Rajasthan: तिरंगे में लिपटा शंकर लाल जाट का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव, गूंजे देशभक्ति के नारे; आंखें हुईं नम
Rajasthan: कोटपूतली-बहरोड़ के बड़नगर निवासी सीआईएसएफ जवान शंकर लाल जाट का ड्यूटी के दौरान निधन हो गया। गांव में तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
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प्रागपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम बड़नगर निवासी सीआईएसएफ जवान शंकर लाल जाट को बुधवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही पूरा क्षेत्र देशभक्ति और शोक में डूब गया। “भारत माता की जय” और “शहीद शंकर लाल जाट अमर रहें” के नारों से गांव की गलियां गूंज उठीं।
सीआईएसएफ सब इंस्पेक्टर विजय कुमार ने बताया कि 40 वर्षीय शंकर लाल जाट तमिलनाडु के थकोला स्थित सीआईएसएफ टर्निंग सेंटर में तैनात थे। चेन्नई स्थित यूनिट में ड्यूटी के दौरान उनका निधन हो गया। बुधवार दोपहर पावटा से बाइक तिरंगा रैली के माध्यम से उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया। रास्ते भर ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर वीर सपूत को अंतिम सलामी दी।
गांव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। अंत्येष्टि स्थल पर शंकर लाल जाट की बड़ी बेटी अंशिता और भतीजे ने मुखाग्नि दी। यह दृश्य देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। वृद्ध माता-पिता प्रहलाद जाट और छोटी देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी रजनेश और तीन बेटियां—अंशिता (16 वर्ष), तोषिका (3 वर्ष) और आठ माह की मासूम बेटी अपने पिता को खोने के गम में बेसहारा नजर आईं। शंकर लाल जाट दो भाइयों में बड़े थे। उनके छोटे भाई राजेंद्र जाट भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में पटवारी के पद पर कार्यरत हैं।
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अंतिम संस्कार में क्षेत्रीय विधायक कुलदीप धनकड़, पावटा एसडीएम साधना शर्मा, पूर्व सरपंच मदनलाल यादव व रामकरण यादव, पंचायत समिति सदस्य लालचंद यादव, सामाजिक कार्यकर्ता बलवंत मीणा, महेश बैराठी, प्रागपुरा थानाधिकारी सीआई भजनाराम सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।
इस मौके पर राजस्थान उच्च न्यायालय के अधिवक्ता देवांश सिंह ने कहा कि शंकर लाल जाट जैसे वीर सपूत देश की सुरक्षा की मजबूत दीवार होते हैं। उनका निधन पूरे राष्ट्र की अपूरणीय क्षति है। समाज और सरकार को शहीद के परिवार को हरसंभव सहायता और सम्मान प्रदान करना चाहिए। शोक के इस माहौल के बीच गांव को अपने लाल के त्याग पर गर्व भी रहा। शहीद शंकर लाल जाट का नाम और बलिदान देशवासियों के हृदय में सदैव अमिट रहेगा।