Rajasthan Cyber Crime: आपके अपनों की आवाज में आ सकता है ठगी का कॉल, AI-डीपफेक से सावधान!
अगर अचानक किसी अपने की आवाज में मदद मांगने वाला कॉल आए, तो सावधान हो जाएं-यह ठगी भी हो सकती है। राजस्थान में AI और डीपफेक तकनीक के जरिए साइबर अपराधी भरोसे का फायदा उठाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
विस्तार
राजस्थान में साइबर अपराध तेजी से बढ़ते खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं, जहां अब ठग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। परिचितों की आवाज और वीडियो की नकल कर भावनात्मक दबाव में पैसे ट्रांसफर करवाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसे लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।
उपमहानिरीक्षक पुलिस शांतनु कुमार सिंह के अनुसार, AI आधारित डीपफेक तकनीक से तैयार ऑडियो-वीडियो इतने वास्तविक लगते हैं कि आम व्यक्ति के लिए असली-नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। इसी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी ठगी और ब्लैकमेलिंग जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो साइबर फ्रॉड के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वर्ष 2025 में प्रदेश में 1.27 लाख से अधिक शिकायतें सामने आईं, जबकि 2024 में यह संख्या करीब 1 लाख थी। यानी एक साल में लगभग 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह ट्रेंड बताता है कि डिजिटल ठगी अब संगठित और तकनीक आधारित रूप ले चुकी है।
हालांकि, बढ़ती शिकायतों के बावजूद कार्रवाई की गति सवालों के घेरे में है। विधानसभा में उठे मुद्दे के अनुसार, कुल मामलों में एक प्रतिशत से भी कम में एफआईआर दर्ज हो रही है, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में मुश्किलें आ रही हैं।
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साइबर ठगी के पैटर्न में भी बदलाव देखा जा रहा है। ठग “तुरंत पैसे भेजो” जैसे संदेश देकर डर और जल्दबाजी का माहौल बनाते हैं, ओटीपी या बैंक डिटेल्स मांगते हैं और पीड़ित को किसी से पुष्टि करने से रोकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और तकनीकी हेरफेर का खतरनाक मिश्रण है।
राजस्थान पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो या मैसेज पर तुरंत विश्वास न करें। यदि कोई परिचित पैसे मांगता है, तो उसके पुराने नंबर पर कॉल कर पुष्टि जरूर करें। साथ ही, ओटीपी, पासवर्ड और बैंक संबंधी जानकारी साझा करने से बचें।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते साइबर अपराधों को रोकने के लिए जागरूकता, तकनीकी सशक्तिकरण और त्वरित कानूनी कार्रवाई तीनों ही जरूरी हैं। फिलहाल, आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि अगर सतर्कता नहीं बरती गई, तो AI और डीपफेक आधारित ठगी आने वाले समय में और बड़ा खतरा बन सकती है।
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