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‘मुझे मारते थे, अपमानित करते थे’: जैसलमेर के MBBS छात्र के सुसाइड नोट से मचा हड़कंप, पांच गिरफ्तार; जानें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: जैसलमेर ब्यूरो Updated Mon, 16 Mar 2026 11:41 AM IST
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सार

राजस्थान के जैसलमेर निवासी MBBS अंतिम वर्ष के छात्र रतनकुमार मेघवाल ने राजकोट में ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। 17 पन्नों के सुसाइड नोट में पांच सहपाठियों पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए, सभी आरोपी गिरफ्तार।

MBBS student commits suicide: Ratan Kumar of Jaisalmer accuses five classmates of harassment in a 17-page
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजस्थान के जैसलमेर जिले से जुड़े एक होनहार मेडिकल छात्र की आत्महत्या के मामले ने देशभर में मेडिकल संस्थानों में छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव और उत्पीड़न को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जैसलमेर जिले के फलसूंड गांव निवासी MBBS अंतिम वर्ष के छात्र रतनकुमार मेघवाल ने गुजरात के राजकोट में ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी। इस घटना के बाद पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।

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जानकारी के अनुसार 14 मार्च 2026 की तड़के करीब 4 बजे रतनकुमार मेघवाल राजकोट के जामनगर रोड स्थित घन्टेश्वर इलाके के पास रेलवे ट्रैक पर पहुंचे और ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। घटनास्थल से पुलिस को रतनकुमार का बैग मिला जिसमें एक नोटबुक बरामद हुई। इसी नोटबुक में हिंदी और अंग्रेजी में लिखा हुआ 17 पन्नों का सुसाइड नोट मिला, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
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सुसाइड नोट में लगाए गंभीर आरोप
पुलिस के अनुसार सुसाइड नोट में रतनकुमार ने अपने साथ पढ़ने वाले पांच सहपाठियों पर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। नोट में लिखा गया है कि जनवरी 2026 से कुछ छात्र उस पर एक महिला मित्र के साथ संबंध होने का शक कर रहे थे। इसी वजह से वे उसे लगातार परेशान कर रहे थे, मारपीट करते थे और मानसिक दबाव बना रहे थे।

रतनकुमार ने अपने नोट में लिखा कि उसे बार-बार धमकाया गया और अपमानित किया गया, जिससे वह गहरे मानसिक तनाव में चला गया। उसने इस नोट को अंतिम बयान मानने की अपील करते हुए पांच छात्रों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। सुसाइड नोट में जिन छात्रों के नाम लिखे गए हैं उनमें प्राणव पालीवाल, अस्मित शर्मा और युवराज चौधरी (तीनों राजस्थान निवासी), निर्विघ्नम यादव (हरियाणा निवासी) और आयुष यादव (भरूच, गुजरात निवासी) शामिल हैं।

पुलिस ने पांचों आरोपियों को किया गिरफ्तार
मामले में मृतक छात्र के पिता मोहनलाल मेघवाल ने राजकोट के गांधीग्राम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में कोर्ट में पेश कर उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया गया है ताकि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा सके।

राजकोट एससी-एसटी सेल के एसीपी चिंतन पटेल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि रतनकुमार और आरोपियों के बीच एक महिला सहपाठी को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई थी। उक्त महिला छात्रा से रतनकुमार और आरोपी छात्र व्हॉट्सऐप के माध्यम से बातचीत करते थे।

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पहले भी कर चुका था आत्महत्या का प्रयास
पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि रतनकुमार इससे पहले भी दो बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका था। 28 जनवरी 2026 को वह AIIMS हॉस्टल छोड़कर रेलवे ट्रैक तक पहुंच गया था, जहां वह आत्महत्या करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि उस समय आसपास के ग्रामीणों ने और पुलिस ने उन्हें देख लिया और समय रहते बचा लिया था। इसके बाद उन्हें समझाकर वापस भेज दिया गया था। उस घटना के बाद उसकी काउंसलिंग कराई गई और परिवार को सूचना देकर उसे घर भेज दिया गया था। होली के अवसर पर वह कुछ समय के लिए अपने पैतृक गांव फलसूंड भी आया था। इस दौरान भी उसने आत्महत्या की कोशिश की थी, जिसके बाद परिवार ने उसका मनोचिकित्सक से उपचार भी करवाया था।

परीक्षा देने लौटा और उठा लिया बड़ा कदम
होली के बाद रतनकुमार अपनी MBBS अंतिम वर्ष की परीक्षा देने के लिए दोबारा राजकोट लौट आया था। परिवार और दोस्तों को उम्मीद थी कि वह धीरे-धीरे सामान्य जीवन में लौट आएगा, लेकिन मानसिक तनाव से जूझ रहे रतनकुमार ने 14 मार्च की सुबह 4 बजे यह खौफनाक कदम उठा लिया।

परिवार ने उठाए जांच पर सवाल
रतनकुमार के परिवार का आरोप है कि जनवरी में जब उसने पहली बार आत्महत्या का प्रयास किया था, उस समय भी उसने एक सुसाइड नोट लिखा था जिसमें इन्हीं छात्रों के नाम दर्ज थे। यदि उस समय पुलिस या संस्थान प्रशासन ने गंभीरता से कार्रवाई की होती तो शायद आज रतनकुमार की जान बचाई जा सकती थी। परिवार ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

इस घटना के बाद मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव, रैगिंग और आपसी विवादों को लेकर फिर से बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों के लिए मजबूत काउंसलिंग सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य सहायता बेहद जरूरी है ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल राजकोट पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और सुसाइड नोट, मोबाइल फोन तथा डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर घटना की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है। वहीं जैसलमेर जिले में भी इस घटना के बाद शोक और आक्रोश का माहौल है।

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