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Jalore: भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा, डमी कैंडिडेट और फर्जी दस्तावेजों के सहारे 37 ने पाई नौकरी, FIR दर्ज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालोर Published by: जालौर ब्यूरो Updated Sun, 11 Jan 2026 03:03 PM IST
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सार

Jalore: जिले में सरकारी भर्तियों में फर्जी दस्तावेजों और डमी कैंडिडेट के जरिए नौकरी हासिल करने के मामलों का खुलासा हुआ है। जांच में साल 2018 और 2021 की भर्तियों से जुड़े 37 कार्मिकों के हस्ताक्षरों में विसंगति पाई गई, जिससे पहचान में हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है। मामले में SOG जयपुर में दो एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

Jalore 37 people secured jobs through fraud in recruitment exams using dummy candidates and fake documents
राजस्थान पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जालोर जिले में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विगत वर्षों में हुई भर्तियों की आंतरिक जांच के बाद फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों और डमी कैंडिडेट के माध्यम से नौकरी हासिल करने के मामलों का बड़ा खुलासा हुआ है। इस संबंध में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) जयपुर में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गई हैं, जिनमें जालोर जिले के कुल 37 कार्मिकों को संदिग्ध माना गया है।

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अतिरिक्त महानिदेशक के आदेश के बाद की गई जांच में खुलासा
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड, राजस्थान जयपुर के पत्रांक 2636 दिनांक 31 जुलाई 2024 की पालना में जिला पुलिस अधीक्षक जालोर द्वारा विगत पांच वर्षों की भर्तियों की जांच के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया गया था। समिति का उद्देश्य यह जांच करना था कि भर्ती परीक्षा देने वाला अभ्यर्थी और वर्तमान में कार्यरत लोक सेवक एक ही व्यक्ति है या नहीं। साथ ही शैक्षणिक योग्यता, आवेदन पत्र, फोटो और हस्ताक्षरों का आपसी मिलान भी किया गया।

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37 कार्मिकों की हुई पहचान
समिति के सदस्य पुलिस निरीक्षक उदयपाल द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 की भर्ती में चयनित 26 कार्मिकों तथा वर्ष 2021 की भर्ती में चयनित 11 कार्मिकों के दस्तावेजों में भर्ती के समय और वर्तमान समय के हस्ताक्षरों में स्पष्ट अंतर पाया गया। इससे परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने और पहचान में हेराफेरी की आशंका प्रबल हुई है।

SOG जयपुर में दर्ज की गई दो FIR
इन रिपोर्टों के आधार पर SOG जयपुर में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। पहली एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के साथ-साथ राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का प्रयोग) अधिनियम, 1992 की धारा 3, 4 और 6 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी एफआईआर राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2022 की धारा 3, 6, 7 और 10 के तहत दर्ज की गई है।

मामलों की जांच करेंगे एसपी श्योजीराम मीणा
एफआईआर के अनुसार दोनों मामलों की जांच SOG जयपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्योजीराम मीणा को सौंपी गई है। प्रकरण दर्ज होने के बाद संबंधित सभी दस्तावेज सीसीटीएनएस पर अपलोड कर दिए गए हैं और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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भर्तियों की निष्पक्षता को लेकर उठने लगे सवाल
इस कार्रवाई के बाद राज्य में पूर्व की भर्तियों की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। SOG अब यह जांच करेगी कि किन अभ्यर्थियों ने डमी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा दी और इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका रही। मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

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