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राजस्थान: 250 साल पुरानी जैन उपासरा ढही, बिना मंजूरी की जा रही थी 15 फीट गहरी खुदाई; बाल-बाल बचे मजदूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: जैसलमेर ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jun 2026 08:55 AM IST
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सार
जैसलमेर के राखेचा पाड़ा क्षेत्र में करीब 250 साल पुरानी जैन उपासरा इमारत ढह गई। प्रारंभिक जांच में पास में हो रही कथित अवैध बेसमेंट खुदाई को कारण माना जा रहा है। हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन ऐतिहासिक धरोहर के नुकसान से विरासत संरक्षण पर सवाल उठ गए हैं।
जैसलमेर में 250 साल पुरानी जैन धरोहर ढही
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
जैसलमेर के ऐतिहासिक राखेचा पाड़ा क्षेत्र में गुरुवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब जैन समाज की करीब 250 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक उपासरा इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भवन के समीप कथित रूप से बिना अनुमति कराई जा रही गहरी खुदाई ने इसकी नींव को कमजोर कर दिया, जिसके चलते यह धरोहर कुछ ही क्षणों में मलबे में तब्दील हो गई।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। तेज धमाके जैसी आवाज सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे तो देखा कि वर्षों पुरानी इमारत पूरी तरह ढह चुकी थी। सूचना मिलते ही नगर परिषद, पुलिस प्रशासन और अन्य विभागों की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं और हालात का जायजा लिया।
जैन समाज की आस्था और विरासत का केंद्र था उपासरा
ढहा हुआ उपासरा भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि जैन समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा था। वर्षों से यहां जैन साधु-साध्वियों के चातुर्मास और प्रवास के दौरान ठहरने की व्यवस्था होती रही थी। धार्मिक प्रवचन, आध्यात्मिक गतिविधियां और समाज से जुड़े कई कार्यक्रम इसी परिसर में आयोजित किए जाते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार यह भवन जैसलमेर की पारंपरिक स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण था। चूना-पत्थर और पारंपरिक निर्माण तकनीक से बनी यह इमारत ऐतिहासिक महत्व रखती थी। हालांकि समय के साथ भवन जर्जर होने लगा था और हाल के वर्षों में इसका उपयोग मुख्य रूप से गोदाम के रूप में किया जा रहा था।
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15 फीट गहरी खुदाई से कमजोर हुई नींव
प्रत्यक्षदर्शियों और क्षेत्रवासियों के मुताबिक उपासरा भवन से सटे एक भवन में बेसमेंट निर्माण के लिए करीब 15 फीट गहरी खुदाई की जा रही थी। आरोप है कि यह कार्य आवश्यक स्वीकृति के बिना किया जा रहा था और खुदाई के दौरान आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया।
विशेषज्ञों के अनुसार पुराने भवनों की नींव अपेक्षाकृत कम गहराई पर होती है। ऐसे में निकटवर्ती क्षेत्र में अत्यधिक गहरी खुदाई होने से मिट्टी का संतुलन बिगड़ जाता है और भवन की संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। माना जा रहा है कि इसी कारण उपासरा की नींव कमजोर हुई और अंततः भवन ढह गया।
मजदूरों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
घटना के समय खुदाई स्थल पर करीब 10 से 12 मजदूर काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि उन्हें पहले ही मिट्टी खिसकने और पत्थर गिरने के संकेत मिलने लगे थे। खतरे को भांपते हुए सभी मजदूर समय रहते वहां से हट गए। कुछ ही देर बाद पूरी इमारत धराशायी हो गई। यदि मजदूर मौके पर मौजूद रहते तो बड़ा हादसा हो सकता था। प्रशासन ने भी माना कि समय रहते लोगों के सुरक्षित निकल जाने से जनहानि टल गई।
प्रशासन ने खाली कराया क्षेत्र
सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र को खाली करवाना शुरू कर दिया है। शहर कोतवाली थानाधिकारी सुरजाराम जाखड़ ने बताया कि एहतियात के तौर पर आसपास रहने वाले दो परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित खतरे को देखते हुए संबंधित गली में आम लोगों की आवाजाही भी बंद कर दी गई है। पुलिस और नगर परिषद की टीमों ने बैरिकेडिंग कर क्षेत्र को सुरक्षित घेरा बना दिया है।
ये भी पढ़ें- राजस्थान: जैसलमेर से ISI का संदिग्ध एजेंट गिरफ्तार, बॉर्डर पर दुकान खोलकर लीक कर रहा था BSF का मूवमेंट
अवैध निर्माण पर कार्रवाई की तैयारी
नगर परिषद ने संबंधित जैन ट्रस्ट को मलबा हटाने के निर्देश दिए हैं। वहीं प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिस भवन में बेसमेंट निर्माण के लिए खुदाई की जा रही थी, उसके लिए किसी प्रकार की अनुमति जारी नहीं की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भी भेजी गई है। अधिकारियों का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहर के निकट अवैध निर्माण और खुदाई को गंभीरता से लिया जाएगा तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विरासत संरक्षण पर उठे सवाल
जैसलमेर अपनी ऐतिहासिक हवेलियों, मंदिरों और प्राचीन स्थापत्य धरोहरों के लिए विश्वभर में पहचान रखता है। ऐसे में एक ऐतिहासिक उपासरा का ढहना विरासत संरक्षण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है। राहत की बात यह रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन शहर ने अपनी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर जरूर खो दी।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। तेज धमाके जैसी आवाज सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे तो देखा कि वर्षों पुरानी इमारत पूरी तरह ढह चुकी थी। सूचना मिलते ही नगर परिषद, पुलिस प्रशासन और अन्य विभागों की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं और हालात का जायजा लिया।
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जैन समाज की आस्था और विरासत का केंद्र था उपासरा
ढहा हुआ उपासरा भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि जैन समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा था। वर्षों से यहां जैन साधु-साध्वियों के चातुर्मास और प्रवास के दौरान ठहरने की व्यवस्था होती रही थी। धार्मिक प्रवचन, आध्यात्मिक गतिविधियां और समाज से जुड़े कई कार्यक्रम इसी परिसर में आयोजित किए जाते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार यह भवन जैसलमेर की पारंपरिक स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण था। चूना-पत्थर और पारंपरिक निर्माण तकनीक से बनी यह इमारत ऐतिहासिक महत्व रखती थी। हालांकि समय के साथ भवन जर्जर होने लगा था और हाल के वर्षों में इसका उपयोग मुख्य रूप से गोदाम के रूप में किया जा रहा था।
15 फीट गहरी खुदाई से कमजोर हुई नींव
प्रत्यक्षदर्शियों और क्षेत्रवासियों के मुताबिक उपासरा भवन से सटे एक भवन में बेसमेंट निर्माण के लिए करीब 15 फीट गहरी खुदाई की जा रही थी। आरोप है कि यह कार्य आवश्यक स्वीकृति के बिना किया जा रहा था और खुदाई के दौरान आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया।
विशेषज्ञों के अनुसार पुराने भवनों की नींव अपेक्षाकृत कम गहराई पर होती है। ऐसे में निकटवर्ती क्षेत्र में अत्यधिक गहरी खुदाई होने से मिट्टी का संतुलन बिगड़ जाता है और भवन की संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। माना जा रहा है कि इसी कारण उपासरा की नींव कमजोर हुई और अंततः भवन ढह गया।
मजदूरों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
घटना के समय खुदाई स्थल पर करीब 10 से 12 मजदूर काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि उन्हें पहले ही मिट्टी खिसकने और पत्थर गिरने के संकेत मिलने लगे थे। खतरे को भांपते हुए सभी मजदूर समय रहते वहां से हट गए। कुछ ही देर बाद पूरी इमारत धराशायी हो गई। यदि मजदूर मौके पर मौजूद रहते तो बड़ा हादसा हो सकता था। प्रशासन ने भी माना कि समय रहते लोगों के सुरक्षित निकल जाने से जनहानि टल गई।
प्रशासन ने खाली कराया क्षेत्र
सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र को खाली करवाना शुरू कर दिया है। शहर कोतवाली थानाधिकारी सुरजाराम जाखड़ ने बताया कि एहतियात के तौर पर आसपास रहने वाले दो परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित खतरे को देखते हुए संबंधित गली में आम लोगों की आवाजाही भी बंद कर दी गई है। पुलिस और नगर परिषद की टीमों ने बैरिकेडिंग कर क्षेत्र को सुरक्षित घेरा बना दिया है।
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अवैध निर्माण पर कार्रवाई की तैयारी
नगर परिषद ने संबंधित जैन ट्रस्ट को मलबा हटाने के निर्देश दिए हैं। वहीं प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिस भवन में बेसमेंट निर्माण के लिए खुदाई की जा रही थी, उसके लिए किसी प्रकार की अनुमति जारी नहीं की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भी भेजी गई है। अधिकारियों का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहर के निकट अवैध निर्माण और खुदाई को गंभीरता से लिया जाएगा तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विरासत संरक्षण पर उठे सवाल
जैसलमेर अपनी ऐतिहासिक हवेलियों, मंदिरों और प्राचीन स्थापत्य धरोहरों के लिए विश्वभर में पहचान रखता है। ऐसे में एक ऐतिहासिक उपासरा का ढहना विरासत संरक्षण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है। राहत की बात यह रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन शहर ने अपनी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर जरूर खो दी।