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असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2025 का रास्ता साफ: याचिकाकर्ता ने वापस ली याचिका; 922 पदों पर भर्ती का रास्ता खुला
Fri, 14 Aug 2026 04:51 PM IST
अजमेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: अजमेर ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 04:51 PM IST
सार
Rajasthan News: राजस्थान में कॉलेज शिक्षा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2025 को लेकर चल रहा कानूनी विवाद खत्म हो गया है। धर्मवीर मीणा ने अपनी रिट याचिका वापस ले ली है। RPSC ने अदालत में भर्ती से जुड़े तथ्यों और 348 अतिरिक्त पदों की वृद्धि का पक्ष रखा। अब 922 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Amar ujala graphics
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विस्तार
जयपुर उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉलेज शिक्षा विभाग) भर्ती-2025 से जुड़ी धर्मवीर मीणा की याचिका पर सुनवाई की। राजस्थान लोक सेवा आयोग के अधिवक्ता एम.एफ. बेग ने न्यायालय में विस्तृत जवाब पेश किया। आयोग ने गलत तथ्य प्रस्तुत करने पर धर्मवीर मीणा के विरुद्ध शास्ति लगाने की मांग की थी। इसके बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अपनी रिट याचिका वापस ले ली।
याचिका वापस होते ही भर्ती का रास्ता साफ
याचिका वापस लेने से कॉलेज शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती से जुड़े इस विवाद का पटाक्षेप हो गया। अब भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। न्यायालय ने 30 जुलाई 2026 को याचिकाकर्ता के पक्ष में एक अंतरिम आदेश दिया था।
आयोग ने इस आदेश के बावजूद साक्षात्कार परिणाम जारी रखने की प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया। आयोग ने न्यायालय में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने भ्रामक और गलत तथ्य प्रस्तुत किए हैं। यह मामला एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 13640/2026 से संबंधित था।
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आयोग ने अंतरिम आदेश हटाने के लिए दिया जवाब
आयोग ने अंतरिम आदेश को निरस्त कराने के लिए स्टे वेकेशन एप्लीकेशन प्रस्तुत किया। यह संविधान के अनुच्छेद 226(3) के तहत जवाबदावे के साथ पेश की गई। आयोग ने न्यायालय को बताया कि याचिका में उल्लेखित तथ्य पूरी तरह भ्रामक थे।
574 से बढ़कर 922 हुए पद
भर्ती का विज्ञापन 18 सितंबर 2025 को जारी हुआ था। यह कार्मिक विभाग की 21 जुलाई 2025 की अधिसूचना के बाद आया था। अधिसूचना में सेवा नियमों में संशोधन किया गया था, जिससे अतिरिक्त पदों की वृद्धि की सीमा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई।
यह भी पढ़ें: सीएम का अनूपगढ़ दौरा: जिले का दर्ज खत्म करने के मुद्दे पर सियासत; कांग्रेस नेताओं को बुलाया गया थाने
मूल विज्ञापन में 574 पद थे, जिनमें 348 पदों की वृद्धि की गई। इसके बाद कुल 922 पदों के लिए 13 मई 2026 को शुद्धि पत्र जारी किया गया था। आयोग ने बताया कि पदों की यह वृद्धि पूरी तरह नियमानुसार थी।
तथ्यों के बाद याचिकाकर्ता ने वापस ली याचिका
न्यायालय में आयोग के अधिवक्ता ने भर्ती और पदों की वृद्धि से जुड़े तथ्य रखे। इसके बाद याचिकाकर्ता के पास याचिका आगे बढ़ाने का वैधानिक आधार नहीं बचा। याचिकाकर्ता ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए तत्काल याचिका वापस ले ली।
बड़ी भर्तियों में कैविएट दाखिल करेगा आयोग
आयोग ने भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को निर्बाध रखने के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के निर्देश पर एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों वाली सभी भर्तियों में न्यायालय में कैविएट दायर की जाएगी। आयोग के करीब 3,000 न्यायिक प्रकरण न्यायालयों में लंबित हैं। आयोग के अध्यक्ष केसरी सिंह प्रत्येक मामले पर लीगल टीम के साथ व्यक्तिगत रूप से चर्चा करते हैं।
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याचिका वापस होते ही भर्ती का रास्ता साफ
याचिका वापस लेने से कॉलेज शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती से जुड़े इस विवाद का पटाक्षेप हो गया। अब भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। न्यायालय ने 30 जुलाई 2026 को याचिकाकर्ता के पक्ष में एक अंतरिम आदेश दिया था।
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आयोग ने इस आदेश के बावजूद साक्षात्कार परिणाम जारी रखने की प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया। आयोग ने न्यायालय में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने भ्रामक और गलत तथ्य प्रस्तुत किए हैं। यह मामला एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 13640/2026 से संबंधित था।
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आयोग ने अंतरिम आदेश हटाने के लिए दिया जवाब
आयोग ने अंतरिम आदेश को निरस्त कराने के लिए स्टे वेकेशन एप्लीकेशन प्रस्तुत किया। यह संविधान के अनुच्छेद 226(3) के तहत जवाबदावे के साथ पेश की गई। आयोग ने न्यायालय को बताया कि याचिका में उल्लेखित तथ्य पूरी तरह भ्रामक थे।
574 से बढ़कर 922 हुए पद
भर्ती का विज्ञापन 18 सितंबर 2025 को जारी हुआ था। यह कार्मिक विभाग की 21 जुलाई 2025 की अधिसूचना के बाद आया था। अधिसूचना में सेवा नियमों में संशोधन किया गया था, जिससे अतिरिक्त पदों की वृद्धि की सीमा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई।
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मूल विज्ञापन में 574 पद थे, जिनमें 348 पदों की वृद्धि की गई। इसके बाद कुल 922 पदों के लिए 13 मई 2026 को शुद्धि पत्र जारी किया गया था। आयोग ने बताया कि पदों की यह वृद्धि पूरी तरह नियमानुसार थी।
तथ्यों के बाद याचिकाकर्ता ने वापस ली याचिका
न्यायालय में आयोग के अधिवक्ता ने भर्ती और पदों की वृद्धि से जुड़े तथ्य रखे। इसके बाद याचिकाकर्ता के पास याचिका आगे बढ़ाने का वैधानिक आधार नहीं बचा। याचिकाकर्ता ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए तत्काल याचिका वापस ले ली।
बड़ी भर्तियों में कैविएट दाखिल करेगा आयोग
आयोग ने भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को निर्बाध रखने के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के निर्देश पर एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों वाली सभी भर्तियों में न्यायालय में कैविएट दायर की जाएगी। आयोग के करीब 3,000 न्यायिक प्रकरण न्यायालयों में लंबित हैं। आयोग के अध्यक्ष केसरी सिंह प्रत्येक मामले पर लीगल टीम के साथ व्यक्तिगत रूप से चर्चा करते हैं।