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रेगिस्तान से आई खुशखबरी: जैसलमेर ब्रीडिंग सेंटर में गोडावण के दो चूजों का जन्म, संरक्षण अभियान को मिली सफलता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: जैसलमेर ब्यूरो Updated Sun, 15 Mar 2026 01:33 PM IST
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सार

राजस्थान के जैसलमेर स्थित ब्रीडिंग सेंटर में संकटग्रस्त राज्य पक्षी गोडावण के दो चूजों का जन्म हुआ। एक प्राकृतिक और दूसरा कृत्रिम गर्भाधान से पैदा हुआ, जिससे संरक्षण प्रयासों को नई उम्मीद मिली। 

Two Great Indian Bustard chicks born at Jaisalmer Breeding Centre, major success in conservation campaign
जैसलमेर में दो चूजों का जन्म - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण को लेकर एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। सीमावर्ती जिले जैसलमेर में स्थापित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में दो नन्हे चूजों का सफल जन्म हुआ है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में इसे ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि यह प्रजाति दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में गिनी जाती है और इसकी संख्या बेहद सीमित रह गई है।

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सम और सुदासरी ब्रीडिंग सेंटर में हुआ जन्म
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ये दोनों चूजे डेजर्ट नेशनल पार्क क्षेत्र के सम और सुदासरी स्थित विशेष ब्रीडिंग सेंटरों में पैदा हुए हैं। इन सेंटरों को खासतौर पर गोडावण के संरक्षण और प्रजनन के लिए विकसित किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों चूजों के जन्म की प्रक्रिया अलग-अलग रही। एक चूजे का जन्म प्राकृतिक प्रजनन के माध्यम से हुआ, जबकि दूसरे चूजे का जन्म कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इंसिमिनेशन) तकनीक की मदद से हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी संवेदनशील और संकटग्रस्त प्रजाति में कृत्रिम गर्भाधान की सफलता बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे भविष्य में गोडावण की संख्या बढ़ाने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं।

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ब्रीडिंग सेंटर में गोडावणों की संख्या 70 के करीब

वन विभाग के अनुसार इन दो नए चूजों के जन्म के बाद जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटरों में गोडावणों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 70 के आसपास पहुंच गई है। इसे पिछले कुछ वर्षों में चलाए गए संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है। गोडावण संरक्षण परियोजना के तहत इन सेंटरों में अंडों को सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया जाता है। वैज्ञानिक निगरानी में चूजों को पाला जाता है और उनके स्वास्थ्य व व्यवहार पर लगातार अध्ययन किया जाता है।

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दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शामिल गोडावण
गोडावण न केवल भारत बल्कि दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में से एक है। यह राजस्थान का राज्य पक्षी है और मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान के शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाया जाता है। पिछले कुछ दशकों में शिकार, प्राकृतिक आवास में कमी, बिजली लाइनों से टकराव और अन्य मानव गतिविधियों के कारण इसकी संख्या तेजी से घटती चली गई। विशेषज्ञों के अनुसार अब प्राकृतिक आवास में इनकी संख्या बेहद सीमित रह गई है, इसलिए संरक्षण कार्यक्रमों का महत्व और भी बढ़ गया है।

संरक्षण परियोजना का नया चरण शुरू
गोडावण संरक्षण परियोजना अब अपने चौथे और सबसे चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है। वन विभाग के अधिकारी अब इन पक्षियों को धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण में वापस बसाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके तहत जल्द ही “सॉफ्ट रिलीज” प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

क्या है सॉफ्ट रिलीज प्रक्रिया
सॉफ्ट रिलीज एक विशेष वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें ब्रीडिंग सेंटर में पले-बढ़े पक्षियों को सीधे जंगल में नहीं छोड़ा जाता। इसके बजाय उन्हें पहले बड़े और सुरक्षित बाड़ों में रखा जाता है। इस दौरान उन्हें प्राकृतिक वातावरण में रहने की आदत डाली जाती है, भोजन स्वयं ढूंढने का प्रशिक्षण दिया जाता है और संभावित शिकारियों से बचने के तरीके सिखाए जाते हैं। जब विशेषज्ञों को लगता है कि ये पक्षी पूरी तरह प्राकृतिक जीवन के लिए तैयार हो चुके हैं, तब उन्हें खुले जंगल में छोड़ दिया जाता है।

संरक्षण प्रयासों से जगी नई उम्मीद
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह वैज्ञानिक तकनीकों और संरक्षण योजनाओं को लगातार आगे बढ़ाया गया तो आने वाले वर्षों में गोडावण की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। मरुस्थल की पहचान माने जाने वाले इस दुर्लभ पक्षी के दो नए चूजों का जन्म न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए राहत और उम्मीद की खबर माना जा रहा है। यह सफलता दर्शाती है कि योजनाबद्ध तरीके से संरक्षण किया जाए तो विलुप्ति के कगार पर खड़ी प्रजातियों को भी बचाया जा सकता है।

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