राजस्थान में लहसुन की गुणवत्ता पर संकट?: मंडियों में आवक अच्छी लेकिन सप्लाई में कमी, किसान हुए परेशान; जानें
झालावाड़ और हाड़ौती क्षेत्र में इस साल लहसुन की फसल पर बढ़ते तापमान का असर पड़ा है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों घट गए हैं। किसानों को मंडियों में अच्छे भाव मिल रहे हैं, लेकिन निर्यात लायक क्वालिटी नहीं होने से उन्हें उम्मीद के अनुसार लाभ नहीं मिल पा रहा।
विस्तार
राजस्थान के झालावाड़ जिले में इस साल लहसुन की फसल पर मौसम की मार साफ दिखाई दे रही है। हाड़ौती क्षेत्र का लहसुन देश-विदेश में मशहूर है, लेकिन फरवरी में बढ़े तापमान ने इसकी गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को प्रभावित किया है। इससे किसानों को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो पा रही है।
भाव अच्छे, लेकिन कमाई में निराशा
मंडियों में अच्छी आवक, लेकिन सप्लाई में कमी
किसानों को पड़ोसी राज्यों की मंडियों का सहारा
झालावाड़ के किसान खानपुर और मनोहरथाना की मंडियों के अलावा मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच और बारां जिले की छीपाबड़ौद मंडी में भी लहसुन बेचने जाते हैं।

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पिछले साल से कम हुई पैदावार
किसान रामचरण के अनुसार इस बार लहसुन की पैदावार पिछले साल से कम रही है। जहां पहले एक बीघा में 25 से 26 कट्टे निकलते थे, वहीं इस बार केवल 20 से 22 कट्टे ही मिल रहे हैं। मंडियों में लहसुन का भाव 2500 से 12500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है।
एमएसपी नहीं होने से किसानों की परेशानी
लहसुन एमएसपी वाली फसलों में शामिल नहीं है, इसलिए किसानों को मजबूरी में कम भाव पर भी बिक्री करनी पड़ती है। कटाई के बाद लहसुन को सुरक्षित रखना भी चुनौती है, क्योंकि नमी या अधिक गर्मी से यह जल्दी खराब हो जाता है।
एक हेक्टेयर में लागत का आंकड़ा
किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई, कटाई, निराई-गुड़ाई पर करीब 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसमें 10 से 15 हजार रुपये बीज, 10 हजार रुपये कीटनाशक और करीब 5-5 हजार रुपये अन्य खर्चों में लगते हैं। लहसुन की बुवाई अक्टूबर में होती है और मार्च में फसल तैयार हो जाती है।
औसत भाव, लेकिन क्वालिटी पर निर्भर कमाई
इस बार लहसुन के औसत भाव 10-11 हजार रुपये प्रति क्विंटल हैं, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले लहसुन के भाव 18 हजार रुपये तक जा रहे हैं। किसानों के अनुसार लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि फसल की क्वालिटी कैसी है और निर्यात की स्थिति क्या रहती है।
बुवाई और उत्पादन पर क्यों पड़ रहा असर?
- फरवरी में बढ़े तापमान के कारण लहसुन का आकार सही नहीं बन पाया।
- इससे उत्पादन और क्वालिटी दोनों पर नकारात्मक असर पड़ा।
- 2025-26 में कुल 26,038 हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई की गई।
- इस बार औसतन प्रति हेक्टेयर केवल 5 क्विंटल उत्पादन हुआ।
- सामान्य स्थिति में 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होने पर किसानों को बेहतर लाभ मिलता है।
- कम पैदावार के कारण किसानों की आय और मुनाफा प्रभावित हुआ।
अब पैकेजिंग से बढ़ेगी बिक्री
लहसुन की बिक्री बढ़ाने के लिए अब किसान ग्रेडिंग और पैकेजिंग पर ध्यान दे रहे हैं। अलग-अलग क्वालिटी के लहसुन को 1 किलो से 20 किलो तक के पैकेट में तैयार किया जा रहा है। सही तरीके से पैक किया गया लहसुन करीब 6 महीने तक खराब नहीं होता। इससे व्यापारियों को सप्लाई में आसानी होगी और किसानों को भी बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। पहले किसान बिना क्वालिटी पर ध्यान दिए लहसुन बेच देते थे, लेकिन अब बेहतर गुणवत्ता के साथ बाजार में भेज रहे हैं।
