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बीमा कंपनी की मनमानी पर लगाम: टैक्स में गड़बड़ी बताकर रिजेक्ट किया था क्लेम, अब ब्याज समेत चुकाना होगा बिल

Tue, 21 Jul 2026 08:20 AM IST
सिरोही ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही Published by: सिरोही ब्यूरो Updated Tue, 21 Jul 2026 08:20 AM IST
सार

सिरोही जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि टैक्स रसीद की तकनीकी गड़बड़ी के आधार पर बीमा कंपनी वैध क्लेम खारिज नहीं कर सकती। आयोग ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 1,00,953 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने के साथ 20 हजार रुपये मानसिक संताप और 5 हजार रुपये परिवाद व्यय का भुगतान करने का आदेश दिया।

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Sirohi Consumer Court Orders Insurance Company to Pay Claim with Interest
सिरोही जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने टैक्स रसीद में गड़बड़ी के आधार पर बीमा क्लेम खारिज किया - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सिरोही जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा दावों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उपभोक्ताओं के हित में फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल टैक्स रसीद में कथित गड़बड़ी या राजस्व संबंधी तकनीकी त्रुटि के आधार पर बीमा क्लेम पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। आयोग ने द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए परिवादी को क्षतिपूर्ति राशि ब्याज सहित अदा करने तथा मानसिक संताप एवं परिवाद व्यय का भुगतान करने का आदेश दिया है।
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बीमा कंपनी ने क्लेम अस्वीकार किया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिवादी का वाहन द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से बीमित था। 9 जून 2023 को अहमदाबाद से सिरोही लौटते समय ऊंझा के निकट हाईवे पर खड़े एक ब्रेकडाउन वाहन से टक्कर होने के कारण उनका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना में वाहन को गंभीर क्षति पहुंची और उसकी मरम्मत पर करीब ढाई लाख रुपये का खर्च आया। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम अस्वीकार कर दिया कि वाहन के लिए गुजरात राज्य का रोड टैक्स जमा नहीं कराया गया था तथा प्रस्तुत टैक्स रसीद निरस्त अथवा फर्जी पाई गई थी। इसके बाद परिवादी ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया।
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आयोग ने माना, बीमा क्लेम खारिज करना गलत
आयोग के अध्यक्ष अभिमन्युसिंह राठौड़, सदस्य नवीनचंद्र मिश्रा एवं सदस्या जया मिस्त्री की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस प्रमाण-पत्र, पंजीकरण प्रमाण-पत्र तथा राजस्थान एवं गुजरात का वैध परमिट मौजूद था।
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बीमा कंपनी गड़बड़ी साबित नहीं कर सकी
आयोग ने यह भी माना कि दुर्घटना वास्तविक थी तथा बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि कथित टैक्स रसीद की गड़बड़ी का दुर्घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध था। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग द्वारा स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, यदि किसी नियम के उल्लंघन का दुर्घटना से सीधा संबंध नहीं है, तो केवल तकनीकी या राजस्व संबंधी त्रुटि के आधार पर बीमा दावा पूरी तरह अस्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसा करना सेवा में कमी माना जाएगा।


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क्षतिपूर्ति राशि सहित बीमा दावा अदा करने के आदेश
आयोग ने बीमा कंपनी को सर्वेयर द्वारा आकलित 1,00,953 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि परिवाद दायर करने की तिथि 25 जनवरी 2024 से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया। इसके अलावा 20 हजार रुपये मानसिक एवं शारीरिक संताप तथा 5 हजार रुपये परिवाद व्यय के रूप में भी भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना से असंबंधित तकनीकी या कर संबंधी त्रुटियों के आधार पर वैध बीमा दावा अस्वीकार नहीं किया जा सकता।

 

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