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पोकरण में एसीबी का कार्रवाई: पांच हजार की रिश्वत लेते अधिकारी गिरफ्तार, कार्यालय में मचा हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: जैसलमेर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 04:57 PM IST
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सार
पोकरण में एसीबी ने महिला एवं बाल विकास विभाग के सहायक प्रशासनिक अधिकारी भवानी सिंह को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आंगनबाड़ी प्रकरण में नोटिस निस्तारण के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है।
रिश्वत लेते सरकारी अधिकारी गिरफ्तार
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बुधवार को पोकरण में कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद विभागीय कार्यालय में हड़कंप मच गया और दिनभर इस घटना की चर्चा होती रही।
जानकारी के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग के सीडीपीओ कार्यालय में कार्यरत सहायक प्रशासनिक अधिकारी भवानी सिंह को एसीबी टीम ने 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोप है कि अधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़े एक प्रकरण में जारी नोटिस के निस्तारण के बदले परिवादी से रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत मिलने पर एसीबी ने शुरू की जांच
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरपतचंद ने बताया कि एक परिवादी ने एसीबी को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उसके आंगनबाड़ी केंद्र से संबंधित मामले में विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के निस्तारण और प्रकरण को समाप्त करने के बदले संबंधित अधिकारी रिश्वत की मांग कर रहा था। परिवादी ने यह भी बताया कि रकम नहीं देने पर उसे बार-बार कार्यालय बुलाया जा रहा था और अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा था। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की गोपनीय जांच शुरू कर दी।
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सत्यापन में सही पाए गए आरोप
एसीबी अधिकारियों ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद मुख्यालय के निर्देश पर विशेष ट्रैप टीम गठित कर कार्रवाई की योजना बनाई गई। टीम ने पूरे मामले पर नजर रखते हुए सीडीपीओ कार्यालय की निगरानी शुरू कर दी। पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार परिवादी को आरोपी अधिकारी के संपर्क में भेजा गया, ताकि रिश्वत की मांग और लेन-देन की पुष्टि की जा सके।
रिश्वत लेते ही रंगे हाथों पकड़ा गया
बुधवार को एसीबी टीम ने सीडीपीओ कार्यालय में जाल बिछाया। तय योजना के तहत परिवादी ने आरोपी अधिकारी को 5 हजार रुपये की रिश्वत राशि सौंपी। जैसे ही अधिकारी ने राशि स्वीकार की, पहले से तैनात एसीबी अधिकारियों ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली गई। इसके साथ ही नियमानुसार रासायनिक परीक्षण और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं मौके पर ही पूरी की गईं।
ये भी पढ़ें- सुबह-सुबह दहल उठा पाली, ट्रेन से कटकर युवक-युवती की हुई मौत; मची चीख-पुकार
कार्रवाई से कार्यालय में मची अफरा-तफरी
सरकारी कार्यालय में अचानक हुई एसीबी की कार्रवाई से कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे कार्यालय परिसर में चर्चा का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एसीबी टीम ने बेहद सुनियोजित तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी को आगे की पूछताछ के लिए एसीबी कार्यालय ले जाया गया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला
एसीबी ने आरोपी सहायक प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी पूर्व में भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है या नहीं। पोकरण में हुई इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है। आमजन और सामाजिक संगठनों ने एसीबी की इस कार्रवाई का स्वागत किया है।
जानकारी के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग के सीडीपीओ कार्यालय में कार्यरत सहायक प्रशासनिक अधिकारी भवानी सिंह को एसीबी टीम ने 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोप है कि अधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़े एक प्रकरण में जारी नोटिस के निस्तारण के बदले परिवादी से रिश्वत की मांग की थी।
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शिकायत मिलने पर एसीबी ने शुरू की जांच
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरपतचंद ने बताया कि एक परिवादी ने एसीबी को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उसके आंगनबाड़ी केंद्र से संबंधित मामले में विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के निस्तारण और प्रकरण को समाप्त करने के बदले संबंधित अधिकारी रिश्वत की मांग कर रहा था। परिवादी ने यह भी बताया कि रकम नहीं देने पर उसे बार-बार कार्यालय बुलाया जा रहा था और अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा था। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की गोपनीय जांच शुरू कर दी।
सत्यापन में सही पाए गए आरोप
एसीबी अधिकारियों ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद मुख्यालय के निर्देश पर विशेष ट्रैप टीम गठित कर कार्रवाई की योजना बनाई गई। टीम ने पूरे मामले पर नजर रखते हुए सीडीपीओ कार्यालय की निगरानी शुरू कर दी। पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार परिवादी को आरोपी अधिकारी के संपर्क में भेजा गया, ताकि रिश्वत की मांग और लेन-देन की पुष्टि की जा सके।
रिश्वत लेते ही रंगे हाथों पकड़ा गया
बुधवार को एसीबी टीम ने सीडीपीओ कार्यालय में जाल बिछाया। तय योजना के तहत परिवादी ने आरोपी अधिकारी को 5 हजार रुपये की रिश्वत राशि सौंपी। जैसे ही अधिकारी ने राशि स्वीकार की, पहले से तैनात एसीबी अधिकारियों ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली गई। इसके साथ ही नियमानुसार रासायनिक परीक्षण और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं मौके पर ही पूरी की गईं।
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कार्रवाई से कार्यालय में मची अफरा-तफरी
सरकारी कार्यालय में अचानक हुई एसीबी की कार्रवाई से कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे कार्यालय परिसर में चर्चा का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एसीबी टीम ने बेहद सुनियोजित तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी को आगे की पूछताछ के लिए एसीबी कार्यालय ले जाया गया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला
एसीबी ने आरोपी सहायक प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी पूर्व में भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है या नहीं। पोकरण में हुई इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है। आमजन और सामाजिक संगठनों ने एसीबी की इस कार्रवाई का स्वागत किया है।