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Kotputli-Behror News: फैक्ट्री में आग लगने से यूपी के मजदूर की दर्दनाक मौत, 24 घंटे बाद मलबे में मिला कंकाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़
Published by: कोटपुतली ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2026 10:31 PM IST
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सार
भिवाड़ी की डुग्गर फाइबर प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में लगी भीषण आग के 24 घंटे बाद मलबे से एक मजदूर का जला हुआ कंकाल मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान यूपी निवासी राजेंद्र के रूप में हुई है, जो पिछले सात वर्षों से फैक्ट्री में काम कर रहे थे।
मृतक राजेंद्र का फाइल फोटो।
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विस्तार
औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी स्थित डुग्गर फाइबर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में बुधवार को लगी भीषण आग के बाद एक मजदूर की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। आग लगने के करीब 24 घंटे बाद गुरुवार दोपहर फैक्ट्री के मलबे के नीचे से मजदूर का जला हुआ कंकाल बरामद होने से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना के बाद कंपनी प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मृतक की पहचान 41 वर्षीय राजेंद्र पुत्र रामाधार के रूप में हुई है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे और पिछले सात वर्षों से भिवाड़ी की एक लेबर कॉलोनी में रहकर फैक्ट्री में काम कर रहे थे। परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं, जो गांव में रहते हैं।
अखिलेश कुमार ने लगाया गंभीर आरोप
परिजनों के अनुसार राजेंद्र बुधवार सुबह करीब नौ बजे रोजाना की तरह काम पर गए थे। दोपहर करीब एक बजे फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। आग की सूचना मिलने पर रिश्तेदार अखिलेश कुमार कंपनी पहुंचे, लेकिन राजेंद्र कहीं दिखाई नहीं दिए। फैक्ट्री में मौजूद कुछ मजदूरों ने बताया कि आग लगने के समय राजेंद्र मशीन संचालन के लिए ऊपर बने स्ट्रक्चर पर चढ़े हुए थे और अचानक आग की चपेट में आ गए।
अखिलेश कुमार ने आरोप लगाया कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने कंपनी प्रबंधन से राजेंद्र की तलाश कराने की मांग की, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को भी सूचना दी, बावजूद इसके कोई तत्काल खोज अभियान नहीं चलाया गया। रात होने पर वे वापस लौट गए और गुरुवार सुबह फिर फैक्ट्री पहुंचे।
परिजनों का आरोप है कि गुरुवार सुबह कंपनी प्रबंधन ने उन्हें फैक्ट्री परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया और मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। काफी बहस और विरोध के बाद अंदर जाने दिया गया। इसके बाद मलबे में तलाश शुरू की गई, जहां राजेंद्र की पूरी तरह जली हुई कंकाल जैसी लाश बरामद हुई।
फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई
शव मिलने के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
भिवाड़ी जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. सागर अरोड़ा ने बताया कि पुलिस की सूचना पर मेडिकल टीम मौके पर भेजी गई थी। शव पूरी तरह जल चुका है और कंकाल की स्थिति में मिला है। परिजनों के पहुंचने के बाद पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे।
ये भी पढ़ें- NEET 2026 UG Paper Leak: पेपर लीक केस में छापेमारी तेज, पांचों आरोपियों से पूछताछ जारी; राजस्थान भी पहुंची टीम
घटना के बाद मजदूरों और परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय रहते फैक्ट्री परिसर में व्यवस्थित तलाश अभियान चलाया जाता तो राजेंद्र का शव इतनी देर बाद नहीं मिलता। परिजनों ने कंपनी प्रबंधन और प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस आग लगने के कारणों के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्थाओं और फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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मृतक की पहचान 41 वर्षीय राजेंद्र पुत्र रामाधार के रूप में हुई है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे और पिछले सात वर्षों से भिवाड़ी की एक लेबर कॉलोनी में रहकर फैक्ट्री में काम कर रहे थे। परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं, जो गांव में रहते हैं।
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अखिलेश कुमार ने लगाया गंभीर आरोप
परिजनों के अनुसार राजेंद्र बुधवार सुबह करीब नौ बजे रोजाना की तरह काम पर गए थे। दोपहर करीब एक बजे फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। आग की सूचना मिलने पर रिश्तेदार अखिलेश कुमार कंपनी पहुंचे, लेकिन राजेंद्र कहीं दिखाई नहीं दिए। फैक्ट्री में मौजूद कुछ मजदूरों ने बताया कि आग लगने के समय राजेंद्र मशीन संचालन के लिए ऊपर बने स्ट्रक्चर पर चढ़े हुए थे और अचानक आग की चपेट में आ गए।
अखिलेश कुमार ने आरोप लगाया कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने कंपनी प्रबंधन से राजेंद्र की तलाश कराने की मांग की, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को भी सूचना दी, बावजूद इसके कोई तत्काल खोज अभियान नहीं चलाया गया। रात होने पर वे वापस लौट गए और गुरुवार सुबह फिर फैक्ट्री पहुंचे।
परिजनों का आरोप है कि गुरुवार सुबह कंपनी प्रबंधन ने उन्हें फैक्ट्री परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया और मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। काफी बहस और विरोध के बाद अंदर जाने दिया गया। इसके बाद मलबे में तलाश शुरू की गई, जहां राजेंद्र की पूरी तरह जली हुई कंकाल जैसी लाश बरामद हुई।
फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई
शव मिलने के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
भिवाड़ी जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. सागर अरोड़ा ने बताया कि पुलिस की सूचना पर मेडिकल टीम मौके पर भेजी गई थी। शव पूरी तरह जल चुका है और कंकाल की स्थिति में मिला है। परिजनों के पहुंचने के बाद पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे।
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घटना के बाद मजदूरों और परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय रहते फैक्ट्री परिसर में व्यवस्थित तलाश अभियान चलाया जाता तो राजेंद्र का शव इतनी देर बाद नहीं मिलता। परिजनों ने कंपनी प्रबंधन और प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस आग लगने के कारणों के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्थाओं और फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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