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Kotputli-Behror News: अजीतपुरा में 291 दिन बाद खत्म हुआ खनन विरोधी आंदोलन, समझौते के बाद एक ब्लॉक में खनन बंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़
Published by: कोटपुतली ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2026 02:51 PM IST
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सार
अजीतपुरा-कुजोता क्षेत्र में लाइम स्टोन खनन के विरोध में लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच बड़ी सहमति बनी है। प्रशासन के आश्वासन और मांगों पर सकारात्मक निर्णय के बाद ग्रामीणों ने 291 दिन पुराना आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया।
291 दिन से चल रहा धरना आंदोलन प्रशासन से बातचीत के बाद समाप्त
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले के अजीतपुरा-कुजोता क्षेत्र में आबादी के निकट संचालित लाइम स्टोन खनन परियोजना के विरोध में पिछले 291 दिनों से चल रहा ग्रामीणों का धरना मंगलवार देर रात प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई समझौता वार्ता के बाद समाप्त हो गया। देर रात तक चली वार्ता में ग्रामीणों की प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई। प्रशासन ने आबादी क्षेत्र के निकट स्थित एक नंबर ब्लॉक में खनन कार्य पूरी तरह बंद करने, ग्रामीणों पर दर्ज मामलों में मेरिट के आधार पर कार्रवाई करने तथा हालिया हिंसक घटना के आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
गौरतलब है कि ग्रामीण खनन और ब्लास्टिंग के विरोध में सोमवार को दोबारा धरना शुरू करने जा रहे थे। इसी दौरान खनन हितों से जुड़े लोगों पर कथित रूप से हवाई फायरिंग, पथराव और लाठी-डंडों से हमला करने के आरोप लगे थे। इस घटना में छह से अधिक ग्रामीण घायल हो गए थे, जबकि चार घायलों को गंभीर हालत में जयपुर रैफर किया गया था, फिलहाल सभी घायलों की हालत में सुधार बताया जा रहा है। घटना के बाद ग्रामीणों ने सोमवार रात से फिर धरना शुरू कर दिया था और बड़ी संख्या में लोगों के धरना स्थल पर जुटने से क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई थी। ग्रामीणों की ओर से शीशराम जाट ने सरूण्ड थाने में फायरिंग, पथराव और मारपीट का मामला दर्ज कराया था।
हमले में कई लोग हुए थे घायल
ग्रामीणों का आरोप है कि लाइम स्टोन खान में लगातार हो रही ब्लास्टिंग से आसपास की आबादी प्रभावित हो रही थी, जिसके विरोध में लंबे समय से आंदोलन चल रहा था। सोमवार को हुई हिंसक घटना में महेंद्र मीणा, मदनलाल आर्य, दशरथ बावरिया, सुगनचंद आर्य और करिश्मा सहित कई लोग घायल हो गए थे।
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महेंद्र मीणा और मदनलाल आर्य के अलावा दूसरे पक्ष के दिलीप और विजय को गंभीर हालत में जयपुर रैफर किया गया था। चिकित्सकों के अनुसार सभी घायलों की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।
इन मांगों पर बनी सहमति
समझौता वार्ता के दौरान प्रशासन और ग्रामीणों के बीच निम्न बिंदुओं पर सहमति बनी है।
धरना संयोजक एवं पूर्व सरपंच नेतराम ने कहा कि यदि समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया गया तो ग्रामीण पुनः आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।
समझौता वार्ता के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस उपाधीक्षक राजेंद्र बुरड़क, एसडीएम योगेश सिंह देवल, सहायक खनि अभियंता अमीचंद दहूरियाव, तहसीलदार सहित पांच थानों का पुलिस जाब्ता मौके पर तैनात रहा।
प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास किया। जानकारी के अनुसार संबंधित खनन पट्टा गुजरात की एक कंपनी से जुड़े तीन व्यक्तियों के नाम दर्ज है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद को लेकर क्षेत्र में तनाव बना हुआ था, लेकिन मंगलवार रात हुए समझौते के बाद फिलहाल स्थिति सामान्य हो गई है।
गौरतलब है कि ग्रामीण खनन और ब्लास्टिंग के विरोध में सोमवार को दोबारा धरना शुरू करने जा रहे थे। इसी दौरान खनन हितों से जुड़े लोगों पर कथित रूप से हवाई फायरिंग, पथराव और लाठी-डंडों से हमला करने के आरोप लगे थे। इस घटना में छह से अधिक ग्रामीण घायल हो गए थे, जबकि चार घायलों को गंभीर हालत में जयपुर रैफर किया गया था, फिलहाल सभी घायलों की हालत में सुधार बताया जा रहा है। घटना के बाद ग्रामीणों ने सोमवार रात से फिर धरना शुरू कर दिया था और बड़ी संख्या में लोगों के धरना स्थल पर जुटने से क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई थी। ग्रामीणों की ओर से शीशराम जाट ने सरूण्ड थाने में फायरिंग, पथराव और मारपीट का मामला दर्ज कराया था।
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हमले में कई लोग हुए थे घायल
ग्रामीणों का आरोप है कि लाइम स्टोन खान में लगातार हो रही ब्लास्टिंग से आसपास की आबादी प्रभावित हो रही थी, जिसके विरोध में लंबे समय से आंदोलन चल रहा था। सोमवार को हुई हिंसक घटना में महेंद्र मीणा, मदनलाल आर्य, दशरथ बावरिया, सुगनचंद आर्य और करिश्मा सहित कई लोग घायल हो गए थे।
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महेंद्र मीणा और मदनलाल आर्य के अलावा दूसरे पक्ष के दिलीप और विजय को गंभीर हालत में जयपुर रैफर किया गया था। चिकित्सकों के अनुसार सभी घायलों की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।
इन मांगों पर बनी सहमति
समझौता वार्ता के दौरान प्रशासन और ग्रामीणों के बीच निम्न बिंदुओं पर सहमति बनी है।
- आबादी क्षेत्र के निकट स्थित एक नंबर ब्लॉक में खनन कार्य पूरी तरह बंद किया जाएगा।
- ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज मुकदमों में मेरिट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- सोमवार को दर्ज मामले में आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
- खान क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों का पुलिस सत्यापन कराया जाएगा।
- आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को खान में काम पर रखने पर रोक लगाई जाएगी।
- बी ब्लॉक में 300 मीटर की दूरी तक किसी प्रकार का खनन कार्य नहीं किया जाएगा।
धरना संयोजक एवं पूर्व सरपंच नेतराम ने कहा कि यदि समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया गया तो ग्रामीण पुनः आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।
समझौता वार्ता के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस उपाधीक्षक राजेंद्र बुरड़क, एसडीएम योगेश सिंह देवल, सहायक खनि अभियंता अमीचंद दहूरियाव, तहसीलदार सहित पांच थानों का पुलिस जाब्ता मौके पर तैनात रहा।
प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास किया। जानकारी के अनुसार संबंधित खनन पट्टा गुजरात की एक कंपनी से जुड़े तीन व्यक्तियों के नाम दर्ज है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद को लेकर क्षेत्र में तनाव बना हुआ था, लेकिन मंगलवार रात हुए समझौते के बाद फिलहाल स्थिति सामान्य हो गई है।