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Jaipur News: सचिन पायलट को लेकर क्यों छिड़ी सियासी जंग? भाजपा-कांग्रेस की बयानबाजी से गरमाई राजनीति
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सार
राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ी जुबानी जंग के केंद्र में इस बार सचिन पायलट हैं। दोनों दलों के नेता पायलट को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं, जिससे सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सचिन पायलट को लेकर छिड़ी जुबानी जंग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट एक बार फिर राजस्थान की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी के सात सांसदों द्वारा भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने के बाद शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी अब राजस्थान में सचिन पायलट के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले में भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा था कि यह इनकी फितरत है। उन्होंने मानेसर प्रकरण को याद करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने राजस्थान में भी कांग्रेस सरकार गिराने का प्रयास किया था। गहलोत के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में पायलट को लेकर नया सियासी दौर शुरू हो गया।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने गहलोत पर पलटवार करते हुए कहा कि गहलोत ने तो अपनी ही पार्टी के नेता को नहीं छोड़ा। उन्होंने सचिन पायलट के लिए ऐसे शब्द कहे, जिन्हें आज दोहराया भी नहीं जा सकता। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राजस्थान दौरे के दौरान भाजपा ने टोंक में बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किया। टोंक को सचिन पायलट का मजबूत गढ़ माना जाता है। उस समय नितिन नवीन की मौजूदगी में आयोजित सभा में भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. राधामोहनदास अग्रवाल ने पायलट को बहरूपिया बताते हुए कहा कि उनकी एक टांग कांग्रेस में है और दूसरी कहां है, पता नहीं।
इस बयान पर अशोक गहलोत ने जवाब देते हुए कहा कि सचिन पायलट की दोनों टांगें कांग्रेस में हैं। अब वे किसी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं।
गहलोत के बयान के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने फिर तंज कसते हुए कहा कि गहलोतजी ने सिर्फ टांगों की बात बताई, बाकी शरीर कहां है यह नहीं बताया। पायलट का मन कहां है, दिमाग कहां है, यह भी बताना चाहिए।
मदन राठौड़ यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि पायलट अच्छे आदमी हैं लेकिन पार्टी गलत है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भाजपा सचिन पायलट को न्योता दे रही है तो उन्होंने कहा- हमारी पार्टी के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। जो राष्ट्र को प्रथम मानता है, उसका भाजपा स्वागत करती है।
ये भी पढ़ें: JJM घोटाला: महेश जोशी जेल भेजे गए, करीबी संजय बड़ाया 3 दिन की रिमांड पर
इसी बीच नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि 2018 में हमने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के लिए पूरा प्रयास किया था। हमने अपने तीन विधायकों का समर्थन भी पायलट के पक्ष में दिया था लेकिन दो-दो बार प्रयास के बाद भी अगर वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए तो यह उनकी किस्मत है। बेनीवाल ने यह भी कहा कि आज भी भाजपा के बड़े नेता राजस्थान में गुर्जरों का सबसे बड़ा चेहरा सचिन पायलट को ही मानते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक, भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता और जाट महासभा के महासचिव कृष्णकुमार जानू ने इस पूरे घटनाक्रम को 2028 की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा राजस्थान में सचिन पायलट के प्रभाव को कमजोर नहीं होने देना चाहती। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार पायलट पर बयान देकर कांग्रेस के भीतर असहज स्थिति पैदा करना चाहती है ताकि अशोक गहलोत और पायलट के बीच टकराव बना रहे। जानू ने कहा कि अशोक गहलोत अनुभवी नेता हैं और वे राजनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए पायलट को साधने के साथ-साथ कांग्रेस आलाकमान को भी पुराने घटनाक्रम याद दिला रहे हैं।
2028 के चुनावी समीकरणों पर कृष्णकुमार जानू ने कहा कि भाजपा भविष्य में बड़ा राजनीतिक प्रयोग कर सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दूसरे दलों से आए नेताओं को भाजपा कई राज्यों में बड़ी जिम्मेदारियां दे चुकी है, इसलिए राजस्थान में भी किसी नए राजनीतिक समीकरण से इंकार नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट आज ऐसे नेता माने जाते हैं, जिनकी अपनी अलग जनस्वीकार्यता और युवा फैन फॉलोइंग है। माना जाता है कि प्रदेश की 80 से अधिक सीटों पर उनका प्रभाव है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेताओं के बयान लगातार पायलट के इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं।
इधर भाजपा का राजनीतिक लक्ष्य दो स्तर पर साफ दिखाई देता है। पहला कांग्रेस के भीतर पायलट और गहलोत खेमे के बीच पुराने मतभेदों को जीवित रखना। दूसरा पायलट को लेकर लगातार सकारात्मक संकेत देकर कांग्रेस नेतृत्व पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना। टोंक में आयोजित कार्यक्रम और वहां भाजपा नेताओं द्वारा पायलट पर टिप्पणी करना भी राजनीतिक रूप से सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है।
इधर कांग्रेस की स्थिति भी दिलचस्प है। अशोक गहलोत सार्वजनिक तौर पर पायलट का बचाव करते नजर आ रहे हैं। इसके पीछे बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि कांग्रेस अब राजस्थान में किसी भी तरह की अंदरूनी कलह की छवि से बचना चाहती है। पार्टी नेतृत्व भी समझता है कि 2028 में भाजपा के खिलाफ मजबूत मुकाबले के लिए पायलट की जनस्वीकार्यता और युवा पकड़ जरूरी होगी।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट आज भी सबसे चर्चित और सबसे संभावित चेहरों में शामिल हैं। भाजपा उन्हें भविष्य की चुनौती मानती है, जबकि कांग्रेस उन्हें भविष्य की उम्मीद के रूप में देख रही है।
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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले में भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा था कि यह इनकी फितरत है। उन्होंने मानेसर प्रकरण को याद करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने राजस्थान में भी कांग्रेस सरकार गिराने का प्रयास किया था। गहलोत के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में पायलट को लेकर नया सियासी दौर शुरू हो गया।
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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने गहलोत पर पलटवार करते हुए कहा कि गहलोत ने तो अपनी ही पार्टी के नेता को नहीं छोड़ा। उन्होंने सचिन पायलट के लिए ऐसे शब्द कहे, जिन्हें आज दोहराया भी नहीं जा सकता। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राजस्थान दौरे के दौरान भाजपा ने टोंक में बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किया। टोंक को सचिन पायलट का मजबूत गढ़ माना जाता है। उस समय नितिन नवीन की मौजूदगी में आयोजित सभा में भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. राधामोहनदास अग्रवाल ने पायलट को बहरूपिया बताते हुए कहा कि उनकी एक टांग कांग्रेस में है और दूसरी कहां है, पता नहीं।
इस बयान पर अशोक गहलोत ने जवाब देते हुए कहा कि सचिन पायलट की दोनों टांगें कांग्रेस में हैं। अब वे किसी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं।
गहलोत के बयान के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने फिर तंज कसते हुए कहा कि गहलोतजी ने सिर्फ टांगों की बात बताई, बाकी शरीर कहां है यह नहीं बताया। पायलट का मन कहां है, दिमाग कहां है, यह भी बताना चाहिए।
मदन राठौड़ यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि पायलट अच्छे आदमी हैं लेकिन पार्टी गलत है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भाजपा सचिन पायलट को न्योता दे रही है तो उन्होंने कहा- हमारी पार्टी के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। जो राष्ट्र को प्रथम मानता है, उसका भाजपा स्वागत करती है।
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इसी बीच नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि 2018 में हमने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के लिए पूरा प्रयास किया था। हमने अपने तीन विधायकों का समर्थन भी पायलट के पक्ष में दिया था लेकिन दो-दो बार प्रयास के बाद भी अगर वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए तो यह उनकी किस्मत है। बेनीवाल ने यह भी कहा कि आज भी भाजपा के बड़े नेता राजस्थान में गुर्जरों का सबसे बड़ा चेहरा सचिन पायलट को ही मानते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक, भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता और जाट महासभा के महासचिव कृष्णकुमार जानू ने इस पूरे घटनाक्रम को 2028 की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा राजस्थान में सचिन पायलट के प्रभाव को कमजोर नहीं होने देना चाहती। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार पायलट पर बयान देकर कांग्रेस के भीतर असहज स्थिति पैदा करना चाहती है ताकि अशोक गहलोत और पायलट के बीच टकराव बना रहे। जानू ने कहा कि अशोक गहलोत अनुभवी नेता हैं और वे राजनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए पायलट को साधने के साथ-साथ कांग्रेस आलाकमान को भी पुराने घटनाक्रम याद दिला रहे हैं।
2028 के चुनावी समीकरणों पर कृष्णकुमार जानू ने कहा कि भाजपा भविष्य में बड़ा राजनीतिक प्रयोग कर सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दूसरे दलों से आए नेताओं को भाजपा कई राज्यों में बड़ी जिम्मेदारियां दे चुकी है, इसलिए राजस्थान में भी किसी नए राजनीतिक समीकरण से इंकार नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट आज ऐसे नेता माने जाते हैं, जिनकी अपनी अलग जनस्वीकार्यता और युवा फैन फॉलोइंग है। माना जाता है कि प्रदेश की 80 से अधिक सीटों पर उनका प्रभाव है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेताओं के बयान लगातार पायलट के इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं।
इधर भाजपा का राजनीतिक लक्ष्य दो स्तर पर साफ दिखाई देता है। पहला कांग्रेस के भीतर पायलट और गहलोत खेमे के बीच पुराने मतभेदों को जीवित रखना। दूसरा पायलट को लेकर लगातार सकारात्मक संकेत देकर कांग्रेस नेतृत्व पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना। टोंक में आयोजित कार्यक्रम और वहां भाजपा नेताओं द्वारा पायलट पर टिप्पणी करना भी राजनीतिक रूप से सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है।
इधर कांग्रेस की स्थिति भी दिलचस्प है। अशोक गहलोत सार्वजनिक तौर पर पायलट का बचाव करते नजर आ रहे हैं। इसके पीछे बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि कांग्रेस अब राजस्थान में किसी भी तरह की अंदरूनी कलह की छवि से बचना चाहती है। पार्टी नेतृत्व भी समझता है कि 2028 में भाजपा के खिलाफ मजबूत मुकाबले के लिए पायलट की जनस्वीकार्यता और युवा पकड़ जरूरी होगी।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट आज भी सबसे चर्चित और सबसे संभावित चेहरों में शामिल हैं। भाजपा उन्हें भविष्य की चुनौती मानती है, जबकि कांग्रेस उन्हें भविष्य की उम्मीद के रूप में देख रही है।
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