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Jhunjhunu News: अतिक्रमण मुक्त अभियान में ठेले और रेहड़ी संचालकों पर प्रशासन की गाज, रोजी-रोटी का संकट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनू Published by: प्रिया वर्मा Updated Tue, 04 Mar 2025 08:14 AM IST
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सार

शहर में प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण मुक्त अभियान के बाद प्रशासन सवालों के घेरे में है। लोगों ने आरोप लगाया है प्रशासन का टारगेट सिर्फ छोटे दुकानदार और रेहड़ी वाले ही हैं। अतिक्रमण तो पूरे झुंझुनू में पहले से ही हो रखा है उन पर प्रशासन की रहमदिली क्यों है।

Jhunjhunu News: In the encroachment free campaign, the administration's wrath on the cart and street vendors
रेहड़ी-ठेला संचालकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

झुंझुनू जिला मुख्यालय पर यातायात सुगम बनाने के लिए अस्थाई अतिक्रमण हटाने का अभियान पिछले चार दिनों से जारी है। इस दौरान प्रशासन को विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। शहर के गांधी चौक, शहीदान चौक, रोड नंबर एक, दो तथा तीन पर रेहड़ी , ठेला लगाकर गुजर-बसर कर रहे लोगों पर प्रशासन कहर बरपा रहा है जबकि रसूखदार अतिक्रमियों पर मेहरबान है। 

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ज्ञात रहे झुंझुनू के गांधी चौक पर ठेला, रेहड़ी लगने से ही इसे झुंझुनू चौपाटी का नाम दिया गया। हर रोज शाम होते ही यहां चाट-पकौड़े और ज्यूस के शौकीन लोगों की भीड़ एकत्रित  होती है। मुख्यतः गांधी चौक में लगने वाले विभिन्न प्रकार ठेलों और रेहड़ियों से कमाई करने वाले तकरीबन 50 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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प्रशासन के अतिक्रमण हटाओ अभियान से प्रभावित पीड़ितों का कहना है कि यह छोटी मछलियों पर कहर बरपाने का काम है, जबकि बड़े-बड़े मगरमच्छों को प्रशासन खुद पनाह दे रहा है। पीड़ितों ने बताया कि अभियान के तहत प्रशासन ने जहां भी रसूखदार लोगों का अस्थाई अतिक्रमण देखा, वहां पर प्रशासन ने अपनी आंखें फेर लीं।

शहर के बीचों-बीच स्थित गांधी चौक में ठेला रेहड़ी लगाने वाले लगभग सभी संचालकों ने मोदी सरकार की योजना के तहत लोन ले रखा है। पीड़ित यूसुफ ने बताया कि पहले हमें दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत बाकायदा फुटकर विक्रेता के रूप में पहचान पत्र जारी किए गए थे, जिसके एवज में 700 रुपये लिए गए थे। वही लोग गांधी चौक में अपनी आजीविका हेतु कार्यरत हैं, जिन्हें अब परेशान किया जा रहा है।

जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि पहले हमें 10- 10 हजार रुपए का लोन दिया गया था। समय पर लोन चुकता करने पर अब 20-20 हजार का लोन मुहैया कराया गया है। दैनिक मजदूरी करने वाले रेहड़ी, ठेला संचालकों के सामने अब प्रशासन की भेदभाव पूर्ण नीति के चलते परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो रहा है साथ ही लोन की किस्त जमा कराने का भी संकट मंडरा रहा है।

पीड़ितों ने बताया कि दो साल पहले तक नगर परिषद रेहड़ी ठेला लगाने की एवज में प्रत्येक से 1100 रुपये लेकर रसीद देती थी। पहली किस्त के रूप में 600 रुपये फिर दो किस्तों में 5 सौ 5 सौ रुपये लिए जाते थे। विगत वर्षों से नगर परिषद ने पैसे लेना बन्द कर दिया है। गांधी चौक में आजीविका अर्जित करने वाले ठेला-रेहड़ी संचालनकर्ता अब भी नगर परिषद को सालाना यह पैसा देने को तैयार हैं।

गांधी चौक में रेहड़ी ठेला संचालन करने वाले पीड़ितों ने एकत्रित होकर जिला कलेक्टर को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। साथ ही कहा कि जिला प्रशासन ने हमारी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया तो हम सब आंदोलन करने को मजबूर होंगे। पीड़ितों ने दोहराया की एक तरफ सरकार कह रही है कोई भूखा ना सोए और एक तरफ हम भुखमरी के कगार पर हैं।

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