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50 घंटे से अंधेरे में डूबा लाठी: आंधी में गिरे 132 केवी लाइन के टावर, हजारों लोग बिजली-पानी के संकट से बेहाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: जैसलमेर ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2026 10:41 PM IST
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सार
जैसलमेर के लाठी क्षेत्र में 132 केवी विद्युत लाइन के टावर गिरने से पिछले 50 घंटों से बिजली आपूर्ति ठप है। दर्जनों गांव अंधेरे में डूबे हैं। भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहरा गया है। विद्युत विभाग युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य में जुटा है।
टावर गिरने से ठप हुई सप्लाई
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
जैसलमेर जिले के लाठी क्षेत्र में पिछले 50 घंटों से बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। दो दिन पहले आए तेज आंधी-तूफान और खराब मौसम के चलते चांधन जीएसएस को जोड़ने वाली 132 केवी जैसलमेर-पोकरण विद्युत लाइन के कई टावर क्षतिग्रस्त होकर गिर गए। इसके बाद से क्षेत्र के दर्जनों गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं।
विद्युत लाइन को हुए नुकसान के कारण चांधन 33 केवी ग्रिड सब स्टेशन से जुड़े कई गांवों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है। लगातार दूसरे दिन भी बिजली बहाल नहीं होने से हजारों उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी और उमस के बीच लंबी बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
गर्मी में बेहाल हुए लोग
जून की तपती गर्मी के बीच बिजली नहीं होने से घरों में लगे पंखे, कूलर और अन्य विद्युत उपकरण बंद पड़े हैं। दिन के साथ-साथ रात में भी लोगों को राहत नहीं मिल रही। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई ग्रामीणों का कहना है कि लगातार दो रातों से उन्हें ठीक से नींद तक नहीं मिल पाई है।
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पेयजल संकट ने बढ़ाई चिंता
बिजली संकट का सबसे अधिक असर पेयजल व्यवस्था पर पड़ा है। अधिकांश गांवों में जलापूर्ति मोटर और ट्यूबवेल के माध्यम से होती है, लेकिन बिजली नहीं होने से पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो गई है। कई गांवों में पानी के टैंक खाली होने लगे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर लोग पेयजल के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द बिजली बहाल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है। महिलाओं को घरों के लिए पानी जुटाने में अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कारोबार और खेती पर भी असर
बिजली आपूर्ति बाधित होने से ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे व्यापार, आटा चक्कियां, वेल्डिंग कार्यशालाएं, डेयरी गतिविधियां और अन्य व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं। मोबाइल फोन चार्ज नहीं होने और इंटरनेट सेवाओं में बाधा आने से लोगों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है। किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में लगे विद्युत चालित उपकरण बंद होने से कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं, वहीं पशुपालकों को पानी और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ये भी पढ़ें- अलवर में बड़ा हादसा: चलती बाइक पर गिरी हाई वोल्टेज तार, दो दोस्तों की दर्दनाक मौत; बाइक भी जलकर खाक
युद्धस्तर पर चल रहा मरम्मत कार्य
जानकारी के अनुसार तेज आंधी के दौरान 132 केवी जैसलमेर-पोकरण विद्युत लाइन के कई टावर क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके बाद विद्युत विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और मरम्मत कार्य शुरू किया गया। हालांकि टावर गिरने जैसी बड़ी तकनीकी समस्या के कारण बिजली बहाली में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। विभागीय कर्मचारी और तकनीकी दल लगातार प्रभावित क्षेत्र में काम कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार 50 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में इतनी लंबी बिजली कटौती ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभाग जल्द वैकल्पिक व्यवस्था कर राहत प्रदान करे।
फिलहाल, क्षेत्र के हजारों लोग बिजली बहाली का इंतजार कर रहे हैं, जबकि प्रशासन और विद्युत विभाग की टीमें क्षतिग्रस्त लाइन को दुरुस्त करने में जुटी हुई हैं।
विद्युत लाइन को हुए नुकसान के कारण चांधन 33 केवी ग्रिड सब स्टेशन से जुड़े कई गांवों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है। लगातार दूसरे दिन भी बिजली बहाल नहीं होने से हजारों उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी और उमस के बीच लंबी बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
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गर्मी में बेहाल हुए लोग
जून की तपती गर्मी के बीच बिजली नहीं होने से घरों में लगे पंखे, कूलर और अन्य विद्युत उपकरण बंद पड़े हैं। दिन के साथ-साथ रात में भी लोगों को राहत नहीं मिल रही। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई ग्रामीणों का कहना है कि लगातार दो रातों से उन्हें ठीक से नींद तक नहीं मिल पाई है।
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बिजली संकट का सबसे अधिक असर पेयजल व्यवस्था पर पड़ा है। अधिकांश गांवों में जलापूर्ति मोटर और ट्यूबवेल के माध्यम से होती है, लेकिन बिजली नहीं होने से पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो गई है। कई गांवों में पानी के टैंक खाली होने लगे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर लोग पेयजल के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द बिजली बहाल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है। महिलाओं को घरों के लिए पानी जुटाने में अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कारोबार और खेती पर भी असर
बिजली आपूर्ति बाधित होने से ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे व्यापार, आटा चक्कियां, वेल्डिंग कार्यशालाएं, डेयरी गतिविधियां और अन्य व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं। मोबाइल फोन चार्ज नहीं होने और इंटरनेट सेवाओं में बाधा आने से लोगों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है। किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में लगे विद्युत चालित उपकरण बंद होने से कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं, वहीं पशुपालकों को पानी और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार 50 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में इतनी लंबी बिजली कटौती ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभाग जल्द वैकल्पिक व्यवस्था कर राहत प्रदान करे।
फिलहाल, क्षेत्र के हजारों लोग बिजली बहाली का इंतजार कर रहे हैं, जबकि प्रशासन और विद्युत विभाग की टीमें क्षतिग्रस्त लाइन को दुरुस्त करने में जुटी हुई हैं।