इंतजार शास्त्र सीरीज: नया सियासी नैरेटिव गढ़ रहे अशोक गहलोत, बीजेपी के डबल इंजन के दावे पर बोला हमला
राजस्थान की सियासत में ‘डबल इंजन’ बनाम ‘इंतजार शास्त्र’ की जंग तेज होती नजर आ रही है। एक तरफ भाजपा सरकार तेज रफ्तार विकास के दावे कर रही है, तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot बड़ी परियोजनाओं में हो रही देरी को मुद्दा बनाकर सरकार पर हमलों की नई सीरीज चला रहे हैं, जिसे उन्होंने ‘इंतजार शास्त्र’ नाम दिया है।
विस्तार
राजस्थान की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नया राजनीतिक नैरेटिव ‘इंतजार शास्त्र’ पेश कर भाजपा सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। गहलोत ने कांग्रेस शासनकाल में घोषित और शुरू की गई योजनाओं की मौजूदा स्थिति को लेकर आरोपों की एक पूरी सीरीज छेड़ दी है। गहलोत का आरोप है कि दिसंबर 2023 के बाद से राज्य में जनहित के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स जानबूझकर धीमे कर दिए गए हैं। उन्होंने इसे ‘इंतजार शास्त्र’ करार देते हुए कहा कि सरकार की इस कार्यशैली के कारण जनता, युवा और मरीज, सभी को अनावश्यक इंतजार करना पड़ रहा है।
शिक्षा और संस्थान पर सवाल
इस सीरीज के पहले चरण में गहलोत ने जयपुर स्थित ‘महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज’ का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि करोड़ों की लागत से तैयार यह संस्थान अब तक शुरू नहीं हो पाया है। गहलोत ने सवाल उठाया कि क्या महात्मा गांधी के नाम के कारण सरकार इससे दूरी बना रही है।
आईपीडी टॉवर पर घेरा
‘इंतजार शास्त्र’ के दूसरे अध्याय में गहलोत ने सवाई मानसिंह अस्पताल के आईपीडी टावर की धीमी प्रगति को मुद्दा बनाया। उन्होंने दावा किया कि 1200 बेड का यह प्रोजेक्ट प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए अहम था, लेकिन परियोजना में हो रही देरी के चलते इसकी लागत 400 करोड़ से बढ़कर 764 करोड़ पहुंच गई और काम लगभग ठप पड़ा है।
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सरकार पर ‘राजनीतिक पूर्वाग्रह’ का आरोप
गहलोत ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार कांग्रेस शासन की योजनाओं को राजनीतिक कारणों से आगे नहीं बढ़ा रही। उनके मुताबिक, इससे न सिर्फ परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है, बल्कि आम लोगों को मिलने वाले लाभ भी टल रहे हैं।
‘इंतजार’ बना सियासी मुद्दा
गहलोत की यह सीरीज अब सोशल मीडिया से निकलकर सियासी बहस का केंद्र बनती जा रही है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ‘इंतजार शास्त्र’ के और भी अध्याय सामने आएंगे, जिनमें अलग-अलग क्षेत्रों की योजनाओं की स्थिति को उजागर किया जाएगा। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, गहलोत इस अभियान के जरिए सरकार की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करने के साथ-साथ जनता के बीच एक मजबूत नैरेटिव स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
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