राजस्थान हाईकोर्ट का सरकार को आदेश: OBC आयोग की रिपोर्ट आए या नहीं, 15 अगस्त तक पूरी करें आरक्षण की लॉटरी
राजस्थान में पंचायत ओर निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर दायर अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि- ओबीसी रिपोर्ट न आने पर भी आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर चुनाव कराएं।
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राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में देरी को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं पर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी राजनीतिक आरक्षण आयोग को स्पष्ट समय-सीमा तय करते हुए सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि अब चुनाव कराने में किसी भी तरह की और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि आगे भी विलंब हुआ तो जवाबदेही तय की जाएगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने 20 जुलाई को सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त और ओबीसी आयोग (राजनीतिक आरक्षण) के सचिव को वर्चुअली उपस्थित किया। सरकार ने अदालत को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 19 जुलाई को हुई बैठक का निर्णय और प्रस्तावित चुनावी कार्यक्रम सौंपा।
OBC आयोग को 5 अगस्त की अंतिम मोहलत
हाईकोर्ट ने कहा कि राजनीतिक आरक्षण पर ओबीसी आयोग की रिपोर्ट देने में पहले ही पर्याप्त देरी हो चुकी है। इसलिए आयोग हर हाल में 5 अगस्त 2026 तक अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस समय-सीमा में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
निर्वाचन आयोग से कहा- 15 अगस्त तक घोषित करें चुनाव
खंडपीठ ने कहा कि आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक सप्ताह या अधिकतम आठ दिन पर्याप्त हैं। इसलिए राज्य निर्वाचन आयोग को 15 अगस्त 2026 तक चुनाव कार्यक्रम घोषित कर देना चाहिए। अदालत ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिया कि आरक्षण की पूरी प्रक्रिया इसी अवधि में पूरी करने का प्रयास किया जाए।
रिपोर्ट न आए तब भी चुनाव नहीं टलेंगे
हाईकोर्ट ने सबसे अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी कारणवश 5 अगस्त तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आती है, तब भी आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जाए ताकि चुनाव में और देरी न हो। अदालत ने साफ किया कि चुनाव टालने का आधार अब रिपोर्ट का इंतजार नहीं हो सकता।
15 नवंबर तक पूरी हो चुनाव प्रक्रिया
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि ओबीसी आयोग 5 अगस्त तक रिपोर्ट देगा, 15 अगस्त तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी होगी और इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराएगा। अदालत ने निर्देश दिया कि पूरी चुनाव प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक हर हाल में समाप्त कर दी जाए। साथ ही कहा कि यदि भविष्य में फिर देरी हुई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
अवमानना याचिका का निस्तारण
इन निर्देशों और सरकार की समयबद्ध कार्ययोजना को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने अवमानना याचिकाओं का निस्तारण कर दिया तथा सभी लंबित आवेदन भी समाप्त कर दिए।