Rajasthan News: राजसमंद में राजीविका के राजसखी मेले का शुभारंभ, प्रदेश भर के एसएचजी लाए सौ से अधिक उत्पाद
Rajsamand News: राजसमंद में राजीविका एवं जिला प्रशासन द्वारा आयोजित राजसखी मेला 22 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित है। प्रदेशभर के स्वयं सहायता समूह सौ से अधिक उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं, जिससे महिलाओं को प्रत्यक्ष विपणन और आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है।
विस्तार
राजसमंद की धरती महिला सशक्तिकरण के रंगों से सराबोर हो उठी, जब राजीविका एवं जिला प्रशासन राजसमंद के संयुक्त तत्वावधान में “राजसखी मेला” का शुभारंभ द्वारकेश वाटिका में उत्साह और गरिमा के साथ हुआ। 22 फरवरी से प्रारंभ हुआ यह मेला 28 फरवरी 2026 तक आमजन के लिए खुला रहेगा। यह आयोजन केवल एक व्यापारिक मंच नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, स्वदेशी उत्पादों और महिला नेतृत्व की सशक्त अभिव्यक्ति का उत्सव है।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता, जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल तथा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बृजमोहन बैरवा ने दीप प्रचलित कर फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया तथा विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का उत्साहवर्धन किया।
अतिथियों ने कहा कि राजीविका के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं ने न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि अपने हुनर से समाज में नई पहचान भी बनाई है।
संगठन और तैयारी से सशक्त आयोजन
यह मेला राजीविका जिला परियोजना प्रबंधक सुमन अजमेरा के निर्देशन एवं सतत प्रयासों से सफलतापूर्वक आयोजित हो सका है। उनके मार्गदर्शन में जिले की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने संगठित होकर उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन की प्रभावी तैयारी की, जिससे यह आयोजन महिला स्वावलंबन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।
सौ से अधिक उत्पादों की प्रदर्शनी
मेले में राजसमंद सहित प्रदेशभर से आए स्वयं सहायता समूहों द्वारा 100 से अधिक उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की व्यवस्था की गई है। इन स्टॉलों पर दाबू प्रिंट की साड़ियां, बेडशीट, सूट-सेट एवं दुपट्टे, हैंडी एम्ब्रॉयडरी, गोटा-पट्टी सूट, ब्लू पॉटरी, राजपूती पोशाक, सूट-कुर्ती-पलाजो, जूट बैग, लेदर मोजरी, चप्पल-जूती, आभूषण, हैंडलूम आइटम, हस्तनिर्मित बैग, टेराकोटा उत्पाद, मीनाकारी, पापड़, अचार, मसाले, अगरबत्ती, ऑर्गेनिक साबुन, एलोवेरा साबुन, मिलेट्स उत्पाद, बाजरे के बिस्किट एवं लड्डू, नमकीन, चूरन, शहद, मसाले, हर्बल उत्पाद, कॉटन परिधान, लड्डू गोपाल ड्रेस, घरेलू उपयोग की वस्तुएं तथा अनेक आकर्षक सजावटी सामग्री उपलब्ध हैं।
हर्बल गुलाल बना विशेष आकर्षण
विशेष आकर्षण के रूप में हर्बल गुलाल भी बिक्री के लिए उपलब्ध है, जिसे महिलाओं ने नीम की पत्तियों, गुलाब की पंखुड़ियों, पलाश के फूलों तथा अन्य प्राकृतिक अवयवों से तैयार किया है। यह गुलाल रासायनिक तत्वों से मुक्त, त्वचा के लिए सुरक्षित तथा पर्यावरण अनुकूल है। प्रत्येक पैकेट में केवल रंग नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और स्वाभिमान की कहानी समाहित है।
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पारंपरिक हुनर और सांस्कृतिक विविधता
मेले में विभिन्न जिलों से आई स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने-अपने पारंपरिक हुनर का प्रदर्शन कर रही हैं। कहीं सुई-धागे से रचे जा रहे नाजुक कढ़ाई के नमूने हैं, तो कहीं मिट्टी को आकार देकर बनाए गए टेराकोटा उत्पाद। कहीं मिलेट्स आधारित पोषक खाद्य सामग्री है, तो कहीं पारंपरिक राजस्थानी परिधानों की शान। यह विविधता राजस्थान की सांस्कृतिक समृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवंतता को दर्शाती है।
आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त कदम
राजसखी मेला स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का प्रभावी मंच है। इससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रत्यक्ष विपणन का अवसर मिल रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त कदम बढ़ा रही हैं। यह आयोजन “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर राजस्थान” की भावना को साकार करता है।
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