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Jaisalmer News: छतागढ़ में सात दिन से बिजली संकट, भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे रात काटने को मजबूर ग्रामीण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: जैसलमेर ब्यूरो Updated Mon, 18 May 2026 08:18 PM IST
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सार

45 डिग्री तापमान के बीच जैसलमेर के छतागढ़ गांव में पिछले एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति बंद है। इस भीषण गर्मी के बीच करीब 300 परिवार अंधेरे, उमस और पानी संकट से जूझने को मजबूर हैं।

Jaisalmer News: Week-Long Power Crisis in Chhatagarh, Villagers Forced to Sleep Outdoors Amid Scorching Heat
छतागांव में सात दिन से बत्ती गुल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सीमावर्ती जैसलमेर जिले के छतागढ़ गांव में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट ने ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। गांव में पिछले सात दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित है, जिससे करीब 300 परिवार अंधेरे और गर्मी की मार झेलने को मजबूर हैं। मुख्य बिजली केबल खराब होने के कारण पूरे गांव का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दिन में तेज धूप और रात में उमस भरी गर्मी के बीच ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन हो चुका है।



ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज करवाने के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। गांव के लोगों ने जिला कलेक्टर को पत्र भेजकर डिस्कॉम अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव की जर्जर और खराब हो चुकी मुख्य बिजली केबल को तुरंत बदला जाए तथा नियमित बिजली आपूर्ति बहाल की जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग उठाई गई है।
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भीषण गर्मी में ग्रामीण बेहाल
छतागढ़ गांव में इन दिनों तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। ऐसे में बिजली नहीं होने से लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। पंखे, कूलर और अन्य जरूरी उपकरण बंद पड़े हैं। रात के समय छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हो रही हैं। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि बिजली कटौती के कारण घरों में लगी पानी की मोटरें भी बंद पड़ी हैं। इससे गांव में पेयजल संकट गहरा गया है। लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है। पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी में पानी और बिजली का संकट गांव की स्थिति को बेहद गंभीर बना रहा है।

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सिर्फ कागजों में ठीक हो रही बिजली
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डिस्कॉम अधिकारी केवल कागजों में बिजली व्यवस्था सुधारने के दावे कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे और न ही गांव में पहुंचकर समस्या का निरीक्षण कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार मुख्य बिजली लाइन की केबल काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी है। लंबे समय से इसकी मरम्मत या बदलाव की मांग की जा रही थी लेकिन समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अब केबल पूरी तरह खराब होने से पूरे गांव की बिजली व्यवस्था चरमरा गई है।

प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
गांववासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बिजली विभाग को तत्काल निर्देश देकर नई केबल डलवाई जाए और गांव में नियमित बिजली आपूर्ति शुरू करवाई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों के गांवों में पहले से ही मूलभूत सुविधाओं की कमी है, ऐसे में लगातार बिजली संकट ग्रामीणों के जीवन को और कठिन बना रहा है। लोगों ने प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द राहत पहुंचाने की अपील की है।

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