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Rajasthan News: भिवाड़ी में वेतन वृद्धि की मांग पर श्रमिकों का बड़ा आंदोलन, कई कंपनियों में काम ठप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़
Published by: कोटपुतली ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2026 10:50 PM IST
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सार
भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर श्रमिकों का आंदोलन तेज हो गया है। कई कंपनियों के कर्मचारी धरने पर बैठ गए हैं और काम बंद करने की चेतावनी दी है।
भिवाड़ी में विभिन्न मांगों को लेकर श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान की औद्योगिक नगरी भिवाड़ी में वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर श्रमिकों का आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। पिछले करीब 20 दिनों से जारी विरोध गुरुवार को और तेज हो गया, जब कहरानी औद्योगिक क्षेत्र की कई प्रमुख कंपनियों के श्रमिक भी धरने में शामिल हो गए। श्रमिकों ने फैक्ट्री गेट के बाहर बैठकर जोरदार नारेबाजी की और मांगें पूरी नहीं होने तक काम बंद रखने की चेतावनी दी। आंदोलन के विस्तार से औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। श्रमिकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो विरोध और व्यापक रूप ले सकता है।
कम वेतन और लंबे कार्य घंटे बने मुख्य मुद्दे
धरने पर बैठे श्रमिकों का आरोप है कि उनसे निर्धारित समय से अधिक काम लिया जाता है, लेकिन इसके मुकाबले वेतन बेहद कम दिया जाता है। उनकी प्रमुख मांग है कि 8 घंटे की ड्यूटी के लिए न्यूनतम 20 हजार रुपये मासिक वेतन तय किया जाए और ओवरटाइम का भुगतान भी बढ़ाया जाए।
8 घंटे की ड्यूटी में मिलते हैं 9 हजार रूपये
महिला श्रमिकों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें 8 घंटे की ड्यूटी के लिए केवल 7 से 9 हजार रुपये मिलते हैं, जो बढ़ती महंगाई के दौर में पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि 8 घंटे की ड्यूटी के लिए कम से कम 16 हजार और 12 घंटे की ड्यूटी के लिए 20 हजार रुपये वेतन मिलना चाहिए।
बोनस और छुट्टियों को लेकर भी नाराजगी
श्रमिकों ने त्योहारों पर बोनस नहीं मिलने और छुट्टी लेने पर वेतन कटौती किए जाने को लेकर भी असंतोष जताया है। उनका आरोप है कि अन्य कंपनियों में समान कार्य के लिए बेहतर वेतन और सुविधाएं मिलती हैं, जबकि यहां श्रमिकों को अपेक्षाकृत कम भुगतान किया जा रहा है। कुछ श्रमिकों ने यह भी कहा कि होली और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों पर बोनस का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
श्रमिकों के बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और फैक्ट्री गेट के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। साथ ही दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
ये भी पढ़ें- जयपुर में ‘ओरण बचाओ’ यात्रा पर बवाल: धरने पर बैठे विधायक भाटी, पुलिस से हुई नोंकझोंक; जमकर हुआ प्रदर्शन
प्रबंधन की चुप्पी से बढ़ी चिंता
श्रमिकों के गंभीर आरोपों के बावजूद संबंधित कंपनियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे श्रमिकों में नाराजगी और बढ़ती जा रही है। श्रमिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और कामकाज प्रभावित होता रहेगा।
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कम वेतन और लंबे कार्य घंटे बने मुख्य मुद्दे
धरने पर बैठे श्रमिकों का आरोप है कि उनसे निर्धारित समय से अधिक काम लिया जाता है, लेकिन इसके मुकाबले वेतन बेहद कम दिया जाता है। उनकी प्रमुख मांग है कि 8 घंटे की ड्यूटी के लिए न्यूनतम 20 हजार रुपये मासिक वेतन तय किया जाए और ओवरटाइम का भुगतान भी बढ़ाया जाए।
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8 घंटे की ड्यूटी में मिलते हैं 9 हजार रूपये
महिला श्रमिकों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें 8 घंटे की ड्यूटी के लिए केवल 7 से 9 हजार रुपये मिलते हैं, जो बढ़ती महंगाई के दौर में पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि 8 घंटे की ड्यूटी के लिए कम से कम 16 हजार और 12 घंटे की ड्यूटी के लिए 20 हजार रुपये वेतन मिलना चाहिए।
बोनस और छुट्टियों को लेकर भी नाराजगी
श्रमिकों ने त्योहारों पर बोनस नहीं मिलने और छुट्टी लेने पर वेतन कटौती किए जाने को लेकर भी असंतोष जताया है। उनका आरोप है कि अन्य कंपनियों में समान कार्य के लिए बेहतर वेतन और सुविधाएं मिलती हैं, जबकि यहां श्रमिकों को अपेक्षाकृत कम भुगतान किया जा रहा है। कुछ श्रमिकों ने यह भी कहा कि होली और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों पर बोनस का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
श्रमिकों के बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और फैक्ट्री गेट के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। साथ ही दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
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प्रबंधन की चुप्पी से बढ़ी चिंता
श्रमिकों के गंभीर आरोपों के बावजूद संबंधित कंपनियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे श्रमिकों में नाराजगी और बढ़ती जा रही है। श्रमिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और कामकाज प्रभावित होता रहेगा।
