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Jaisalmer News: सीमावर्ती इलाके में दुर्लभ कैराकल का शव मिलने से सनसनी, वन्यजीव संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: जैसलमेर ब्यूरो Updated Sun, 15 Mar 2026 10:12 PM IST
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सार

Jaisalmer News: जैसलमेर के सीमावर्ती घोटारू क्षेत्र में दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल का शव मिलने से वन्यजीव संरक्षण पर सवाल उठे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद शिकार की आशंका जताई जा रही है, जबकि वन विभाग मामले की जांच में जुटा है।

discovery of carcass of rare caracal in border area has raised serious questions about wildlife conservation.
सीमावर्ती इलाके में दुर्लभ कैराकल की मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पश्चिमी राजस्थान के सरहदी इलाके में एक बेहद दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल का शव मिलने के बाद वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में गहरी चिंता और रोष देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया है और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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जानकारी के अनुसार, यह मामला जैसलमेर जिले के सीमावर्ती घोटारू क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दिखने में चीते जैसी दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल का शव दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने इसे बेहद गंभीर घटना बताते हुए तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग उठाई है।
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वन्यजीव प्रेमियों का आरोप है कि जिस तरह से कैराकल का शव मिला है, उससे यह आशंका जताई जा रही है कि इस दुर्लभ प्रजाति का शिकार किया गया हो सकता है। हालांकि वन विभाग के अधिकारी फिलहाल इस मामले में स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं और उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही मौत के कारणों का पता चल सकेगा।

रेगिस्तानी क्षेत्र में दुर्लभ है कैराकल
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार कैराकल भारत में पाई जाने वाली सबसे दुर्लभ जंगली बिल्लियों में से एक है। इसकी पहचान इसके कानों पर मौजूद काले और लंबे बालों के गुच्छों से होती है, जो इसे अन्य जंगली बिल्लियों से अलग बनाते हैं। यह प्रजाति मुख्य रूप से रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों में निवास करती है।

पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती रेगिस्तानी क्षेत्र में कभी-कभार ही कैराकल दिखाई देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में इस प्रजाति की संख्या पहले से ही बेहद सीमित है, इसलिए यदि इनके शिकार या मौत की घटनाएं बढ़ती हैं तो यह प्रजाति गंभीर खतरे में पड़ सकती है।

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निगरानी तंत्र मजबूत करने की मांग
वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण से जुड़े लोगों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कैराकल के शिकार की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके। इसके साथ ही सीमावर्ती रेगिस्तानी क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने, नियमित गश्त बढ़ाने और स्थानीय लोगों में वन्यजीव संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने की आवश्यकता भी जताई जा रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पश्चिमी राजस्थान के इन संवेदनशील रेगिस्तानी क्षेत्रों में दुर्लभ वन्यजीवों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।

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