौजूद मूल समस्याओं की पहचान करने, प्रदूषण को रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों की निगरानी करने और पहले से हुए नुकसान को ठीक करने के लिए दीर्घकालिक सुझाव देने का दायित्व दिया गया था। समिति ने हाल ही में अपनी अंतरिम रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की है।
राज्य सरकार से व्यवस्थाओं को लेकर सवाल
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि समिति की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। अदालत ने राजस्थान सरकार की ओर से पेश वकील से कहा कि समिति को आवश्यक सुविधाएं और सहयोग देने के मामले में राज्य की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों के ढिलाईपूर्ण रवैये के कारण बड़े स्तर पर सार्वजनिक ढांचा नष्ट और क्षतिग्रस्त हुआ है। अदालत ने यह भी कहा कि कई फैक्टरियां बिना अनुमति के संचालित हो रही हैं।
राज्य सरकार ने दिए सहयोग के आश्वासन
राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि समिति द्वारा जिन व्यवस्थागत कमियों और लॉजिस्टिक सहायता की जरूरत बताई गई है, उन्हें अगली सुनवाई तक दूर करने का प्रयास किया जाएगा। पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि समिति ने अपनी रिपोर्ट में विभिन्न हिस्सों में किए गए कार्यों, सुझाए गए कदमों और कार्य के दौरान सामने आई व्यवस्थागत समस्याओं का उल्लेख किया है।
17 मार्च को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की है। इससे पहले नवंबर में पारित अपने आदेश में अदालत ने कहा था कि जोजरी, बांदी और लूणी नदियों में प्रदूषण का मामला नियामक तंत्र की लंबे समय से चली आ रही कमजोरी और प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
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दो दशकों से जारी समस्या पर चिंता
अदालत ने यह भी कहा था कि इस मामले के परिणाम गंभीर और दूरगामी हो सकते हैं। लगभग दो दशकों से चली आ रही लापरवाही के कारण पश्चिमी राजस्थान की इन तीन महत्वपूर्ण नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ-साथ करीब 20 लाख लोगों और पशुओं के जीवन पर भी खतरा पैदा हो गया है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया था कि जोजरी नदी जोधपुर से होकर गुजरती है, बांदी नदी पाली से बहती है और लूणी नदी बालोतरा क्षेत्र से होकर गुजरती है। बांदी और जोजरी नदियां बालोतरा के पास जाकर लूणी नदी में मिल जाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने समिति को निर्देश दिया है कि वह वैज्ञानिक आधार पर एक समयबद्ध योजना तैयार करे, जिससे नदी तंत्र के पुनर्स्थापन और पुनर्जीवन के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।
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