Rajasthan Politics: राजस्थान कांग्रेस में फिर दिखी गुटबाजी, तीन कार्यक्रमों में एक साथ नहीं दिखे गहलोत-पायलट
Rajasthan: राजस्थान कांग्रेस के तीन प्रमुख कार्यक्रमों में अशोक गहलोत और सचिन पायलट साथ नजर नहीं आए। पायलट के कार्यक्रम के पोस्टर से गहलोत और डोटासरा की तस्वीरें भी गायब रहीं। इससे पार्टी में गुटबाजी और नेतृत्व के बीच समन्वय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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राजस्थान कांग्रेस के हालिया तीन प्रमुख कार्यक्रमों ने एक बार फिर पार्टी के भीतर समन्वय और नेतृत्व की एकजुटता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट लगातार अलग-अलग मंचों पर नजर आए, जिससे दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरियों की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता में वापसी की संभावनाओं के बीच संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व की एकजुटता की जरूरत है। इसके बावजूद पार्टी के दो बड़े जनाधार वाले नेताओं का एक मंच पर नजर नहीं आना कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
21 जुलाई के कार्यक्रम में सचिन पायलट नदारद
21 जुलाई को जयपुर के अंबेडकर सर्किल पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन किया। इस कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान अशोक गहलोत ने गिरफ्तारी भी दी, जिसकी तस्वीरें चर्चा में रहीं। हालांकि, इस कार्यक्रम में सचिन पायलट शामिल नहीं हुए।
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22 जुलाई के कार्यक्रम में पोस्टर से गहलोत गायब
22 जुलाई को जयपुर के अंबेडकर हॉस्टल में सचिन पायलट के नेतृत्व में "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के पोस्टर में कांग्रेस आलाकमान और सचिन पायलट को प्रमुखता दी गई, जबकि अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की तस्वीरें नहीं थीं। कार्यक्रम में भी अशोक गहलोत सहित कांग्रेस के अधिकांश वरिष्ठ नेता नजर नहीं आए। इसी दिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा मुख्यालय के घेराव का कार्यक्रम भी आयोजित किया। इस प्रदर्शन में अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए, लेकिन सचिन पायलट इसमें भी मौजूद नहीं रहे।
लगातार तीन प्रमुख कार्यक्रमों में अशोक गहलोत और सचिन पायलट का अलग-अलग नजर आना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, पार्टी की ओर से इसे सामान्य कार्यक्रमों का संयोग माना जा सकता है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस के भीतर जारी गुटीय खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब कांग्रेस राजस्थान में सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है, शीर्ष नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
पहले भी नहीं मिली थी पोस्टर में जगह
गहलोत और पायलट के बीच की दूरियां कम होते नहीं दिखी। इसका एक और उदाहरण बीते 10 जून को देखने को मिला था। करौली में सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट की मूर्ति का अनावरण हो रहा था। यहां किसान सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन के पोस्टर में कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं के चेहरे थे पर अशोक गहलोत का चेहरा गायब था।
पोस्टर में और कौन-कौन शामिल था?
सम्मेलन के प्रचार-प्रसार के लिए जारी पोस्टर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और के.सी. वेणुगोपाल की तस्वीरें प्रमुखता से लगाई गई थीं। इसके अलावा राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को भी पोस्टर में स्थान दिया गया था।