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Jaisalmer: क्लेम राशि में 70 लाख की हेराफेरी, आपस में बांटी रकम; सहकारी बैंक के पूर्व एमडी और कैशियर गिरफ्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: जैसलमेर ब्यूरो Updated Sat, 18 Apr 2026 10:04 AM IST
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सार

Jaisalmer News: जैसलमेर में किसानों के नाम पर करीब 70 लाख रुपए के घोटाले का मामला सामने आया है। जांच के बाद पुलिस ने पूर्व एमडी और कैशियर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार है। इस घोटाले ने सहकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

70 lakhs Manipulated in Claim Amount Former Cooperative Bank MD and Cashier Arrested
जैसलमेर में 70 लाख का सहकारी घोटाला - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

जैसलमेर जिले में सहकारी व्यवस्था से संबंधित एर बड़ा घोटाला उजागर हुआ है, जिसमें किसानों के नाम पर आई करीब 70 लाख रुपए की राशि का कथित दुरुपयोग किया गया। वर्ष 2020 में हुए इस मामले की जांच पूरी होने के बाद अब पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए तत्कालीन प्रबंध निदेशक (एमडी) और कैशियर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है।
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फर्जी हस्ताक्षर से निकाली गई राशि
कनोई ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष रोजे खान ने आरोप लगाया था कि उनके फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक से बड़ी रकम निकाली गई। शुरुआती जांच में ही स्पष्ट हो गया कि यह साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश थी, जिसमें कई अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई।
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70 किसानों के क्लेम में की गई हेराफेरी
जांच में सामने आया कि समिति के तत्कालीन व्यवस्थापक नरेश कुमार और तत्कालीन एमडी जगदीश सूथार ने मिलकर करीब 70 किसानों के कृषि क्लेम की राशि को गलत तरीके से निकाल लिया। यह राशि सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर होनी थी, लेकिन नियमों को दरकिनार कर नकद निकासी कर ली गई और रकम का दुरुपयोग किया गया।

पद से हटाने के बाद भी जारी रहा लेनदेन
गड़बड़ी की आशंका होने पर समिति अध्यक्ष ने 30 अगस्त 2020 को व्यवस्थापक को पद से हटा दिया था और इसकी सूचना बैंक प्रशासन को भी दे दी गई थी। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए 8 सितंबर को 20 लाख रुपए और 25 सितंबर को 50 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया।

दूसरी शाखा से किया गया भुगतान
इस घोटाले का एक और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि सोसायटी का मुख्य बैंक खाता जैसलमेर शाखा में होने के बावजूद भुगतान चांधन शाखा से किया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि पूरे प्रकरण को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि निगरानी से बचा जा सके।

दो गिरफ्तार
राजस्थान को-ऑपरेटिव एक्ट की धाराओं के तहत हुई जांच में चार अधिकारियों को दोषी पाया गया है। इनमें तत्कालीन एमडी, व्यवस्थापक, शाखा प्रबंधक और कैशियर शामिल हैं। पुलिस पहले ही व्यवस्थापक को गिरफ्तार कर चुकी है, जो फिलहाल जमानत पर है। अब पूर्व एमडी और कैशियर को भी गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है, जबकि शाखा प्रबंधक अभी फरार है।

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महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती पर उठे सवाल
गिरफ्तार अधिकारियों में एक वर्तमान में उप रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत था, जबकि दूसरा सहकारी समिति में मैनेजर के रूप में तैनात था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि गंभीर आरोपों के बावजूद ये अधिकारी लंबे समय तक जिम्मेदार पदों पर कैसे बने रहे।

सहकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल
यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि सहकारी संस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। किसानों के हितों से जुड़े इस घोटाले ने प्रशासनिक निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जुटी है और मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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