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Rajasthan News: झालावाड़ के संतरे से बदलेगी किसानों की तस्वीर, पाउडर और कॉस्मेटिक उत्पादों से मिलेगा दोहरा लाभ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़ Published by: झालावाड़ ब्यूरो Updated Sun, 26 Apr 2026 05:27 PM IST
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सार

Jhalawar News: झालावाड़ में संतरे से पाउडर और कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने की तैयारी है। पायलट प्रोजेक्ट अगले सीजन तक शुरू होगा। इससे किसानों को बेहतर दाम, अतिरिक्त आय, कम बर्बादी और संतरा खेती में नया उत्साह मिलने की उम्मीद है।

Jhalawar's Oranges Set to Transform Farmers' Fortunes; Powder and Cosmetic Products to Yield Dual Benefits
झालावाड़ के संतरे से बदलेगी किसानों की तस्वीर - फोटो : AI Image- Freepik
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विस्तार

झालावाड़ जिले में संतरे की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत और अवसर की बड़ी खबर है। जिले में अब संतरे की पैदावार केवल ताजे फल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका उपयोग पाउडर और अन्य कॉस्मेटिक उत्पादों में भी किया जाएगा। इससे किसानों को उपज का बेहतर दाम मिलने के साथ अतिरिक्त आय के नए रास्ते खुलेंगे।

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झालावाड़ जिले के संतरा एक्सीलेंस सेंटर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत संतरे का पाउडर बनाने का कार्य आने वाले सीजन तक शुरू किया जाएगा। इस पहल से संतरे के जूस, छिलका और पल्प का भी उपयोग संभव होगा। इससे किसानों को मेहनत का दोहरा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
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ऑर्गेनिक पाउडर से मिलेगा बेहतर मूल्य
जानकारी के अनुसार, संतरे से तैयार होने वाला पाउडर ऑर्गेनिक होगा, जिसके कारण बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद है। किसान अपने स्तर पर छोटी यूनिट लगाकर भी पाउडर तैयार कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें अनुदान भी दिया जाएगा।
 
गुणवत्ता के कारण खाड़ी देशों तक पहचान बना चुके झालावाड़ के संतरे का अब स्थानीय स्तर पर कई प्रकार से उपयोग होने से किसानों की आय बढ़ेगी। साथ ही बाजार में मांग बढ़ने से बगीचों का क्षेत्रफल भी बढ़ सकता है, जिससे जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
 
जिले में संतरा उत्पादन की मजबूत स्थिति
झालावाड़ जिले में करीब 24,500 हेक्टेयर क्षेत्र में संतरे की खेती होती है। सालाना उत्पादन लगभग 3 लाख मीट्रिक टन बताया गया है, जबकि औसत उत्पादकता 12.5 टन प्रति हेक्टेयर है। जलवायु और ब्लैक कॉटन मिट्टी के कारण यहां के संतरे की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है। इसकी मांग देशभर में बनी रहती है, जबकि निर्यात बांग्लादेश और नेपाल तक होता है। राजस्थान में संतरा उत्पादन में झालावाड़ को पहले स्थान पर बताया जाता है। यहां 10 से अधिक किस्मों के संतरे उगाए जाते हैं, जिनमें नागपुरी किस्म की सबसे ज्यादा मांग है।
 
खाद्य उत्पादों से लेकर कॉस्मेटिक तक होगा उपयोग
संतरे का उपयोग केवल फल के रूप में ही नहीं, बल्कि संतरा बर्फी, कैंडी, आइसक्रीम, चॉकलेट, केक और संतरा फ्लेवर वाले रसगुल्ले में भी किया जाता है। इसके अलावा फेस पैक, स्क्रब और हेयर केयर प्रोडक्ट्स में इसे नेचुरल इंग्रीडिएंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ऑफ सीजन में भी असली संतरा जूस और अन्य सामग्री के रूप में इसका उपयोग संभव होगा, जिससे बाजार में सालभर मांग बनी रह सकती है।

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पायलट प्रोजेक्ट पर 20 लाख रुपये की लागत
झालावाड़ जिले में शुरू होने वाले इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए मशीनरी स्थापित की जा चुकी है और इसकी टेस्टिंग भी पूरी कर ली गई है। इस परियोजना पर करीब 20 लाख रुपये की लागत आई है। प्लांट संतरा एक्सीलेंस सेंटर पर लगाया जाएगा। इसके शुरू होने के बाद किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि 1 किलो पाउडर बनाने में करीब 40 किलो संतरे का उपयोग होता है।
 
पाउडर कारोबार बनेगा फायदे का सौदा
संतरा पाउडर का बाजार मूल्य करीब 3000 रुपये किलो बताया गया है। जहां ताजा संतरा 40 से 80 रुपये किलो बिकता है, वहीं पाउडर ढाई हजार से 3 हजार रुपये किलो तक बिक सकता है। संतरा कुछ समय बाद खराब हो जाता है, जबकि पाउडर को महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे किसानों को उपज खराब होने की चिंता कम होगी और बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
 
बीमारी के बाद फिर बढ़ा उत्पादन क्षेत्र
कुछ समय पहले काली मस्सी नामक बीमारी के कारण संतरे की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित हुआ था। इससे कई किसानों ने बगीचे खत्म कर दिए थे और इस फल से दूरी बना ली थी। हालांकि अब फिर से संतरा उत्पादन का रकबा बढ़ा है और किसानों का रुझान लौट रहा है।
 
अब बाहर से नहीं मंगवाने पड़ेंगे पौधे
केंद्र पर अब संतरे के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। ये पौधे झालावाड़ के स्थानीय वातावरण में तैयार होने से नुकसान की संभावना कम रहती है। पहले पौधे बाहर राज्यों से मंगवाने पड़ते थे, जिससे वे पर्याप्त उत्पादन नहीं दे पाते थे। बड़े होने के दौरान कई प्रकार की बीमारियां लगने से पौधे नष्ट भी हो जाते थे। साथ ही किसानों को महंगी कीमत पर पौधे खरीदने पड़ते थे।


 

 

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