Rajasthan: गिरिराज पर्वत पर आस्था की नई पहचान! रामनवमी पर होगा 131 फीट ऊंची बालाजी प्रतिमा का अनावरण
Rajasthan: रामनवमी के अवसर पर गिरिराज पर्वत पर 131 फीट ऊंची बालाजी की प्रतिमा के लोकार्पण के बाद क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यहां आने वाले श्रद्धालु बालाजी जी की प्रतिमा एवं विश्व की सबसे बड़ी शिव प्रतिमा ‘विश्वास स्वरूपम’ के भी दर्शन कर सकेंगे।
विस्तार
राजसमंद जिले के नाथद्वारा स्थित गिरिराज पर्वत पर 131 फीट ऊंची खड़ी बालाजी की भव्य प्रतिमा का लोकार्पण 26 मार्च को प्रातः 9:00 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया जाएगा। आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और तैयारियां अंतिम चरण में हैं। लोकार्पण समारोह वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर के तिलकायत राकेश महाराज एवं युवाचार्य विशाल बाबा के सानिध्य में संपन्न होगा। प्रतिमा का निर्माण करने वाले गिरीश भाई शाह सहित समारोह में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु और विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना है।
वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ होगा कार्यक्रम
लोकार्पण के दिन प्रातःकाल से ही पूजा-अर्चना, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत होगी। ठीक 9 बजे मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया जाएगा। इसके बाद भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचनों का आयोजन किया जाएगा।
आस्था और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
131 फीट ऊंची यह खड़ी बालाजी प्रतिमा गिरिराज पर्वत शिखर पर स्थापित होने के कारण दूर-दूर से दिखाई देगी। यह प्रतिमा क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र बनने के साथ ही नाथद्वारा में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगी।
तीन वर्षों में तैयार हुई भव्य प्रतिमा
प्रतिमा का निर्माण विश्व प्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमावत द्वारा आधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना के साथ करीब तीन वर्षों में पूरा किया गया है। निर्माण में 115 टन स्टील, 40 टन फाइबर ग्लास और M30 ग्रेड उच्च गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी मजबूती और दीर्घायु सुनिश्चित की गई है। मूर्तिकार नरेश कुमावत ने देश और विदेश में करीब 500 से अधिक बड़ी प्रतिमाएं बनाई हैं। इससे पहले उन्होंने यहां विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा ‘विश्वास स्वरूपम’ का निर्माण किया था।
प्रशासन की विशेष व्यवस्थाएं
समारोह को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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प्रेरणा का बनेगा केंद्र
आयोजकों के अनुसार, यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए भक्ति, सेवा और समर्पण की प्रेरणा का स्रोत बनेगी और क्षेत्र की धार्मिक पहचान को नई ऊंचाई देगी।
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