Rajasthan: नागौर के 500 साल पुराने बुटाटी धाम मंदिर में 22 करोड़ के गबन का दावा, दान पेटी में गड़बड़ी के आरोप
Donation Theft at Butati Dham: बुटाटी धाम मंदिर में 22 करोड़ के कथित गबन के दावे पर कलेक्टर ने क्या कहा, मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने क्या कहा और खुद नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस पर अपनी क्या प्रतिक्रिया दी, आइए जानते हैं।
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विस्तार
राजस्थान के नागौर जिले के प्रसिद्ध बुटाटी धाम (संत श्री चतुरदास महाराज मंदिर) में 22 करोड़ रुपये से अधिक के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। करीब 500 साल पुराने इस मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे, दान और भामाशाहों के सहयोग से बड़ी राशि प्राप्त होती है। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं, कथित फर्जी खर्च, सोने-चांदी के रिकॉर्ड में गड़बड़ी और दान राशि के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर, मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश और एकतरफा जांच करार दिया है, जबकि जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार यादव का कहना है कि जांच में वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं।
पूरा मामला क्या है?
नागौर जिले के बुटाटी स्थित संत श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर विकास समिति पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद तत्कालीन जिला कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित के आदेश पर डेगाना के तत्कालीन एसडीएम मोहन चौधरी की अध्यक्षता में 13 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने 146 दिनों तक जांच करने के बाद 23 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी।
जांच रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में करीब 15.16 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताएं प्रमाणित बताई गईं। वहीं वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने पर प्रतिकूल अनुमान के आधार पर 7.58 करोड़ रुपये और जोड़े गए। इस तरह कथित अनियमितताओं की कुल राशि 22.74 करोड़ रुपये बताई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुरानी समिति के पास 36 किलो चांदी और 250 ग्राम सोना दर्ज था, जबकि नई समिति ने 35.5 किलो चांदी और 280 ग्राम सोना होने की जानकारी दी। हालांकि करीब 2.60 करोड़ रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषणों का स्टॉक रजिस्टर या स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं मिला।
जांच समिति ने भोजनशाला निर्माण में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार समिति ने 49.49 लाख रुपये खर्च दर्शाए, जबकि जांच में दावा किया गया कि ग्राउंड फ्लोर का निर्माण एक भामाशाह ने अपने निजी खर्च से कराया था। इसके अलावा भामाशाहों द्वारा कराए गए अन्य निर्माण कार्यों को भी समिति ने अपने खर्च में शामिल किया। रसोई (भोजनशाला) निर्माण में एक करोड़ रुपये से अधिक के हिसाब में भी कथित गड़बड़ी बताई गई है। इसके अलावा किराया आय, चढ़ावे के लेखांकन और मंदिर फंड के उपयोग में भी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
तत्कालीन एसडीएम मोहन चौधरी की अगुवाई वाली जांच समिति ने मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह समेत तत्कालीन और वर्तमान 11 पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, खातों में मिथ्याकरण और साक्ष्य नष्ट करने जैसे आरोपों में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
समिति अध्यक्ष देवेंद्र सिंह का पक्ष
मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए जांच को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि जांच के दौरान समिति ने सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए, लेकिन उनका पक्ष नहीं सुना गया। उन्होंने पूरे मामले की किसी निष्पक्ष एजेंसी से दोबारा जांच कराने की मांग की। देवेंद्र सिंह ने कहा कि जिस भोजनशाला निर्माण पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसका ग्राउंड फ्लोर पूर्व समिति के समय बना था, जबकि दूसरी मंजिल का निर्माण उनके कार्यकाल में कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर परिसर में लगे एटीएम का किराया बैंक नियमित रूप से दे रही है और उन्होंने किसी प्रकार का घोटाला नहीं किया।
जिला कलेक्टर का जवाब
जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार यादव ने कहा कि समिति को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन समय पर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। उनके अनुसार जांच में वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। हालांकि, उच्च न्यायालय के निर्देशों के कारण फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती। जांच रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार होगी।

मामले को लेकर सांसद बेनीवाल ने कहा कि बुटाटी धाम में सामने आया कथित करोड़ों रुपये के गबन का मामला बेहद गंभीर और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ बड़ा खिलवाड़ है। मंदिर में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा, विश्वास और सेवा भाव से चढ़ावा चढ़ाते हैं, लेकिन यदि उसी धन में अनियमितताओं और गबन के आरोप सामने आते हैं तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि धर्म और जनभावनाओं के साथ विश्वासघात है। राजस्थान के मुख्यमंत्री से मेरी अपील है कि सरकार इस पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे। मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता एवं श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। आस्था पर डाका डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
नागौर से चालीस किलोमीटर दूर अजमेर-नागौर रोड पर कुचेरा कस्बे के पास बुटाटी धाम है, जिसे चतुरदास जी महाराज के मंदिर के नाम से जाना जाता है। लोगों की ऐसी मान्याता है कि यहां हर साल हजारों लोग लकवे के रोग से ठीक होकर जाते हैं। कहा जाता है कि करीब 500 वर्ष पूर्व चतुरदास जी जोकि सिद्ध योगी थे वे अपनी तपस्या से लोगों को रोग मुक्त करते थे।
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